सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस के मौके पर कहा कि हमारी प्रतिस्पर्धा चुनावी उड़ानों पर नैय्या तय करने वाले लोगों से नहीं समय से है। जिस बच्चे को आज आप पढ़ा रहे हैं, यदि आप चूक गए तो उसका बचपन दोबारा नहीं आने वाला। इसलिए हम सबको समय के साथ सही दिशा में आगे बढ़ने, निर्णय लेने और खुद को अपडेट करने की आदत बनानी होगी। एक मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल के एक वीडियो की जांच में पता चला कि नागपुर के एक जर्जर भवन का चित्र लाकर झांसी के नाम पर चस्पा कर दिया। कहीं का वीडियो कहीं के नाम पर दिखा जा रहा है। यह यूपी और यहां के शिक्षा जगत को बदनाम करने की साजिश है।
सीएम योगी ने शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की स्थिति को लेकर विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बयान देना आसान है लेकिन 1.60 लाख बच्चों के अकाउंट में डीबीटी के जरिए पैसा पहुंचा देना, संस्कृत से छठी क्लास से आचार्य तक बच्चों को स्कॉलरशिप से जोड़ देना, प्रोजेक्ट अलंकार, ऑपरेशन कायाकल्प, कस्तूरबा गांधी विद्यालय में एक साथ छठी से 12 वीं तक की पढ़ाई जैसे निर्णय करना कठिन था जो हुए हैं। उन्होंने कहा कि यूपी के लाखों बच्चों के जीवन और शिक्षा व्यवस्था में जो आमूलचूल परिवर्तन हुआ है क्या यह परिवर्तन उनको दिखाई नहीं पड़ता है। गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में सीएम योगी आदित्यनाथ चयनित 81 शिक्षकों को सम्मानित किया।
इनमें बेसिक के 61 और माध्यमिक के 15 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 और माध्यमिक के पांच शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में 33 महिला शिक्षक भी रहीं। बेसिक शिक्षा विभाग की 31 और माध्यमिक शिक्षा विभाग की दो महिला शिक्षिकाओं को पुरस्कार के लिए चुना गया। पुरस्कार के साथ ही शिक्षकों को सम्मान राशि और अन्य सुविधाएं भी दी गई हैं। हर शिक्षक को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 25 हजार रुपये की सम्मान राशि दी गई। राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में दो वर्ष की वृद्धि का प्रावधान है। इसके अलावा पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को आजीवन उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में प्रत्येक वर्ष 4000 किलोमीटर तक निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। पुरस्कार समारोह में शामिल होने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चयनित शिक्षक गोरखपुर पहुंचे थे। शासन की ओर से सभी चयनित शिक्षकों के ठहरने की व्यवस्था होटलों में विशिष्ट अतिथि के रूप में की गई थी।
कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि हर क्षेत्र में राजनीति हो सकती है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में नहीं होनी चाहिए। विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण की जगह हैं। यहां शिक्षक का ध्यान किसी राजनीतिक विचार या स्वार्थ के बजाय बच्चों की शिक्षा, संस्कार और प्रतिभा निखारने पर होना चाहिए। शिक्षा जितनी मजबूत होगी, समाज और राष्ट्र की नींव उतनी ही मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला नहीं, बल्कि बच्चों को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी है। उसके आचरण और कार्यशैली का प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में संसाधन महत्वपूर्ण हैं। लेकिन उससे अधिक जरूरी शिक्षक की इच्छाशक्ति और काम के प्रति समर्पण है। उन्होंने सीमित संसाधनों में नवाचार के जरिए अपने विद्यालयों की तस्वीर बदल देने वाले शिक्षकों की तारीफ की और कहा कि ऐसे प्रयोगों को दूसरे विद्यालयों तक पहुंचाने की जरूरत है। अधिक से अधिक बच्चों को नवाचारों का लाभ मिलना चाहिए।
सीएम योगी न कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं है। बच्चों में ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। शिक्षक को उसकी प्रतिभा पहचानकर उसे आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। सीएम योगी ने तेजी से बदलती तकनीक का उल्लेख किया और शिक्षकों से खुद को समय की जरूरतों अनुरूप अपडेट रखने का आह्वान किया। सीएम योगी ने कहा कि तकनीक, शिक्षा का विकल्प नहीं है। यह उसे बेहतर बनाने का जरिया है। इसका ठीक ढंग से इस्तेमाल कर शिक्षण को अधिक सरल, रोचक और उपयोगी बनाया जा सकता है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!