CGHS New Rules 2026: केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के परिवारों के लिए CGHS (Central Government Health Scheme) से जुड़ी बड़ी राहत सामने आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने गंभीर और जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे आश्रित बेटों और भाइयों के लिए CGHS और सेंट्रल सर्विसेस (Medical Attendance) Rules, 1944 के तहत मेडिकल सुविधा के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत पात्र आश्रित बेटे और भाई अब गंभीर, क्रॉनिक या टर्मिनल बीमारी की स्थिति में जीवनभर मेडिकल सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। खास बात यह है कि ऐसे मामलों में शादी होना CGHS सुविधा बंद करने का आधार नहीं बनेगा। हालांकि, इसका लाभ तभी मिलेगा, जब निर्धारित आर्थिक निर्भरता की शर्तें पूरी हों और सक्षम मेडिकल बोर्ड बीमारी तथा स्थिति का आकलन कर कवरेज जारी रखने की सिफारिश करे।
पहले नियमों के तहत सामान्य तौर पर अविवाहित आश्रित बेटा 25 वर्ष की उम्र तक CGHS सुविधा का पात्र होता था। वहीं, स्थायी रूप से दिव्यांग अविवाहित बेटे को जीवनभर सुविधा मिल सकती थी। इसी तरह आश्रित भाई के लिए सामान्य आयु सीमा 18 साल थी, जबकि दिव्यांग आश्रित भाई को उम्र की सीमा के बिना सुविधा मिल सकती थी। अब गंभीर या टर्मिनल बीमारी से पीड़ित पात्र आश्रित बेटे और भाइयों के लिए उम्र और वैवाहिक स्थिति से जुड़ी शर्तों में राहत दी गई है।
सरकार के अनुसार, नए प्रावधान मुख्य रूप से ऐसी बीमारियों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, जिनसे व्यक्ति की डेली की कार्यक्षमता लंबे समय तक प्रभावित होती है या उसके लिए आजीविका कमाना और आत्मनिर्भर होना मुश्किल हो जाता है। इसमें गंभीर या जानलेवा कैंसर, गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियां, लंबे समय तक इलाज या सपोर्ट की जरूरत वाली एंड-स्टेज ऑर्गन डिजीज, गंभीर जन्मजात या जेनेटिक बीमारियां और इसी तरह की गंभीर, क्रॉनिक या मल्टी-सिस्टम बीमारियां शामिल हो सकती हैं।
हालांकि, हर बीमारी या हर मामले में अपने आप जीवनभर CGHS सुविधा नहीं मिलेगी। पात्रता का फैसला केस-टू-केस आधार पर किया जाएगा। इसमें बीमारी कितनी गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली है, उससे व्यक्ति की डेली की जिंदगी कितनी प्रभावित है, उसकी कमाने या आत्मनिर्भर बनने की क्षमता क्या है और वह वास्तव में परिवार पर कितना निर्भर है। इन सभी पहलुओं को देखा जाएगा। जटिल या मल्टी-सिस्टम बीमारी के मामलों में संबंधित एक्सपर्ट मरीज की मेडिकल स्थिति और कार्यक्षमता का आकलन करेंगे।
CGHS लाभार्थियों के मामलों में पात्रता का आकलन और सिफारिश क्षेत्रीय स्तर पर गठित मेडिकल बोर्ड्स (Medical Boards) करेंगे। अगर किसी लाभार्थी को बोर्ड की सिफारिश पर आपत्ति है, तो CGHS मुख्यालय में गठित अपीलीय चिकित्सा बोर्ड (Appellate Medical Board) के सामने अपील या संदर्भ किया जा सकता है। वहीं, सेंट्रल सर्विसेस (Medical Attendance) Rules, 1944 के तहत आने वाले लाभार्थियों की पात्रता का आकलन और सिफारिश DGHS (Directorate General of Health Services) द्वारा की जाएगी।
नए नियमों की एक अहम बात यह भी है कि शादी होने के बाद भी पात्र आश्रित बेटे या भाई की CGHS सुविधा सिर्फ विवाह के कारण बंद नहीं होगी। लेकिन इस छूट का मतलब यह नहीं है कि उनके पति/पत्नी या बच्चों को भी CGHS सुविधा अपने आप मिल जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वैवाहिक स्थिति में यह राहत केवल पात्र आश्रित बेटे या भाई तक सीमित रहेगी और इससे CGHS में ‘परिवार’ की परिभाषा का विस्तार नहीं होगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी कहा है कि इन मामलों में मेडिकल मानदंड और बीमारियों की सूची को स्थायी या अंतिम नहीं माना जाएगा। CGHS बोर्ड संबंधित मेडिकल एक्सपर्ट से सलाह लेकर समय-समय पर इन नॉर्म्स और बीमारी प्रोफाइल की समीक्षा करेगा। इस बदलाव से गंभीर बीमारियों के कारण लंबे समय तक परिवार पर निर्भर रहने वाले पात्र आश्रितों को इलाज की निरंतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!