नेपाल में आई प्रलयंकारी बाढ़ को देखते हुए संभावित खतरे से निबटने के लिए बिहार के सभी तटबंधों की चौकसी बढ़ा दी गई है। खासकर गंडक नदी के जलस्तर में लगातार उतार चढ़ाव हो रहा है। साथ ही नेपाल से भारी मात्रा में मलबा भी बहकर आ रहा है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सारण तटबंध सहित सभी महत्वपूर्ण तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी है। इसके लिए संभी संबंधित अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दे दिया गया है, ताकि बाढ़ आने पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी जाए।
जल संसाधन विभाग ने संबंधित जिलों के पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी अलर्ट मोड में रहने को कहा है। संबंधित जिले के डीएम अपने अधीन तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग के मुख्यालय स्तर पर हर आधे घंटे पर गंडक नदी के डिस्चार्ज की जानकारी ली जा रही है। इंजीनियरों की टीम चौबीसो घंटे काम कर रही है।
डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने कहा कि ग्लेशियर फटने से नेपाल में बाढ़ की तबाही हुई है। लेकिन बिहार के वाल्मिकीनगर अवस्थित गंडक बराज से नेपाल के उस केंद्रबिंदु की दूरी लगभग 250-300 किलोमीटर है। इस कारण नेपाल से आने वाले पानी का प्रवाह-प्रभाव नीचे आते-आते कम हो गया है। इसका लाभ बिहार को हुआ।
इसके अलावा गंडक के पूरे प्रवाह में पहले से भी सामान्य से कम पानी था। खतरे के निशान से नदी बह रही थी। इसलिए जो भी पानी आया, उससे बहुत भयावह स्थिति नहीं बनी। शुक्रवार को गंडक में वाल्मीकिनगर बराज के समीप लगभग एक लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता रहा।
26 अगस्त की सुबह तिब्बत प्रभाग में ग्लेशियर लेक के आउटब्रस्ट होने से नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ आ गई थी। बाढ़ का पानी गंडक नदी में प्रवाह होने से बिहार के गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर जिले में बाढ़ आने की संभावना जताई गई थी। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने उक्त जिलों में स्थित सभी तटबंधों की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा दी है।
विभाग ने गंडक बराज पर मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में एक तकनीकी दल को तैनात कर दिया है। जल संसाधन विभाग ने सतर्कता बरतते हुए गंडक बराज के सभी 36 गेटों को खोल दिया है, ताकि नेपाल से आने वाला बाढ़ का पानी निकल सके।
अधिकारियों के अनुसार मुख्यालय स्तर से गंडक नदी में आने वाली संभावित बाढ़ को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं जिससे सारण तटबंध सहित उससे प्रभावित होने वाले सभी तटबंध सुरक्षित रहे। आपात स्थिति आने पर आसानी से निपटा जा सके।
गंडक नदी की लंबाई लगभग 260 किलोमीटर है। इसका कैचमेंट एरिया 4188 वर्ग किलोमीटर है। इस पर 511.66 किलोमीटर तटबंध है। गंडक के कारण 3350 वर्ग किलोमीटर का इलाका बाढ़ की चपेट में आ जाता है। तटबंधों से 6240 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को बाढ़ से बचाने में मदद मिलती है। गंडक का पानी 1.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैल जाता है। पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिले पर इसका सीधा असर होता है।
राज्य की कई नदियों का पानी खतरे के निशान को पार कर गया है। मुजफ्फरपुर में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से 97 सेमी नीचे रहा। शनिवार को इसमें 52 सेमी वृद्धि होने की संभावना है। वैशाली के हाजीपुर में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से 94 सेमी नीचे रहा। शनिवार को इसमें 12 सेमी वृद्धि होने की संभावना है। गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक खतरे के निशान से 63 सेमी ऊपर रहा। शनिवार को इसमें तीन सेमी कम होने की उम्मीद है।
खगड़िया में बूढ़ी गंडक का पानी खतरे के निशान से 58 सेमी ऊपर रहा। खगड़िया के बलतारा में कोसी का जलस्तर खतरे के निशान से 64 सेमी ऊपर रहा। कटिहार के कुरसेला में कोसी का जलस्तर खतरे के निशान से 66 सेमी ऊपर रहा। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार शनिवार को नेपाल के गंडक, बिहार के नॉर्थ कोयल में हल्की से साधारण और अन्य सभी जलग्रहण क्षेत्रों में हल्की वर्षा होने की संभावना है।
गंगा, बागमती, कोसी सहित कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। पटना के गांधीघाट में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 68 सेंटीमीटर ऊपर रहा। दीघाघाट में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से दो सेमी, हाथीदह में 71 सेमी, कहलगांव में 82 सेमी तो साहेबगंज में 60 सेमी ऊपर रहा। पटना के मनेर में सोन का जलस्तर खतरे के निशान से 53 सेमी ऊपर रहा। सीवान के दरौली में घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से तीन सेमी ऊपर रहा।
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