1933 में पर्सी शॉ एक धुंधली रात में घर लौटते हुए सड़क पर एक रोशनी देखते हैं। वह रोशनी बिल्ली की आँखों से परावर्तित हुई थी, जिससे शॉ रुक कर अपनी गलती पहचानते हैं। इस घटना से प्रेरित होकर उन्होंने सड़क पर रिफ्लेक्टिव स्टड का आविष्कार किया, जिसे आज कैट्स आइज़ कहा जाता है।
कैट्स आइज़ के निर्माण के बाद से, दुनिया भर की सड़कों पर इन परावर्तक स्टड का इस्तेमाल होता आ रहा है। शॉ का विज्ञान से कोई संबंध नहीं था, परंतु उन्होंने बिल्ली की आँखों की चमक की नकल करने का प्रयास किया, जिसके लिए काँच की छोटी गोलियाँ इस्तेमाल की गईं।
बिल्लियों की आँखों में टेपेटम ल्यूसिडम नामक परावर्तक परत होती है, जो रेटिना के पीछे स्थित है। यह परत रोशनी को दोबारा परावर्तित करती है, जिससे कम रोशनी में भी देखने की क्षमता बढ़ती है। टेपेटम ल्यूसिडम की संरचना केवल बिल्लियों में ही नहीं, कुत्तों, घोड़ों और मवेशियों में भी पाई जाती है।
आधुनिक इंजीनियरों ने इस जैविक सिद्धांत को अपनाते हुए रोबोट, ड्रोन और EV में उपयोग के लिए हाई‑टेक कैमरे विकसित किए हैं। दक्षिण कोरिया के कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफ़ेसर यंग‑मिन सॉन्ग ने बिल्ली की आँखों की परावर्तक परत को नैनो‑स्केल पर दोहराने के बजाय सिल्वर की परत लगाकर आर्टिफ़िशियल रिफ्लेक्टर बनाया, जिससे कैमरे की प्रकाश अवशोषण क्षमता 52% बढ़ गई।
सॉन्ग ने बिल्ली की पुतली के खड़े होने की विशेषता पर भी ध्यान दिया। तेज रोशनी में पुतली की पतली खड़ी दरार दूरी का अनुमान लगाने में मदद करती है। उन्होंने इसी अवधारणा को कैमरे के अपर्चर में अपनाया, जिससे जटिल पृष्ठभूमि से वस्तु को अलग करने में सहायता मिलती है।
वर्तमान में अपर्चर को हाथ से बदलना पड़ता है, परंतु सॉन्ग का मानना है कि भविष्य में रोशनी के स्तर के अनुसार स्वचालित समायोजन संभव होगा।
सॉन्ग और उनकी टीम ने अन्य जानवरों की आँखों से प्रेरित कैमरे भी बनाए हैं। 2013 में उन्होंने मक्खी की आँख से प्रेरित कैमरा विकसित किया, जो व्यापक दृश्य क्षेत्र और तेज़ वस्तु पहचान में सक्षम है, जिससे रोबोटिक ड्रोन में इसका प्रयोग सम्भव है।
इसके बाद उन्होंने बाज़ की आँख से प्रेरित कैमरा बनाया, जो केंद्रीय क्षेत्र में उच्च रिज़ॉल्यूशन और परिधि में कम रिज़ॉल्यूशन के साथ छवियाँ कैप्चर करता है।
साथ ही, मकड़ी की आँखों से प्रेरित कैमरा भी विकसित किया गया, जिसमें कई परतों वाली रेटिना के कारण दूरी का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है—जो मिसाइल गाइडेंस सिस्टम जैसे अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त है।
आज अधिकांश कैमरा सिस्टम इंसानी आँख की नकल करते हैं, परंतु जानवरों की अनोखी दृश्य क्षमताओं से प्रेरित कैमरे रोबोट, उद्योग, ड्रोन और अगली पीढ़ी के किसी भी रोबोटिक सिस्टम में विशेष कार्यों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
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