उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला क्षेत्र में स्थित शंभूपुर गांव मंगलवार देर शाम गोलियों की आवाज़ और तिहरे हत्याकांड से दहला गया। बुधवार सुबह मुख्य आरोपी अरविंद सिंह को पुलिस एन्काउंटर में मारने के बाद गांव में सन्नाटा और भय का माहौल छा गया।
साक्षात्कार के बाद गांव की गलियों में आम नागरिकों की तुलना में पुलिस और मीडिया कर्मियों की संख्या अधिक थी। हर कदम पर पुलिस की नजरें टिकी थीं, जिससे लोगों को सतर्क रहना पड़ा।
शंभूपुर पहुंचते ही हत्याकांड का असर स्पष्ट दिखा। जब राह पूछी गई तो लोग बिना ज्यादा बात किए अरविंद सिंह के घर की ओर इशारा कर देते थे। उस घर की ओर जाने वाली गली में पुलिस की गाड़ियां और मोटरसाइकिलें खड़ी थीं, और घटना स्थल को पुलिस ने सील कर दिया था।
अरविंद के घर की स्थिति आर्थिक तंगी को दर्शाती है। काले लोहे के गेट के भीतर छोटा सा आंगन, ईंटों के खंभों पर सीमेंट की चादर से बनी रहने की जगह, बिना प्लास्टर या रंग-रोगन वाली दीवारें, और खुले हिस्से में नहाने की व्यवस्था देखी गई।
रिपोर्टों के अनुसार, अरविंद के पास मौजूद रिवॉल्वर उसके बड़े भाई सुनील सिंह की मौत के बाद विरासत में मिला था, और वह इसे अक्सर अपने साथ रखता था।
घटना के बाद, 80 वर्षीया अरविंद की माँ श्यामबाला सिंह गांव वालों के बीच मिलीं। आँसू भरी आँखों से वह मंगलवार शाम की घटनाओं का वर्णन कर रही थीं। परिवार पहले भी कठिनाइयों का सामना कर चुका था; 2018 में अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की हत्या हुई थी, और उनकी पत्नी अपने तीन बच्चों के साथ दिल्ली चली गई थी।
शंभूपुर के आशुतोष सिंह ने बताया कि वह अरविंद का बचपन का दोस्त था। बड़े भाई की हत्या के बाद अरविंद ने धीरे-धीरे दोस्तों और गांव वालों से दूरी बना ली, जिससे वह अकेला रह गया।
मंगलवार की रात में आरोप है कि अरविंद ने अपनी पत्नी और बेटे को गोली मारकर मार डाला, फिर पुलिस मुठभेड़ में उसकी भी मौत हो गई। बुजुर्ग श्यामबाला को पड़ोसी परिवार ने अपने घर में आश्रय दिया है।
अरविंद के घर से लगभग 700 मीटर दूर पुरोहित महेंद्र पाठक का घर है। वहां पहुंचते ही उनके बड़े भाई राजेंद्र पाठक को बाहर बैठे देखा गया, जबकि अंदर से महिलाओं की रोने की आवाज़ आ रही थी। राजेंद्र के लिए यह समझना मुश्किल है कि वही परिवार, जिसमें कई पीढ़ियों तक पूजा-पाठ चलता आया है, उसका छोटा भाई क्यों मारा गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि पुरोहित महेंद्र पाठक अरविंद के घर में धार्मिक अनुष्ठान कराने आए थे। परिजनों के अनुसार, अरविंद की ग्रह-नक्षत्र संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए महामृत्युंजय पाठ करवाया जा रहा था, तभी हत्याकांड हुआ। लोग अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि धार्मिक अनुष्ठान के बीच ऐसा हादसा कैसे हो गया।
अगले दिन शंभूपुर में सामान्य चहल-पहल गायब थी। अधिकांश लोग अपने घरों में सीमित रह गए या घटनाओं पर चर्चा कर रहे थे। गांव में बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती ने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया।
बुधवार दोपहर पुलिस अरविंद, उसकी पत्नी, बेटे और दो पुरोहितों की मौत से जुड़ी पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की कार्यवाही में व्यस्त थी। दोपहर के करीब एक बजे पुलिस श्यामबाला को पोस्टमार्टम हाउस ले गई, ताकि वह अपने बेटे, बहू और पोते को अंतिम बार देख सके। कई मौतों को देख चुके शंभूपुर अब शांत दिख रहा है, पर यह सामान्य शांति नहीं है; गलियों में पुलिस का पहरा और लोगों के चेहरों पर फैला खौफ मंगलवार रात की भयावहता को बयान कर रहा है।
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