कानपुर के दवा व्यापारी विनीत मिनोचा की हत्या के बाद 21 दिन जेल में रहने के बाद शालू मिनोचा को आज व्यक्तिगत बॉन्ड पर रिहा किया गया। अदालत ने उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण रिहाई का आदेश दिया, जबकि पुलिस ने भी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर उनका नाम साजिश से बाहर कर दिया।
रिहा होते ही शालू अपनी बहन के साथ गाड़ी में बैठकर घर की ओर रुख किया। वह बताती हैं कि वह अभी भी समझ नहीं पा रही हैं कि उनके साथ आखिर क्या हुआ। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पति सुब्रत की कोई योजना का पता नहीं था और वह इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं कि उनका पति ऐसा कदम उठा सकता है।
शालू के अनुसार, हत्या वाले दिन वह और उनका पति सुब्रत एक पार्टी में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि दोनों ने सामान्य बातचीत की और साथ में समय बिताया। वह कहती हैं कि उन्हें घर में चल रही किसी भी साजिश या योजना का बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था। सुब्रत के स्वभाव को “सीक्रेटिव” बताते हुए उन्होंने कहा कि पिता के साथ उनका रिश्ता हमेशा से टेढ़ा-मेढ़ा रहा, लेकिन वह कभी नहीं सोच पाई कि यह टकराव इतना बड़ा अपराध बन जाएगा।
जांच के दौरान शालू और पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम के बीच हुई बातचीत और घर में उसकी एंट्री को लेकर भी सवाल उठे थे। शालू ने इन आरोपों को खारिज किया, कहती हैं कि वह सिर्फ रंगोली के लिए फूल मंगाने के सिलसिले में विशाल से मिली थीं और गार्ड को केवल उसकी एंट्री करवाने को कहा था। घर की चाबी देने के आरोपों को लेकर उन्होंने पहले ही अदालत में अपना पक्ष रख लिया था।
जेल से बाहर आने के बाद शालू की सबसे बड़ी चिंता उनका छह साल का बेटा है। वह चाहती हैं कि बच्चा इन घटनाओं से अनभिज्ञ रहे और रिहाई के बाद उनका पहला लक्ष्य अपने बेटे से मिलना है। भविष्य में पति को माफ करना है या रिश्ते को कैसे संभालना है, इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं ले पा रही हैं और कहती हैं कि उन्हें इस कठिन दौर से बाहर निकलने के लिए समय चाहिए।
विनीत मिनोचा की हत्या के बाद पुलिस ने शुरुआती तौर पर पूर्व नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया था। प्रारम्भिक पूछताछ में विशाल ने कहा कि हत्या की सुपारी उनके पति सुब्रत ने दी थी, जिससे शालू को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। लेकिन आगे की जांच में साक्ष्यों ने सुब्रत की भूमिका को उजागर किया, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और शालू के खिलाफ सबूतों की कमी को मानते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
मामले की मुख्य घटना 5 सितंबर की रात हुई थी, जब रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट, कल्याणपुर में विनीत मिनोचा की हत्या कर दी गई। सीसीटीवी और अन्य साक्ष्य ने प्रारम्भिक रूप से विशाल और राजकिशोर को संदेहास्पद बना दिया, परन्तु आगे की जांच ने हत्या की साजिश में सुब्रत के हाथों को दिखाया।
शालू के वकील शिवाकांत दीक्षित ने रिहाई को न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि शुरू से ही उनका मानना था कि शालू का नाम केवल दूसरे गवाह के बयान पर जोड़ा गया था, और आगे की जांच में पुलिस को शालू के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले। इस कारण अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट के साथ शालू को रिहा करने का आदेश दिया।
अब केस की आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है, जबकि शालू अपने बेटे के साथ रहने और इस कठिन समय से उबरने के लिए समय चाहती हैं।
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