अमेरिका‑ईरान तनाव, रूस‑यूक्रेन युद्ध और अन्य भू‑राजनीतिक टेंशन ने विश्व भर में तेल‑गैस की आपूर्ति को अस्थिर कर दिया है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे देशों में पेट्रोल‑डीजल की कीमतों में तेज़ी देखी गई, जबकि अमेरिका में डीजल की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं।
इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपनी आयात रणनीति में विविधता लाई और घरेलू उत्पादन बढ़ाया। परिणामस्वरूप, भारत न केवल घरेलू बाजार को स्थिर रख पाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रमुख ऊर्जा सप्लायर के रूप में उभरा। यूरोप से लेकर केन्या तक, कई देशों ने भारत की रिफाइनिंग क्षमता पर भरोसा करना शुरू कर दिया है।
तुर्की का भरोसा भारत पर
पहले तुर्की अपनी डीजल जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह से रूसी क्रूड पर निर्भर था। 2025 में तुर्की के 85 % डीजल आयात रूस से आते थे। लेकिन 2026 में रूसी सप्लाई घटने के बाद यह प्रतिशत केवल 20 % रह गया। इस अंतर को भरने के लिए तुर्की ने भारत की ओर रुख किया। Kpler के डेटा के अनुसार, अगस्त 2026 में तुर्की ने भारत से प्रतिदिन 1.2 लाख बैरल से अधिक डीजल खरीदा – यह रिकॉर्ड स्तर था। एनर्जी एस्पेक्ट्स ने बताया कि यह भारत‑तुर्की डीजल लेन‑देन 2022 के बाद सबसे बड़ी मासिक सप्लाई रही।
यूरोप को 60 % डीजल भारत से
यूरोप के लिए भी भारत एक प्रमुख डीजल सप्लायर बन चुका है। Bab‑el‑Mandeb स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज़ों पर लोड होने वाले डीजल का लगभग 60 % भारतीय रिफाइनरियों ने प्रदान किया। इस महीने यूरोप के प्रमुख शिपिंग रूट पर लगभग 2 लाख बैरल प्रतिदिन डीजल या गैसोलीन का प्रवाह हुआ, जिसमें अधिकांश भारत से आया।
केन्या का भरोसा भी भारत पर
पूर्वी अफ्रीका के केन्या ने भी तेल‑गैस आपूर्ति में बाधाओं के कारण अपना फ्यूल स्रोत बदलना शुरू किया। पहले सऊदी, अरामको, ADNOC और एमिरेट्स जैसी कंपनियों से खरीदारी होती थी, लेकिन अब भारत ने केन्या को गैसोलीन, डीजल, जेट‑फ्यूल और फ्यूल‑ऑयल की सप्लाई में यूएई और सऊदी को पीछे छोड़ दिया है। Kpler की अगस्त 2026 की रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि भारत केन्या का सबसे बड़ा पेट्रोलियम प्रोडक्ट सप्लायर बन चुका है।
भारत – विश्व का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर
भारत की बढ़ती ग्लोबल भूमिका का मुख्य कारण उसकी रिफाइनिंग क्षमता है। 258.1 मिलियन टन प्रति वर्ष की स्थापित क्षमता के साथ भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, जो घरेलू मांग से भी अधिक उत्पादन करता है। 2025‑26 में भारत ने 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया, जिससे वह रिफाइन्ड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बन गया।
भारत की तेल‑स्ट्रेटेजी सरल है: बड़ी मात्रा में क्रूड आयात (India Crude Oil Import) करके इसे घरेलू रिफाइनरियों में प्रोसेस किया जाता है, आवश्यक हिस्से को देश में उपयोग किया जाता है और शेष को यूरोप, तुर्की, केन्या जैसे देशों को निर्यात किया जाता है। इस प्रक्रिया में किफायती Russian Oil की खरीद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे भारत को लागत‑प्रभावी डीजल उत्पादन में लाभ मिला।
इन सब कारणों से भारत न केवल घरेलू ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपना स्थान मजबूत कर रहा है।
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