नारियल पानी का सेवन मौसम चाहे जो भी हो, शरीर में पानी की कमी को जल्दी पूरा करने के लिए लोग पसंद करते हैं। बीमारी के दौरान भी यह पहली पसंद बन जाता है।
बोतलों में ‘Fresh Coconut Water’ मिलने के बाद, यह पेय और भी सुलभ हुआ है। इसकी प्राकृतिक मिठास बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को आकर्षित करती है। डॉक्टर भी इसे स्वास्थ्य का अमृत मानते हैं, पर कुछ लोगों के लिए यह हानिकारक हो सकता है।
भारत में नारियल की खेती बड़े पैमाने पर होती है, खासकर दक्षिण भारत में। केंद्र सरकार के आँकड़ों के अनुसार, भारत विश्व का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक है, जहाँ लगभग 1 करोड़ किसान और 3 करोड़ लोग इस पर निर्भर हैं।
डायटीशियन रेशमा अलीम के अनुसार, नारियल पानी एक प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट है, जो शरीर में पानी और आवश्यक तत्वों के संतुलन को बनाए रखता है। अन्य फलों के जूस से कम कैलोरी के कारण यह अधिक स्वास्थ्यवर्धक है।
इसमें पोटैशियम की मात्रा अधिक और चीनी कम होती है। रेशमा अलीम बताती हैं कि यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है, इसलिए किसी भी उम्र के लिए उपयुक्त है।
इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स में अक्सर पोटैशियम और नमक की मात्रा अधिक होती है, जो केवल तीव्र शारीरिक गतिविधि करने वाले लोगों के लिए फायदेमंद है। सामान्य लोगों को ऐसे ड्रिंक्स की ज़रूरत नहीं होती।
नारियल पानी में पोटैशियम, सोडियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, ज़िंक और आयरन जैसे खनिज होते हैं। अमेरिका के कृषि विभाग के अनुसार, 100 ग्राम में लगभग 250 मिलीग्राम पोटैशियम और 100 मिलीग्राम सोडियम पाया जाता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन के अध्ययन में पाया गया कि नारियल पानी में 95.5% पानी, 0.1% फैट्स, 4% कार्बोहाइड्रेट्स, 0.02% कैल्शियम और 0.01% फॉस्फ़ोरस होता है। साथ ही इसमें एमिनो एसिड, विटामिन बी‑कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी और अन्य पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
जैसे-जैसे नारियल सूखता है, पानी की मात्रा घटती है और रासायनिक तत्वों में बदलाव आता है। फाइबर और प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है, जबकि पानी में घुले हुए खनिज कम हो जाते हैं। इसलिए सूखे नारियल के पानी को स्पोर्ट्स ड्रिंक के रूप में उपयोग किया जाता है।
रेशमा अलीम के अनुसार, मैराथन धावक या जिम में तीव्र कसरत करने वाले लोगों को केवल नारियल पानी पर्याप्त नहीं होता। उन्हें पोटैशियम जैसी आवश्यक खनिजों को बनाए रखने के लिए विशेष स्पोर्ट्स ड्रिंक्स की आवश्यकता होती है।
नारियल पानी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे रक्त शर्करा पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है। बिना ऊपर से चीनी मिलाए 240 मिलीलीटर में लगभग 9‑10 ग्राम चीनी होती है, जो प्राकृतिक है।
डायबिटीज़ वाले लोगों के लिए, रेशमा अलीम का कहना है कि चीनी का सेवन नियंत्रित रखना ज़रूरी है। वे 100 मिलीलीटर तक नारियल पानी पी सकते हैं, पर यह रक्त शर्करा पर निर्भर करता है। लगातार उच्च शर्करा वाले लोगों को इससे बचना चाहिए।
डायबिटीज़, किडनी रोगी और पोटैशियम बढ़ाने वाली दवाएँ लेने वाले लोगों में हाइपरकलेमिया का ख़तरा अधिक होता है। ऐसे लोगों को नारियल पानी से बचना चाहिए।
सामान्यतः स्वस्थ व्यक्तियों को रोज़ उचित मात्रा में नारियल पानी पीना सुरक्षित है। लेकिन किडनी, दिल या दवा के कारण पोटैशियम बढ़ने की संभावना वाले लोगों को इसे पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए।
नारियल का दूध और नारियल पानी में पोषण के लिहाज़ से बड़ा अंतर है। नारियल दूध में कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट्स और फैट्स की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।
प्रोसेस्ड और पैक्ड नारियल पानी में प्राकृतिक पोटैशियम का अधिकांश हिस्सा नष्ट हो जाता है। इसलिए पैकेट पर लिखी सामग्री को ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है, ताकि आप वास्तविक पोषक तत्वों का सेवन कर सकें।
यह लेख केवल सूचना के लिये है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परेशानी के लिए डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह लें।
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