मेरठ महानगर में बिना मानचित्र अनगिनत अवैध कॉलोनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट नाराज है। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश जारी किया गया है कि अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन होगा।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर 2026 को सुनवाई हुई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने शहर के जोन-ए में चिह्नित 16.726 हजार अवैध भवन को जब्त करने और सोफीपुर-लावड़ मार्ग स्थित उल्देपुर गांव में अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश का ऑर्डर बृहस्पतिवार को जारी हो गया। इसमें अवैध निर्माण को लेकर कोर्ट का रुख सख्त है और मेरठ में अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया है। अब कोर्ट में विचाराधीन उल्देपुर में बसी अवैध सभी कॉलोनियां ध्वस्त होंगी। इसके बाद न्यायिक आयोग का दायरा बढ़ सकता है। यह आयोग शहर और उसके आसपास इलाके में अवैध कॉलोनियों की जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंप सकता है। इसके अलावा शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्किट सहित विकास प्राधिकरण के चारों जोन में आवासीय और व्यावसायिक भवनों का सर्वे कर अवैध निर्माण पर कार्रवाई की बात सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दी।
छह संपत्तियां प्लॉट के रूप में बेची गई थीं और वहां बिना स्वीकृत नक्शे के आवासीय तथा व्यावसायिक निर्माण किए गए थे। इनमें छह भवन ध्वस्त कर दिए। कोर्ट ने बाकी संपत्तियों को भी जल्द ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट के आदेश में 201 ऐसी संपत्तियों का भी उल्लेख है, जहां अनिवार्य सेटबैक क्षेत्र में अवैध निर्माण किया गया। इनमें से 63 संपत्तियों के सेटबैक से अवैध निर्माण पूरी तरह हटा दिया गया है, जबकि 138 संपत्तियों में कार्रवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने शेष 138 संपत्तियों के सेटबैक क्षेत्र से भी अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्रवाई केवल जोन-ए तक सीमित नहीं रहेगी। जोन-बी, सी और डी में कितने अवैध निर्माण हैं। इसकी रिपोर्ट भी अगली सुनवाई में पेश करनी होगी। चारों जोन में तेजी से कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि किसी जर्जर अवैध निर्माण के कारण भविष्य में कोई हादसा होता है और जनहानि होती है, तो संबंधित सरकारी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सकती है। ईडब्ल्यूएस-एलआईजी मकानों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक सुप्रीम कोर्ट के आदेश में मेरठ में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी की 486 संपत्तियों में आवासीय उपयोग के बजाय व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने का भी उल्लेख है। अधिकारियों ने इन सभी संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराने की कार्रवाई की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसका सरोकार मेरठ शहर में प्रत्येक अवैध भवन, ढांचे और दुकान के ध्वस्तीकरण से है। हालांकि, ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के पात्र लोगों के पुनर्वास पर सरकार विचार कर सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी।
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