उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर चौड़ी सड़क बनायीँ जा रही है। इस विस्तार में शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा रास्ते में आ रहा है, इसलिए प्रशासन ने उस हिस्से को हटाने की तैयारी शुरू कर दी। हटाने की प्रक्रिया शुरू होते ही बड़ी भीड़ मस्जिद के आसपास जमा हो गई, जबकि पुलिस और सुरक्षा बल पहले से तैनात थे। विरोध तेज़ होने पर पथराव और आंसू गैस तक की स्थिति बन गई।
रात में काजी खलीलुर्रहमान और प्रशासन के बीच बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने प्रभावित हिस्से को हटाने पर सहमति जताई और यह तय किया कि मस्जिद समिति खुद ही उस हिस्से को हटाएगी, न कि प्रशासन की मशीनों से। इस बात को उज्जैन के कलेक्टर रौशन कुमार ने सार्वजनिक किया और काजी के बयान का वीडियो भी उनके आधिकारिक हैंडल पर साझा किया गया।
सोमवार सुबह सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था और मस्जिद के हिस्से को हटाने का काम शुरू हो गया। परंतु उसी समय विरोधी गुट ने भीड़ जुटा ली। स्थानीय स्तर पर संदेशों के प्रसार से लोगों की भीड़ बढ़ी और स्थिति बिगड़ती गई।
काजी खलीलुर्रहमान ने वीडियो संदेश में कहा, "शाही मस्जिद कमेटी खुद अपने हाथों से मस्जिद तोड़ रही है, कुछ लोग सोशल मीडिया पर फिजूल माहौल बना रहे हैं, शहर हमारा है और हमें इसकी सुरक्षा भी करनी है।"
पुलिस के अनुसार, भीड़ में महिलाएँ भी शामिल थीं। कुछ लोग बैरिकेड को धकेलकर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे पथराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि पूरी मस्जिद को नहीं, बल्कि केवल वह हिस्सा हटाया जा रहा है जो 15 मीटर की नई सड़क की अलाइनमेंट में पड़ता है। इसमें नमाज़घर का एक छोटा हिस्सा, लगभग 120 फीट ऊँची मीनार और मज़हर चौक शाही का कुछ भाग शामिल है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 सितंबर को इस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
प्रशासन का तर्क है कि इस सड़क पर पहले ही 10 मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्से हटाए जा चुके हैं, और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए निर्धारित चौड़ाई आवश्यक है। उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा, "समाज के सभी वर्ग और समुदाय लगातार सहयोग दे रहे हैं, और आज भी शाही मस्जिद में मस्जिद समिति द्वारा शुरू किया गया विध्वंस कार्य चल रहा है।"
मस्जिद समिति का कहना है कि आसपास की दुकानों और अन्य हिस्सों को पहले ही सड़क चौड़ाई के लिए हटा दिया गया है, अब विकल्प के तौर पर अलाइनमेंट बदलने पर विचार किया जाना चाहिए। प्रशासन का मानना है कि तय चौड़ाई और सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए प्रभावित निर्माण हटाना अनिवार्य है।
काजी ने लोगों से अपील की कि वे विवाद में न पड़ें और प्रशासन की तय व्यवस्था के अनुसार काम करें, अफवाहों पर ध्यान न दें। लेकिन जमीन पर सहमति के बावजूद विरोधी गुट का प्रकट होना मामला जटिल कर गया।
कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर के बीच लगभग 900 मीटर के रास्ते में कुल सात धार्मिक स्थल सड़क के विस्तार में आए हैं। इनमें से अधिकांश के प्रभावित हिस्से पहले ही हटाए जा चुके हैं, जैसे बोहरा समाज की मस्जिद भी सामाजिक सहमति से हटाई गई थी। शाही मस्जिद अब ही मुख्य विवाद का केंद्र बन गया है।
रात की सहमति से लेकर सुबह के विरोध तक की पूरी श्रृंखला इस बात को उजागर करती है कि सड़क चौड़ाई, मस्जिद का हिस्सा और सामाजिक रुख एक जटिल टकराव में बदल गए हैं, जिसमें पथराव, आंसू गैस और चोटें भी शामिल हैं।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!