नेपाल के रसुआ जिले में तिब्बत बार्डर के पास बादल फटने के बाद आई बाढ़ के बाद जिले में हाई अलर्ट है। वाल्मिकीनगर गंडक बैराज से करीब 2.50 लाख से तीन लाख क्यूसेक तक पानी डिस्चार्ज होने की संभावना के बाद गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने की आशंका को लेकर वैशाली जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने स्थिति की जानकारी दी। कहा कि चिह्नित तटीय इलाके के लोगों को खास तौर पर रात में सतर्क रहने की अपील की गई है। इसको लेकर तिरहुत तटबंध के किनारे हाजीपुर, लालगंज और वैशाली प्रखंड में माइकिंग करवाई जा रही है। जहां जहां बालू भरे बैग भरने की जरूरत दिख रही है, वहां युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। एसडीआरएफ को अलर्ट मोड में तैनात कर दिया गया है। पटना से दो वोट और सात अतिरिक्त जवान भी मंगा लिए गए हैं, जो रातभर जलस्तर की निगरानी करेंगे।
डीएम ने बताया कि ग्लेशियर फटने के बाद पानी आज सुबह 9 बजे नेपाल पहुंच गया। प्रारंभिक स्तर पर यह पानी तेजी से आगे बढ़ रहा है। नेपाल से होते हुए गंडक नदी के जरिए बेतिया के रास्ते शाम को बिहार में प्रवेश करने की संभावना है। इन क्षेत्रों के निचले इलाके में गंडक और नारायणी नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। गंगा में पहले से अधिक पानी होने के कारण बैक वॉटर मैकेनिज्म से भी गंडक का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि तकनीकी टीम के अनुसार इस बार लगभग ढाई लाख क्यूसेक पानी आने का अनुमान है।
वैशाली डीएम ने बताया कि 2004 में लगभग 5 लाख क्यूसेक पानी आया था, तब पूरा हाजीपुर शहर जलमग्न हो गया था। इस बार स्थिति उतनी गंभीर नहीं है। शहर में बनी नई ड्रेनेज व्यवस्था से 30 प्रतिशत पानी की निकासी हो जाएगी। फिर भी नगर परिषद के 4 से 5 वार्ड, हथसारगंज, बसंतपुर, भगवानपुर, लालगंज और राघोपुर दियारा में पानी प्रवेश कर सकता है।
बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। डीएम ने बताया कि सभी तटबंधों पर हर तीन किलोमीटर पर होमगार्ड, इंजीनियर और कर्मियों की तैनाती की गई है। रात में विशेष निगरानी के लिए नाइट विजिल शुरू की गई है। सभी अंचलाधिकारी और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी फील्ड में हैं। सभी पंचायतों के मुखियाओं और जनप्रतिनिधियों को वीसी के माध्यम से सूचना दे दी गई है।
निचले इलाकों में माइकिंग शुरू करा दी गई है। पशुओं के लिए पशु कैंप, लोगों के लिए चिह्नित शरण स्थल और आवश्यकता पड़ने पर सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की गई है। सूखा राशन, पॉलिथीन शीट और पशु चारा भेज दिया गया है। एसडीआरएफ की टीमों को एक्टिव कर दिया गया है और पर्याप्त संख्या में नावों को तैयार रखा गया है। अतिरिक्त नावों की व्यवस्था भी शाम तक कर ली जाएगी। मेडिकल टीमों को नाव के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।
डीएम ने विशेष अपील करते हुए कहा कि गंडक और गंगा किनारे निचले इलाकों में रहने वाले लोग अलर्ट रहें। घर में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पशु हैं, तो पहले से तैयारी रखें ताकि सूचना मिलते ही 10 से 15 मिनट में सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर शिफ्ट हो सकें। यदि पानी घुसता है तो सुरक्षा के तहत बिजली काटी जाएगी। आपदा एसओपी के अनुसार सभी राहत कार्य किए जाएंगे। प्रशासन हर घंटे जलस्तर की अपडेट देता रहेगा।
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