दलित समाज के आरक्षण पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतनराम मांझी के बीच चल रहे तकरार में लालू यादव सबसे बड़ी बेटी और सांसद मीसा भारती का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा है कि आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़कर जीतने वाले लोग आरक्षण की समीक्षा पर अपना ज्ञान दे रहे हैं। सांसद ने आरोप लगाया है कि जो बीजेपी कहती है वही एनडीए के घटक दलों के नेता करते हैं क्योंकि किसी के पास अपनी ताकत नहीं बची है। मीसा भारती ने नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और उपेंद्र कुशवाहा पर भी भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है।
दलित आरक्षण में सब कोटा पर हिन्दुस्तानी आवामा मोर्चा के सुप्रीमो जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन(बिहार सरकार के मंत्री) अड़े हुए हैं तो दूसरी ओर चिराग पासवान का कहना है कि आरक्षण में जो प्रावधान है उसमें कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। इस मुद्दे पर चिराग ने मांझी पिता-पुत्र को इस्तीफा देकर बहस की चुनौती भी दे दी है। इस मामले में भाई तेजस्वी यादव और बहन रोहिणी आचार्या के बाद राजद नेत्री सह पाटलीपुत्र की सांसद मीसा भारी ने एंट्री ले ली है। उन्होंने एनडीए के घटक सभी सहयोगी दलों के नेताओं को एक साथ निशाने पर ले लिया है।
पत्रकारों से बात करते हुए मीसा भारती ने कहा कि आरक्षण पर वही लोग बात कर रहे हैं जो खुद सुरक्षित सीट से जीतकर आते हैं। चिराग पासवान सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ते आ रहे हैं और जीतनराम मांझी का पूरा परिवार ही सुरक्षित सीट पर लड़ता है। अगर इन लोगों को आरक्षण पर बहस करना है को पहले सुरक्षित सीट से इस्तीफा दें और सामान्य सीट से चुनाव लड़ें।
मीसा भारती ने कहा कि दोनों दल केंद्र और बिहार में सरकार में शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी इन्हें जैसा कहती है वैसा ही बोलते हैं। ये लोग बीजेपी के कहने से बाहर नहीं जा सकते क्योंकि, इनमें अपनी ताकत नहीं है। चाहे उपेंद्र कुशवाहा हों या नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू हो या चिराग और जीतनराम मांझी की पार्टी हो किसी में अपनी रीढ़ की हड्डी नहीं बची है। ये लोग बिहार के मुद्दे पर कुछ बोल ही नहीं सकते। छात्रों और बेरोजगारों की आवाज पर भी कुछ नहीं बोल सकते हैं। यही वजह के डबल इंजन सरकार ने 21 वर्षों के कार्यकाल में एक फैक्ट्री लगाने का काम नहीं किया।
दरअसल आरक्षण के मुद्दे पर एनडीए के भीतर ही तकरार है। जीतनराम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमने और चिराग पासवान के बीच कुछ दिनों से आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा पर बयानबाजी चल रही है। इसमें लालू परिवार काफी ऐक्टिव है। पहले रोहिणी आचार्या ने सिंगापुर से ट्वीट कर संदेश दिया कि जबतक समाज में असमानता कायम है तबतक आरक्षण पर समीक्षा नहीं हो सकती। रविवार को तेजस्वी यादव ने भी आरोप लगाया कि चिराग पासवान और जीतनराम मांझी जैसे आरक्षण के पैरोकार आरएसएस और भाजपा के साथ खड़े हैं जो आरक्षण को समाप्त करना चाहते हैं। इस मुद्दे पर कई नेताओं के बयान आ चुके हैं।
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