प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। संगम क्षेत्र में बढ़ती गंगा रात करीब साढ़े 12 बजे बड़े हनुमान मंदिर परिसर में पहुंच गई और गर्भगृह तक पानी पहुंचने लगा। इसके साथ ही मां गंगा ने लेटे हनुमान को स्नान कराया। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और सिंचाई विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
सिंचाई विभाग (बाढ़ प्रखंड) के अधिशासी अभियंता दिग्विजय नारायण शुक्ला ने बताया कि माताटीला बैराज, लहचूरा, मौदहा डैम से पानी छोड़ा गया है। बेतवा का एक लाख 60 हजार क्यूसेक पानी यमुना से आ रहा है। टोंस में एक मीटर से अधिक वृद्धि से छतनाग के आगे गंगा का प्रवाह प्रभावित हुआ है। बताया कि नैनी में यमुना का जलस्तर एक मीटर 25 सेमी बढ़ने की संभावना है। छतनाग में गंगा के जलस्तर में डेढ़ मीटर, फाफामऊ में एक मीटर वृद्धि की संभावना है। रात आठ बजे फाफामऊ और छतनाग में गंगा क्रमश: चार-चार सेमी प्रति घंटा बढ़ रही थीं।
वही, मान्यता है कि जब गंगा का जल गर्भगृह तक पहुंचकर लेटे हनुमान को स्पर्श करता है तो इसे गंगा द्वारा अपने पुत्र बजरंगबली को स्नान कराने का पावन अवसर माना जाता है। उधर, गंगा जल के मंदिर में प्रवेश करते ही महंत और साधु-संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा का स्वागत किया। इसके बाद विधि-विधान से पूजा और आरती की गई। दूध, दही, घी और पंचामृत अर्पित कर मां गंगा की आराधना की गई। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच हर-हर गंगे और जय श्री राम के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें लेटे हनुमान मंदिर की सीढ़ियों से गंगा का जल नीचे जा रहा है।
उधर,मध्य प्रदेश में लगातार हुई जोरदार बारिश की वजह से मंदाकिनी ने शनिवार को प्रलयकारी रूप दिखाया। धर्मनगरी चित्रकूट के यूपी-एमपी क्षेत्र को पूरी तरह जलमग्न कर दिया। रात में मंदाकिनी का जलस्तर काफी कम होने के बाद बाढ़ में हुई बर्बादी का मंजर नजर आने लगा है। बाढ़ के पानी में डूबे मकानों के भीतर रखी गृहस्थी पूरी तरह बर्बाद हो गई है। शनिवार की दोपहर से ही यूपी-एमपी क्षेत्र में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी व स्थानीय पुलिस टीमें गोताखोरों के साथ रेस्क्यू करने में लगी रहीं। यूपी क्षेत्र में 10 टीमें देर रात तक रेस्क्यू में लगी रहीं। करीब दो सौ लोगों को टीम ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। वहीं दूसरी ओर एमपी क्षेत्र में प्रशासन व एसडीआरएफ टीम बचाव और राहत कार्य में आधी रात तक लगी रही। एमपी इलाके में वायुसेना के दो हेलीकाप्टरों के जरिए आधा सैकड़ा से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। एमपी प्रशासन ने आधी रात तक चले रेस्क्यू के दौरान करीब आठ सौ लोगों को बाढ़ क्षेत्र से सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया है। बाढ़ पीड़ितों के ठहरने के लिए एमपी प्रशासन ने 10 राहत शिविर संचालित किए हैं।
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