देश के बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोहली का शव नगर कोतवाली क्षेत्र के सप्तसरोवर मार्ग स्थित एक खोखे में फंदे से लटका मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का सामने आया, हालांकि आत्महत्या के कारणों की अभी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचना दे दी है। तीन दिन पहले ही सुरेंद्र ने चाय का खोखा किराये पर लिया था। यहां वह सदाराम बनकर रह रहा था। .metering_wall_container {min-height:58px;max-height:58px;position:relative;transition:max-height 0.5s ease-in-out;}
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि सुरेंद्र करीब तीन महीने से हरिद्वार में रह रहा था। यहां करीब दो सप्ताह सिडकुल क्षेत्र की दीपगंगा सोसायटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की। एक रात एक कंपनी में भी काम किया। दिल्ली के नरेला के रहने वाले धर्मेंद्र से उसकी कुछ दिन पहले रोशनाबाद में मुलाकात हुई थी। धर्मेंद्र के मुताबिक, उसने काम दिलाने के लिए कहा था। तब उसने भूपतवाला में उसे चाय की दुकान दिलाई थी। धर्मेंद्र ने अनिल शर्मा नाम के शख्स से उसे किराये पर चाय की दुकान दिलाई थी। पुलिस के अनुसार, सुरेंद्र पिछले कुछ समय से आर्थिक परेशानी से जूझ रहा था। बुधवार को उसकी किसी व्यक्ति से फोन पर बातचीत भी हुई थी। इसके बाद से वह परेशान बताया जा रहा था।
धर्मेंद्र के पहुंचने पर खुला सुरेंद्र की मौत का राज धर्मेंद्र ने मीडिया से बातचीत में बताया कि शुक्रवार सुबह वह दुकान पर पहुंचे थे। इससे पहले बुधवार शाम उनकी आखिरी बार सुरेंद्र से मुलाकात हुई थी। शुक्रवार सुबह दुकान पर एक दीवानजी बैठे थे और चाय पीने की बात कह रहे थे, लेकिन खोखे का शटर बंद था। धर्मेंद्र के मुताबिक, शटर पर हाथ मारा, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद लॉक पर जोर लगाया तो वह पहले से ढीला था, तो एकदम खुल गया। अंदर देखा तो शव पड़ा था। गले में रस्सी कसी हुई थी। आधी रस्सी का हिस्सा नीचे तो आधा ऊपर पंखे की तरफ बंधा था। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और सुरेंद्र के बैग की तलाशी ली। बैग से मिले पहचान पत्र के आधार पर उसकी पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में हुई। धर्मेंद्र ने बताया कि उन्हें भी उसके असली नाम और निठारी कांड के बारे में जानकारी नहीं थी। करीब 15 दिन पहले ही उनकी सुरेंद्र से मुलाकात हुई थी। उस समय उसने अपना नाम सदाराम बताया था और काम की तलाश में होने की बात कहते हुए रोते हुए काम दिलाने के लिए मदद मांगी थी।
क्या था निठारी कांड 29 दिसंबर 2006 को नोएडा के सेक्टर-31 स्थित व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे नाले से बच्चों के कंकाल और हड्डियां बरामद हुईं थीं। जांच में पता चला था कि 2005-2006 के दौरान निठारी गांव और उसके आसपास से कई गरीब बच्चे और युवतियां रहस्यमय तरीके से गायब हुई थीं। इस मामले में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को मुख्य आरोपी बनाया गया था। पुलिस और सीबीआई जांच में आरोप लगाया गया कि सुरेंद्र कोली बच्चों को चॉकलेट और मिठाइयों का लालच देकर कोठी के अंदर लाता था, जहां उनका यौन शोषण करने के बाद उनकी हत्या कर दी जाती थी और उनके शवों के टुकड़े किए जाते थे। इस बहुचर्चित कांड में कुल 19 मामले दर्ज किए गए थे। निचली अदालतों ने आरोपियों को सजा सुनाई थी, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद साल 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सबूतों के अभाव में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सुरेंद्र कोली के आखिरी लंबित मामले में उसकी दोषसिद्धि को खारिज कर दिया था।
प्रथमदृष्टया फांसी लगाकर आत्महत्या करने की बात सामने आई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। पैनल के माध्यम से पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अभी तक की जांच में पता चला है कि मृतक सुरेंद्र कोली निठारी कांड में आरोपी रहा है। इस मामले में सभी पहलुओं पर जांच चल रही है। परिजनों को सूचना दे दी गई है। - शिशुपाल सिंह नेगी, सीओ सिटी, हरिद्वार
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