उत्तर प्रदेश के बहराइच में कतर्नियाघाट सेंचुरी क्षेत्र में ग्राम पंचायतें रोशनी से जगमग होंगी। इस इलाके से लगे 100 से अधिक गांवों का जल्द ही अंधेरा छटेगा। सेंचुरी से लगे गांवों में सोलर व एलईडी लाइटें लगवाने का फैसला किया गया है। ताकि रात के अंधेरे में जंगल से निकलकर गांवों में हमले को अंजाम दे रहे वन्यजीवों की निगरानी संग ग्रामीणों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हो सकें। सीएसआर फंड से होने वाले प्रकाश व्यवस्था को लेकर निर्धारित कंपनी की ओर से पहले चरण में 1500 लाइटों के लगाने का काम शुरू किया गया है।
नेपाल सीमा से लगा कतर्नियाघाट 551 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। सात रेंजों में विभाजित सेंचुरी में बाघ, तेंदुआ, गैंडा, हाथी सहित कई हिंसक वन्यजीवों का बसेरा है। सेंचुरी क्षेत्र से लगे गांवों में अक्सर बाघ, तेंदुए व हाथी पहुंच रहे हैं। खासकर रात के अंधेरे का फायदा उठाकर वन्यजीव ग्रामीणों व बच्चों पर हमले भी कर रहे हैं। इससे मानव व वन्यजीव संघर्ष का ग्राफ भी बढ़ रहा है। इस पर रोक व सटे गांवों के लोगों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की ओर से गांवों में प्रकाश की मुकम्मल व्यवस्था का खाका खींचा है। इसके लिए सेंचुरी से लगे गांवों का सर्वे कराया गया था। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 124 गांव (मजरे सहित) चिंहित किए गए हैं,जो बाघ व तेंदुए के हमले को लेकर अतिसंवेदनशील पाए गए हैं। इन गावों में लाइटें लगवाने के लिए फिनिश सोसाइटी की ओर से सर्वे का कार्य किया गया था। अब चिंहित गांवों में लाइट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। वन विभाग के इस पहल से जंगलवर्ती गांवों के लोगों को राहत मिलेगी, प्रकाश व्यवस्था होने से गांवों का अंधेरा भी छटेगा।
डीएफओ ने बताया कि सिग्नीफाई इन्वेशन इंडिया लिमिटेड की मदद से जंगल से लगे गांवों में प्रकाश की व्यवस्था हो रही है। कंपनी के सीएसआर फंड से गांव सोलर व एलईडी लाइटों से जगमगाएंगे। पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कराए जा रहे हैं।गांवों के चारों ओर प्रकाश की व्यवस्था की जाएगी। कंपनी की और से कराए गए सर्वे के अनुसार जंगल से लगे 124 गांवों में सोलर संग 1500 एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं।
कतर्नियाघाट की सभी सात रेंजों में संघर्ष-संभावित क्षेत्रों के वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर लाइटें लगाई जा रही हैं। जहां वन्यजीवों की आवाजाही या मानव-वन्यजीव संघर्ष अधिक है, उन हॉटस्पॉट गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है। लाइटों को गांवों के प्रवेश द्वारों, मुख्य रास्तों और जंगल की सीमा से लगे संवेदनशील इलाकों में रणनीतिक रूप से स्थापित किया जा रहा है।
- सुबह-शाम अकेले न निकलें, समूह में जाएं ।
- खुले में शौच जाने से करें परहेज
- रात में टॉर्च का प्रयोग संग आवाज करते हुए चलें।
- मवेशियों को रोशनी वाले बाड़े में बांधें।
-बच्चों को अकेले बाहर न जाने दें।
- घरों के आसपास झाड़ियों की सफाई रखें।
-वन्यजीवों का घेराव करने से बचे
कतर्नियाघाट डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि सेंचुरी से लगे संवेदनशील गांवों में मुकम्मल प्रकाश की व्यवस्था को सीएसआर फंड से 1500 सोलर लाइटें लगवाई जा रही हैं। इससे रात में प्रकाश होने से वन्यजीवों का हमला रुकेगा, निगरानी में भी मदद मिलेगी।
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