तमिलनाडु की राजनीति में इस हफ्ते तेज़ी से हलचल देखी जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने की मांग ने टीवीके के सहयोगी कांग्रेस को असहज कर दिया है। इस सिलसिले में टीवीके 9 सितंबर को अपने सहयोगी दलों के साथ एक बैठक आयोजित करने वाली है।
बैठक का मुख्य एजेंडा 2029 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन के प्रधानमंत्री उम्मीदवार को तय करना है। विजय सरकार के मंत्री आधव अर्जुन, राज मोहन और निर्मल कुमार ने सीपीआई(M), सीपीआई और एमडीएमके को इस मीटिंग में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।
कांग्रेस को बुलाया गया है या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है, और बैठक के विस्तृत एजेंडा का खुलासा भी नहीं किया गया है। परन्तु यह स्पष्ट है कि 2029 में विपक्ष का नेतृत्व कौन करेगा, इस सवाल पर टीवीके और कांग्रेस के बीच मतभेद पहले से ही स्पष्ट हो चुके हैं।
यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब टीवीके के कई विधायक सार्वजनिक रूप से विजय को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने लगे। विधायक कनिमोझी ने कहा कि 2029 में विजय टीवीके के प्रधानमंत्री उम्मीदवार होंगे और देश का प्रधानमंत्री तय करने का अधिकार दिल्ली नहीं, बल्कि तमिलनाडु को है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव लाने के लिए राहुल गांधी अंततः विजय की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे।
रानीपेट की विधायक आई. ताहिरा, ऊर्जा‑संसाधन एवं कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार सहित टीवीके के अन्य नेताओं ने भी विजय की राष्ट्रीय भूमिका को समर्थन दिया।
कांग्रेस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि 2029 में प्रधानमंत्री पद के लिए उसकी पसंद राहुल गांधी ही है। कांग्रेस विधायक दल की नेता थरहाई कथबर्ट ने कहा कि यह अभियान टीवीके के कुछ नव‑निर्वाचित विधायकों के “फैन‑माइंडसेट” का नतीजा है। विजय ने पहले ही राहुल गांधी को गठबंधन का उम्मीदवार मान लिया है, परन्तु कई विधायकों के बयान गठबंधन की सामूहिक रणनीति को प्रतिबिंबित नहीं करते।
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने इन दावों को “ध्यान‑भटकाने की रणनीति” बताया और कहा कि प्रधानमंत्री का चुनाव अंततः मतदाता तय करेंगे।
विजय की सरकार वर्तमान में कांग्रेस, वामपंथी दलों, VCK और IUML के समर्थन पर निर्भर है। टीवीके के सबसे बड़े सहयोगी कांग्रेस के पास राज्य सरकार में पाँच विधायक और दो मंत्री हैं। बहुमत के बिना टीवीके को कांग्रेस के साथ सहयोग जारी रखना पड़ता है, और इस गठबंधन में किसी भी लंबे‑समय के टकराव से सरकार की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
हालाँकि टीवीके औपचारिक रूप से INDIA ब्लॉक में शामिल नहीं है, लेकिन राज्य में कांग्रेस उसकी सरकार का हिस्सा है। इस कारण दोनों दलों को चेन्नई में सहयोगी बने रहने के साथ‑साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के नेतृत्व को लेकर अलग‑अलग रुख अपनाने की गुंजाइश मिलती है।
विजय और राहुल गांधी को लेकर सामने आए विरोधी दावे गठबंधन के भविष्य को लेकर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। यह देखना बाकी है कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राज्य‑स्तर की यह साझेदारी दोनों नेताओं की अलग‑अलग राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बावजूद कायम रह पाएगी या नहीं।
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