मुरादाबाद जिले में तेंदुए के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। तेंदुए अब जंगल और खेतों में नहीं बल्कि घरों से घसीटकर लोगों को शिकार बना रहे हैं। ठाकुरद्वारा तहसील के बहापुर बलिया गांव में शुक्रवार रात को घर के अंदर सो रहे ई-रिक्शा चालक दिव्यांग जगराज (39) को तेंदुआ घर से खींचकर गन्ने के खेत में ले गया वहां उसके सीने व अन्य जगहों का मांस खा गया। गर्दन दांतों से काटकर अलग कर दी। इससे पहले इसी गांव की दो महिलाओं को तेंदुए ने मार डाला। ग्रामीणों ने मांगों को लेकर कई घंटे तक शव नहीं उठने दिया।
ग्रामीणों ने तेंदुए को आदमखोर घोषित कर उसे मौत के घाट उतारने की मांग उठाई। दहशत में जी रहे ग्रामीणों में जबर्दस्त आक्रोश है। पुलिस प्रशासन और वन अफसरों से उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई। बमुश्किल समझा बुझाकर अफसरों ने लगभग दो बजे शव पुलिस के हवाले किया। शव का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। बहापुर बलिया में शनिवार की सुबह घटना का पता उस वक्त चला जब मृतक के बच्चों ने देखा कि जगराज चारपाई पर नहीं है और कमरे में खून पड़ा है। जगराज के भाई व अन्य लोगों ने अफसरों को सूचना दी फिर आक्रोशित ग्रामीण हंगामा करने लगे।
पूर्व में तेंदुए के हमले में हुई मौतों में इतनी वीभत्स तरीके से किसी की मौत नहीं हुई जितनी बहापुर बलिया के जगराज की। तेंदुए ने गर्दन काटने के साथ सीने से पेट तक बुरी तरह मांस खाया। पसलियां भी नहीं छोड़ी उन्हें भी चबा गया। इस तरह तेंदुए ने हमला किया कि शिकार को खेत में ले जाकर आराम से उसे अपना निवाला बनाया और भूख मिटाई।
जगराज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देर शाम आई तो ऐसा सच सामने आया कि सिहर उठेंगे। तेंदुए ने जगराज की गर्दन काटी, सीने का मांस खा डाला। फेफड़े खाए और दिल भी खा लिया। इसके अलावा पसलियां तक नहीं छोड़ी। माना जा रहा है कि उसे रात में शिकार के बाद उससे पेट भरने का पूरा मौका मिला। इसी वजह से जहां से भी वह अपना भोजन बना सकता था उसने उसी तरह नोच कर खा डाला।
ठाकुरद्वारा। कोतवाली क्षेत्र के गांव बलिया में दिव्यांग रिक्शा चालक गजराज सिंह को तेंदुआ घर से खींचकर जंगल में ले गया था, जहां हमला कर उसकी जान ले ली थी। घटना के बाद शनिवार को रालोद नेता एवं पूर्व विधायक विजय यादव, ब्लॉक प्रमुख पति डॉ. वीर सिंह सैनी, ठाकुर अजय प्रताप और आजाद समाज पार्टी के नेता जरीफ मलिक गांव पहुंचे। नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना पर दुख जताया। पूर्व विधायक विजय यादव ने परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी।
शनिवार सुबह उस समय परिवार में कोहराज मच गया, जब जगराज सिंह के तीनों बच्चे दादी के घर से अपने घर पहुंचे। घर के अंदर खून बिखरा देखकर उन्हें पिता के गायब होने का पता चला। घबराए बच्चे बराबर में रहने वाले अपने चाचा धर्मपाल के पास पहुंचे और उनसे पूछा कि क्या उन्होंने उनके पिता को देखा है। बच्चों ने बताया कि घर में पिता मौजूद नहीं हैं और काफी खून पड़ा हुआ है। बच्चों की बात सुनते ही धर्मपाल के होश उड़ गए। उन्होंने बिना देर किए घर के पीछे स्थित गन्ने के खेतों में जगराज की तलाश शुरू कर दी।
करीब 200 मीटर आगे जाने पर उन्हें जगराज का क्षत-विक्षत शव दिखाई दिया। भाई का शव देखकर धर्मपाल की चीख निकल गई। उनकी आवाज सुनकर आसपास खेतों में मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने घटना की जानकारी पुलिस और वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही अधिकारियों ने मामले की जानकारी जुटाई।
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