भोटे कोशी... भारत में जैसा ये नाम अनसुना लगता है. इस नदी की यात्रा से भी हम अनजान हैं. 26 अगस्त को तिब्बत के बर्फीले ग्लेशियर से निकलने वाली ये नदी वेग और विकराल विनाश लेकर आई. वीडियो में खड़ी चढ़ाई और संकरे गलियारों में भोटे कोशी की लहरें सहज ही कंपा देती हैं. ये नदी संकरी घाटी में फंसकर सांप की तरह लहराती, उफनती, चट्टानों से टकराकर झाग उगलती.
ऐसा लगता हर मोड़ पर उसका रोष बढ़ता. पानी का रंग काला-भूरा और मटमैला होता दिख रहा था.
पानी का वेग इतना था कि संकरी घाटियां दरकने लगीं. पुल टूटे, सड़कें बह गईं, गांव पल भर में मिट गए. वेगवान धारा चट्टानों को उखाड़ती, पेड़ों को जड़ से उखाड़ती, घरों को निगलती हुई आगे बढ़ रही थी. उसकी गर्जना पहाड़ों को कंपा रही थी. पानी की दीवारें उठ-उठकर गिर रही थीं, जैसे आसमान फट पड़ा हो. सिन्धुपाल्चोक की संकरी पगडंडियां मौत की राह बन गईं. आज भोटे कोशी सिर्फ नदी नहीं, प्रलय की जीवित धारा थी. इस हादसे में अबतक 72 लोग मौत हो चुकी है, जबकि 450 से लगभग लोग लापता हैं. इसमें 133 भारतीय हैं.
भोटे कोशी ने दो देशों में तबाही मचाई. तिब्बत और नेपाल.
आप बिहार के कोसी नदी का नाम सुने होंगे. जिसे बिहार का शोक कहा जाता है. बिहार के कोसी का नदी का एक सिरा भोटे कोशी से ही जुड़ा है. थोड़ा अजीब सा लगने वाले इस नदी के नाम का मतलब समझ लीजिए.
नेपाली भाषा में 'भोटे' या भोटिया का मतलब तिब्बती या तिब्बत से आने वाला होता है और 'कोशी' का अर्थ नदी है. इसलिए भोटे कोशी का शाब्दिक अर्थ है 'तिब्बत से आने वाली नदी' या 'तिब्बती नदी.' तिब्बत में इसे पोइक्वु या मत्सांग त्सांगपो कहा जाता है. दोनों नामों का भाव भी लगभग 'तिब्बती नदी' जैसा ही है.
भोटे कोशी नदी का उद्गम तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (चीन) में झांग्जांगबो ग्लेशियर से होता है. इसका स्रोत समुद्र तल से लगभग 8,012 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यहां ये नदी लुमी चिमी झील से निकलकर बहना शुरू करती है.
A massive flash flood has devastated Nepal’s Rasuwa district, with Syapru Besi and Timure among the worst-hit areas. Homes, roads, bridges and hydropower infrastructure have been swept away, while the full scale of the damage is still emerging. The Bhote Koshi flows into…
यह एक सीमापार नदी है, यानी कि दो देशों से होकर गुजरती है. इसके ऊपरी कैचमेंट एरिया में ग्लेशियर और ऊंचे हिमालयी इलाके हैं. वहां से पानी नीचे उतरता हुआ नेपाल में प्रवेश करता है.
भोटे कोशी नदी तिब्बत के उच्च हिमालयी क्षेत्रों से दक्षिण की ओर बहती है. इसके बाद यह नदी नेपाल-चीन सीमा पर फ्रेंडशिप ब्रिज के पास नेपाल के सिन्धुपाल्चोक जिला में प्रवेश करती है. यहां से इसे भोटे कोशी कहा जाता है.
26 अगस्त को हुआ हादसा फ्रेंडशिप ब्रिज के पास ही हुआ है.
सिन्धुपाल्चोक जिले में गहरी घाटियों और खड़ी ढलानों से होकर बहुत तेज गति से बहती है. जिससे यह नेपाल की सबसे खड़ी राफ्टिंग योग्य नदियों में से एक मानी जाती है.
नेपाल में बाह्रबीसे गांव के बाद इसे सुन कोशी कहा जाने लगता है.
इसके बाद सुन कोशी अन्य सहायक नदियों जैसे अरुण, तामुर आदि के साथ मिलकर सप्तकोशी बनती है, जो नेपाल से भारत के बिहार में प्रवेश करके कोसी नदी के रूप में गंगा में मिलती है.
Water levels have surged in Nepal's Bhote Koshi river following a flash flood on the Tibetan side, prompting alerts across the Trishuli basin. There are reports of several Indian and foreign tourists missing in Nepal. The river’s path continues downstream – Bhote Koshi feeds… pic.twitter.com/TyliQVW17D
इस नदी की कुल लंबाई लगभग 146 किमी के लगभग है. जिसमें ये नदीं तिब्बत में 78 किलोमीटर और नेपाल में 68 किलोमीटर बहती है.
आज की घटना को इससे जोड़कर समझिए
भोटे कोशी की सबसे बड़ी खासियत और सबसे बड़ा खतरा एक ही है. यह बहुत ऊंचे हिमालय से बहुत तेजी से नीचे उतरती है. ग्लेशियर, बर्फ, चट्टान, भूस्खलन और अचानक पानी का दबाव इस नदी को कुछ ही समय में बेहद खतरनाक बना सकते हैं.
नदी ऊंचे हिमालय से बहुत तेजी से नीचे उतरती है. इसलिए सामान्य दिनों में भी इसका पानी काफी शक्तिशाली होता है. यही वजह है कि यहां राफ्टिंग और कयाकिंग भी लोकप्रिय है.
तिब्बत की तरफ से अचानक भारी मात्रा में पानी भोटे कोशी में आया. शुरुआती आकलन में बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से के खिसकने/एवलॉन्च की आशंका जताई गई है. इससे नदी में अचानक पानी और मलबे का बहुत बड़ा उफान आया. हालांकि घटना का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और जांच जारी है.
फिर तबाही कैसे दोनों देशों तक पहुंची?
ऊपर पहाड़ों में अचानक पानी और मलबे का एक विशाल पैकेज बना और वह भोटे कोशी की घाटी में नीचे की तरफ दौड़ पड़ा. अब सोचिए हिमालय की ढलाई और अचानक पानी का बहुत बड़ी मात्रा
सबसे पहले इसका असर तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में असर पड़ा. इसके बाद पानी नेपाल की तरफ आया और रसुवा जिले के तिमुरे, स्याफ्रूबेसी और आसपास के इलाकों में तबाही मचाने लगा. सड़कें, पुल, घर और बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुईं. इसके बाद बाढ़ आगे बढ़ते हुए नेपाल के दूसरे हिस्सों तक पहुंची.
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