रियाद के एक प्रमुख हवाई अड्डे पर हुए हालिया हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई और 309 घायल हुए।
उसी दिन, दम्माम के किंग फ़हद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास भी एक मिसाइल गिरी, जिससे स्थानीय अधिकारियों को यमन के हूती विद्रोहियों के दावों की याद दिलाई।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि मक्का समझौते के तहत पाकिस्तान की सऊदी अरब की संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट है।
मक्का समझौते के प्रावधानों के अनुसार, किसी एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाता है, जिससे सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की के बीच एक जटिल सुरक्षा ढाँचा बनता है।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूती विद्रोहियों को हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया और इसे ‘युद्ध अपराध’ बताया। फिर भी, राजधानी रियाद पर हमलों से रक्षा में असमर्थता सवाल उठाती है।
अमेरिकी मीडिया ने रिपोर्ट की कि यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत सऊदी के लिए सीमित विकल्प छोड़ रही है, और हर विकल्प की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब व्यापक युद्ध से बचना चाहता है, परंतु हूती विद्रोहियों की बढ़ती दृढ़ता क्षेत्रीय संघर्ष की संभावना बढ़ा रही है।
मक्का समझौते के बावजूद पाकिस्तान और तुर्की सऊदी की रक्षा में सक्रिय क्यों नहीं हैं, इस पर भी चर्चा चल रही है।
ईरान, यद्यपि अमेरिका के साथ संघर्ष में है, फिर भी हूती विद्रोहियों को लंबी रेंज के ड्रोन और मिसाइलों से सशक्त बना रहा है।
हूती विद्रोहियों की क्षमताएँ इतनी बढ़ गई हैं कि वे रियाद के शहरी इन्फ़्रास्ट्रक्चर और रिहायशी इलाकों पर बड़े पैमाने पर हमले कर सकते हैं।
सऊदी अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो दिनों में रियाद और आभा के दो बड़े हवाई अड्डों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले हुए, जिनमें तीन लोगों की मौत और दर्जनों घायल हुए।
हूती सेना के प्रवक्ता ने दावा किया कि सऊदी हवाई क्षेत्र अब उनकी सैन्य कार्रवाइयों का केंद्र बन गया है।
सऊदी की विशाल हथियार भंडार के बावजूद, जमीन पर प्रभावी प्रॉक्सी के अभाव में वे इन हमलों को रोक नहीं पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी को एक ऐसी सेना तैयार करनी होगी जो वास्तविक युद्ध के लिए तैयार हो, और नागरिकों को भी अपने देश की रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी ने मिसाइल इंटरसेप्टर की कमी बताई और फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से हवाई रक्षा सहायता की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सऊदी पर हूती के लगातार सीमा पार हमलों की निंदा की और संघर्ष की तेज़ी पर चिंता जताई।
इस संघर्ष के कारण दो लाख से अधिक लोग अपने घरों से भागने को मजबूर हुए हैं, जिससे मानवीय संकट गहरा रहा है।
रियाद की सुरक्षा के इस सवाल का जवाब क्षेत्रीय राजनीति, अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों और हथियारों के असमान वितरण में निहित है, जो सऊदी को अपनी राजधानी की रक्षा में चुनौतियों का सामना करवा रहा है।
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