कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबली टेंशन के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट आई। इंट्रा-डे में 1400 अंक तक टूटने के बाद सेंसेक्स तीन महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ तो निफ्टी भी पांच महीने के निचले स्तर पर ठहरा। इस हाहाकार की वजह से निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। आइए जानते हैं वो बड़े कारण जिस वजह से बाजार धराशायी हो गया।
बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 777.94 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 74,003.82 अंक पर बंद हुआ। मजबूती के साथ खुला सेंसेक्स कारोबार के दौरान एक समय 787.73 अंक फिसलकर 73,994.03 अंक के निचले स्तर तक आ गया था। इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 279.50 अंक यानी 1.19 प्रतिशत गिरकर 23,118.60 अंक पर बंद हुआ। यह छह अप्रैल, 2026 के बाद निफ्टी का सबसे निचला बंद स्तर है। इस भारी गिरावट ने BSE में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन से 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम खत्म कर दी। BSE का मार्केट कैपिटल घटकर 472 लाख करोड़ रुपये रह गया।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर में करीब छह प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), टाइटन, बजाज फिनसर्व, अडानी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी नुकसान में रहे। दूसरी तरफ, एचसीएल टेक्नोलॉजीज 3.98 प्रतिशत, इन्फोसिस 3.64 प्रतिशत, टेक महिंद्रा 2.31 प्रतिशत, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 2.18 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 1.27 प्रतिशत चढ़े।
- ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। सऊदी अरब में सैन्य ठिकाने पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह चिंता का बड़ा कारण है। ब्रेंट क्रूड की बात करें तो 108 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है जबकि WTI क्रूड भी करीब 104 डॉलर तक पहुंच गया है।
-अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 5% के अहम स्तर को पार कर गई है। यह 2023 के बाद पहली बार हुआ है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब है कि निवेशकों को अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद होती है। ऐसे में कुछ निवेशक शेयरों से पैसा निकालकर बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों की तरफ जा सकते हैं। इस वजह से ग्लोबल मार्केट दबाव में आ गया है।
-अमेरिकी फेडरल रिजर्व की FOMC बैठक के नतीजे बुधवार को आने हैं। बाजार में ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। हाल के महंगाई आंकड़ों में भी दबाव दिखा है। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, ''कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ते वैश्विक बॉन्ड यील्ड से निवेशक धारणा प्रभावित होने के कारण घरेलू बाजार में गिरावट जारी रही।'' उन्होंने कहा कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की इस सप्ताह होने वाली बैठकों से पहले निवेशक सतर्क रहे और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में नीतिगत सख्ती की बढ़ती आशंकाओं के बीच लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की चिंता बनी रही। नायर ने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के ऊंचे स्तर के करीब रहने से उभरते बाजारों की धारणा प्रभावित हुई और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने दबाव बढ़ाया।
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