उत्तर प्रदेश बस्ती जिले के वाल्टरगंज थाने के एसओ सूर्यप्रकाश सिंह (उम्र-57 साल) ने शनिवार को सरकारी आवास में फंदा लगाकर जान दे दी। वह डीएम कार्यालय के पास आवास में रहते थे। सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू कर दी। डीआईजी संजीव त्यागी ने बताया कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। मामले में सभी पहलुओं की जांच कराई जा रही है। वर्दी में रहते हुए लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले थानाध्यक्ष सूर्यप्रकाश सिंह यह कदम क्यों उठाया यह अभी तक साफ नहीं है। वह कुछ घंटे पहले तक ड्यूटी कर रहे थे। शनिवार की शाम जब आवास का दरवाजा खुला तो अंदर का दृश्य देखकर पुलिसकर्मी भी सन्न रह गए। पंखे से गमछे के सहारे लटका शव कई सवाल पीछे छोड़ गया। पुलिस घटना के कारणों और उनके हालिया दिनों की गतिविधियों समेत हर पहलू की पड़ताल में जुटी है। देर रात लखनऊ से बस्ती पहुंचे परिवारीजन भी एसओ सूर्यप्रकाश सिंह की आत्महत्या की वजह के बारे में कुछ बता नहीं पा रहे हैं।
जिन्दादिल दरोगाओं में शुमार सूर्यप्रकाश सिंह का उनका परिवार भी साथ में रहता था। रक्षाबंधन के पहले परिवार लखनऊ स्थित आवास पर चला गया था। रक्षाबंधन पर उन्होंने छुट्टी नहीं ली थी। शहर में भी उनका एक सरकारी आवास था। वे सिद्धार्थनगर जिले से स्थानांतरित होकर बस्ती आए थे। यहां पहली तैनाती पासपोर्ट कार्यालय में मिली। इसके बाद उन्हें एसपी का पीआरओ बनाया गया। उनकी बेहतर कार्यशैली के चलते उन्हें एसपी के पीआरओ पद से वाल्टरगंज थाने का प्रभार मिला था।
शनिवार को भी थाने पर मौजूद रहकर जरूरी काम निपटाए और स्टॉफ की मीटिंग करने के बाद अपने सरकारी वाहन से शहर चले आए। यहां पर हमराहियों को सिविल लाइन पुलिस चौकी पर रुकने के लिए कहकर डीएम कार्यालय के पास स्थित अपने आवास पर चले आए। यहीं पर उन्होंने फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और घर में प्रवेश का सिर्फ यही एक रास्ता है। ऐसे में उन्होंने आत्महत्या किन कारणों से की, यह सुलगता सवाल है। घटना की जानकारी पाकर परिवारीजन देर रात लखनऊ से परिजन बस्ती पहुंचे। हालांकि, परिवार के लोग आत्महत्या के कारण के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
थानाध्यक्ष वाल्टरगंज सूर्य प्रकाश सिंह के सुसाइड की सूचना थाने पर पहुंची तो हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। सूचना मिलते ही कुछ साथी पुलिस कर्मी बस्ती शहर के लिए रवाना हो गए थे। थाने पर मौजूद कर्मियों ने बताया कि सुबह 10 बजे स्टाफ मीटिंग करके सभी को गाइडलाइन दी थी, जिस तरह वह हर रोज देते थे। देर शाम करीब सात बजे इस बात की सूचना थाने पहुंचने के साथ ही सन्नाटा पसर गया।
थानाध्यक्ष सूर्यप्रकाश सिंह के आत्महत्या करने की सूचना परिजनों को देना साथी कर्मियों के लिए आसान नहीं था। घरवालों को बस्ती आने के लिए कहे जाने के बाद से ही उनकी बेटी बार-बार फोन करके पापा की सलामती के बारे में पूछ रही थी। जिसका जवाब देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। सूर्यप्रकाश सिंह की तीन संतानों में दो बेटियां और एक बेटा है। एक बेटी और एक बेटे की शादी हो चुकी है।
आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थानाक्षेत्र के भीलमपुर छपरा निवासी सूर्यप्रकाश सिंह पुलिस विभाग में 15 फरवरी 1988 में आरक्षी पद पर भर्ती हुए थे। सात सितंबर 2008 को हेड कांस्टेबल के पद पर उनकी पदोन्नति हुई। 11 नवंबर 2016 को वरिष्ठता सूची से उपनिरीक्षक पद पर प्रोन्नत हुए थे। बस्ती जनपद में उन्हें पहली बार थाने की कमान मिली थी।
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