महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर से सामने आया 'आइफोन प्रकरण' अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया है. इस मामले में 19 साल के एक नवयुवक और उसके माता-पिता की दर्दनाक मौत ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
यही वजह है कि घटना के चार-पांच दिन बाद भी सोशल मीडिया से लेकर देशभर में लोगों के बीच इसकी चर्चा जारी है. कुणाल और उसके परिवार का पहाड़ी से गिरने का वीडियो भी काफी वायरल है, और इसे लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन पुलिस की जांच में मामले की अलग ही तस्वीर सामने आई है.
पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस के मुताबिक, माता-पिता के पारिवारिक विवाद से परेशान 19 वर्षीय कुणाल चांदगुडे आत्महत्या के इरादे से खुवड़िया पहाड़ पर पहुंचा था. उसे बचाने के लिए पुलिस, फायर ब्रिगेड और परिवार के लोग मौके पर पहुंचे थे. इसी दौरान कुणाल को बचाने की कोशिश में उसके पिता मुरलीधर का भी बैलेंस बिगड़ गया और दोनों करीब 300 फीट नीचे जा गिरे.
इसके कुछ ही देर बाद कुणाल की मां संगीता ने भी पहाड़ से छलांग लगा दी. इस दर्दनाक घटना में तीनों की मौत हो गई. अब इस मामले में पुलिस के बयान के साथ परिवार, पड़ोसियों और फायर ब्रिगेड की टीम के अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं.
पंकज अतुलकर, (DCP जोन-2, छत्रपति संभाजीनगर) ने बताया कि कुणाल चांदगुडे सुबह करीब 8 बजे घर से आकाश इंस्टीट्यूट जाने के लिए निकला था, लेकिन सुबह 9:10 बजे तक जब वह क्लास में नहीं पहुंचा तो संस्थान की तरफ से उसकी मां के मोबाइल पर मैसेज किया गया. इसके बाद कुणाल की तलाश शुरू हुई. सुबह करीब 10 से 10:30 बजे के बीच कुणाल के खुवड़िया पहाड़ पर होने की जानकारी मिली. ग्रामीणों ने पुलिस को 10:45 सूचना दी और करीब 11:30 बजे फायर ब्रिगेड को भी कॉल किया गया.
पहाड़ी पर पहुंचकर लगातार लोकेशन बदल रहा था कुणाल
फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची. कुणाल पहाड़ी के ऊपर मौजूद था और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था. उसे समझाने की कोशिश की गई. नीचे रेस्क्यू टीम ने सुरक्षा के लिए जाल भी लगाया था, ताकि कुणाल के गिरने पर उसे बचाया जा सके, लेकिन ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था और तीनों की जिंदगी बच नहीं सकी.
पुलिस के मुताबिक, कुणाल को समझाने के लिए उसके माता-पिता और अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे थे. इसी दौरान कुणाल के पिता मुरलीधर उसके करीब पहुंचे और उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की. हाथ पकड़ते ही दोनों का संतुलन बिगड़ गया और पिता-पुत्र पहाड़ से नीचे जा गिरे. पथरीली जगह पर गिरने की वजह से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. इसके कुछ ही सेकंड बाद कुणाल की मां संगीता ने भी पहाड़ से छलांग लगा दी. वह भी नीचे गिरी और उनकी भी मौत हो गई.
सैयद सईद, (फायर ब्रिगेड अधिकारी, संभाजीनगर) ने बताया कि, फायर ब्रिगेड के एक कर्मचारी को भी इस दौरान मामूली चोट आई. तीनों शवों को दोपहर करीब 2:30 बजे घाटी अस्पताल लाया गया, जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई.
संपत्ति और पारिवारिक तनाव की भी बात
इस पूरे मामले में परिवार के दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं. संगीता के मायके वालों का कहना है कि पति-पत्नी के बीच विवाद की वजह संपत्ति और पारिवारिक तनाव था. उनका दावा है कि कुणाल अपने माता-पिता को एक साथ लाना चाहता था. संगीता के पिता बबन राव ने यह भी बताया कि कुणाल पढ़ाई में काफी अच्छा था. उसने इसी साल दसवीं CBSC की परीक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. परिवार का कहना है कि कुणाल आगे चलकर MBBS करना चाहता था.
कुणाल की बुआ ने बताई फैमिली टेंशन की कहानी
वहीं, मुरलीधर चांदगुडे की बहन शोभा राजेंद्र मस्के ने इस मामले में अलग ही बातें बताई हैं. शोभा के मुताबिक, करीब 22 साल पहले मुरलीधर और संगीता ने लव मैरिज की थी. मुरलीधर के माता-पिता इस शादी से खुश नहीं थे और शादी में शामिल भी नहीं हुए थे. शोभा का दावा है कि शादी के बाद मुरलीधर और उसके परिवार के बीच रिश्ते ठीक नहीं रहे. उन्होंने पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का भी जिक्र किया है.
हादसे के बाद शोभा घाटी अस्पताल पहुंचीं. इसके बाद मुरलीधर का अंतिम संस्कार जालना जिले के अंबड में किया गया, जबकि संगीता और कुणाल का अंतिम संस्कार छत्रपति संभाजीनगर के मुकुंदवाड़ी में हुआ.
लेकिन इस परिवार को करीब से जानने वाले पड़ोसियों और मुरलीधर के साथ काम करने वालों का कहना है कि परिवार सामान्य जीवन जी रहा था. घर के केयरटेकर आदित्य देशपांडे के मुताबिक, परिवार करीब चार महीने पहले इस घर में किराए पर रहने आया था. उनके मुताबिक, परिवार का व्यवहार अच्छा था और कुणाल भी अपने काम से काम रखने वाला लड़का था.
शांत स्वभाव का व्यक्ति था मुरलीधर
मुरलीधर के साथ काम करने वाले लोगों ने भी उन्हें शांत स्वभाव का बताया है. चौधरी ट्रांसपोर्ट के मैनेजर पवन ओटंबे के मुताबिक, मुरलीधर करीब 10 साल से उनके यहां ड्राइवर के तौर पर काम कर रहे थे और उनके खिलाफ कभी कोई शिकायत नहीं मिली. कुणाल के पड़ोसी माधव बजरंग ढकने समेत आसपास के अन्य लोगों का कहना है कि, कुणाल पढ़ाई में अच्छा था और उसका सपना MBBS करने का था.
परिवार के तीनों सदस्यों की मौत के बाद उनका पालतू कुत्ता शेरू दो दिनों तक उसी घर में अकेला बंद रहा. पड़ोसियों की मदद से उसे किसी तरह खाना-पानी दिया जा रहा था. दरवाजे के बाहर जैसे ही किसी के आने की आहट होती, शेरू दौड़कर दरवाजे तक पहुंच जाता था. शायद उसे अब भी अपने मालिकों के वापस आने का इंतजार था.
दो दिन बाद पेट एनिमल लवर एसोसिएशन की टीम मौके पर पहुंची और शेरू को सुरक्षित घर से बाहर निकाला गया. शेरू को फिलहाल नगर निगम के शेल्टर होम में रखा जाएगा. एसोसिएशन से जुड़े बारेल सांचीस, (पेट एनिमल लवर संगठन) ने अपील की है कि शेरू को लंबे समय तक शेल्टर में रखना सही नहीं होगा. कोई संवेदनशील परिवार आगे आए और उसे गोद लेकर नया घर दे.
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