गोरखपुर के बड़हलगंज में सरयू नदी का जलस्तर लगातार खतरे के निशान के ऊपर बना हुआ है। गुरुवार को भी बड़हलगंज और आसपास के इलाकों में बाढ़ का तांडव देखा गया। बड़हलगंज में लेटाघाट का प्लेटफार्म डूब गया है। यहां 100 मीटर लंबे पाथवे पर लोग टहलते हैं। दक्षिणांचल में करीब 20 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। तुर्तीपार में सरयू नदी खतरे के निशान से 72 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। पिछले 24 घंटे में नदी का जलस्तर 6 सेंटीमीटर बढ़ा है।
सरयू नदी के उफान से मुक्तिपथ के सभी 40 प्लेटफार्म डूब गए हैं। केन्द्रीय जल आयोग के आंकड़े के मुताबिक, सरयू नदी तुर्तीपार में बुधवार को सुबह आठ बजे 64.670 के स्तर पर थी। गुरुवार को जलस्तर 64.730 पर पहुंच गया है। वहीं राप्ती और रोहिन नदी का जलस्तर कम हो गया है। बर्डघाट में राप्ती नदी का जलस्तर पिछले 16 घंटे में 50 सेंटीमीटर कम हुआ है।
सरयू की बाढ़ से कचरांचल में तबाही का मंजर है। बाढ़ का पानी तेजी से फैलने के कारण दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई संपर्क मार्गों पर पानी पहुंच जाने से आवागमन प्रभावित है। कछारांचल में स्थित जैतपुर, ज्ञानकोल, गोनघट, बगहा देवार, बलथर, खैराटी आदि दर्जन भर गांव के ग्रामीण सरयू नदी की बाढ़ के बीच रहने को मजबूर है। जैतपुर में 70 घर हैं।
कानपुर में गंगा नदी पूरी तरह से उफान पर आ गई है। जलस्तर बढ़ने से कटरी के पांच गांवों में पानी घुस गया है। कटरी के गांवों की सड़कों में पानी भरने के चलते चार नाव और दो ट्रैक्टर लगाकर आवागमन कराया गया। जलस्तर बढ़ने से भगवानदीपुरवा के बाद भोपालपुरवा, बनियापुरवा, दुर्गापुर गिल्लीपुरवा डल्लपुरवा गांव में गलियों में पानी भर चुका है। पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। भगवानदीनपुरवा के लोगों के आने जाने के लिए चार नाव लगाई गई हैं। जिन गांव में पानी भर चुका है, वहां अभी तक बाढ़ का पानी घरों के अंदर नहीं पहुंचा है।
गंगा का जलस्तर 24 घंटे में 15 सेंटीमीटर के ऊपर बढ़ गया। गंगा बैराज में चेतावनी बिन्दु 114 से बढ़कर गंगा 114.630 सेंटीमीटर तक पहुंच चुकी है। अब खतरे के निशान 115 सेंटीमीटर से कुछ ही दूर है। इसी तरह से शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिन्दु 113 सेंटीमीटर को पार करके 113.020 पर पहुंच गई है। हरिद्वार से 81514 और नरौरा में 1.05 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
गंगा का जलस्तर जैसे- जैसे बढ़ता जा रहा है। कटरी के गांव बाढ़ की जद में आते जा रहे हैं। गुरुवार की शाम को रामेल नगर, प्रतापपुर हरि, चिरान, ईश्वरीगंज, हृदयपुर, पिपरिया, शिवदिनपुरवा समेत कई गांव में किनारे तक पानी पहुंच चुका है। ग्रामीण सुरक्षित ठिकाने के लिए बैराज हाईवे किनारे डेरा डालने के लिए साफ सफाई कर अपनी जगह बनाने लगे हैं। स्वास्थ विभाग से सभी आशा बहुओं को सतर्क किया गया है अगर कोई मरीज व प्रसूता को दिक्कत हो तत्काल सूचित करें। एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने में मदद करें।
कानपुर में बाढ़ का पानी भैरोघाट तक पहुंच गया है। क्रियाकर्म स्थल पानी से चारों तरफ से घिर गया है। इसी तरह से गंगा कटरी स्थिति बनियापुरवा में स्थित 15 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में भी पानी घुस गया है। अब वहां पर आवागमन ठप हो गया है। ये प्लांट अभी निर्माणाधीन है।
प्रयागराज में गंगा-यमुना के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच अब बेलन में बढ़े प्रवाह चिंता बढ़ा दी है। बेलन का पानी टोंस में पहुंचने के बाद छतनाग के आगे गंगा का प्रवाह प्रभावित होने की संभावना है। इससे नैनी में घट रहा यमुना का जलस्तर फिर बढ़ सकता है, वहीं गंगा में बढ़ोतरी की रफ्तार भी तेज होने की आशंका है। टोंस की सहायक नदी बेलन में चरणबद्ध तरीके से करीब 90 हजार क्यूसेक पानी बैराज से छोड़ा गया है। इसके मद्देनजर बेलन और टोंस के प्रवाह क्षेत्र में अलर्ट जारी किया गया है।
उधर, फाफामऊ में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यहां गंगा रात आठ बजे 82 मीटर से महज पांच सेमी दूर है। जबकि नैनी में कुछ समय स्थिर रहने के बाद यमुना का जलस्तर घटने लगा था। कानपुर बैराज से गुरुवार को गंगा में तीन लाख 90 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बुधवार को भी चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। ऐसे में आने वाले घंटों में प्रयागराज में गंगा-यमुना के जलस्तर पर दबाव बढ़ने की संभावना है। प्रशासन, सिंचाई विभाग निगरानी में जुटे हैं। सिंचाई विभाग (बाढ़ प्रखंड) के सहायक अभियंता निखिल प्रसाद ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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