Meerut News: भाकियू-बीआर अंबेडकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय भाटी और पार्टी जिलाध्यक्ष मोहित जाटव की पिटाई पूर्व एसएसपी अविनाश पांडेय को भारी पड़ गई। पूरे मामले में प्रदेश सरकार के ही तीन मंत्रियों ने शासन में शिकायत कर दी। इसके बाद मेरठ के एसएसपी रहे अविनाश पांडेय पर कार्रवाई हुई। यही कारण माना जा रहा है कि अविनाश पांडेय को कोई नई तैनाती नहीं दी गई। एडीजी मेरठ भानु भास्कर ने दोनों की पिटाई, थर्ड डिग्री देने और अवैध हिरासत में रखने के आरोपों पर सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह को जांच दी है। दूसरी ओर, दोनों घायलों के साथ सपा विधायक अतुल प्रधान ने प्रेसवार्ता कर आईपीएस अविनाश पांडेय और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन पर मुकदमे की मांग की है।
मेरठ में 15 मई को दलित छात्रा ललिता गौतम को अगवा कर हत्या कर दी गई थी। लाश 17 मई को रोहटा के जंगलों में बरामद हुई थी। अंकुश सिंह और उसके भाई अंकित समेत तीन आरोपियों को पुलिस ने जेल भेजा था। इसी मामले में 8 जुलाई को कार्रवाई की मांग करते हुए पीड़ित परिवार और समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। इसी दौरान तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय ने भीड़ पर थप्पड़ बरसाए थे और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता रवि गौतम को बंदी वाहन में बंद करके पीटा था। इस थप्पड़ कांड से एसएसपी अविनाश पांडेय सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल हुए थे।
इस प्रकरण में भाकियू बीआर अंबेडकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय भाटी, जिलाध्यक्ष मोहित जाटव, रवि गौतम समेत आठ लोगों की गिरफ्तारी करते हुए दर्जनों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। थप्पड़ कांड में हो रही किरकिरी के बाद डैमेज कंट्रोल के लिए मेरठ के प्रभारी मंत्री असीम अरुण को जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलवाया था। प्रभारी मंत्री ने भी पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया था।
इसी प्रकरण में सफाई देने के लिए 19 जुलाई को दिग्विजय और मोहित दोनों एसएसपी अविनाश पांडेय के ऑफिस पहुंचे थे। बताने गए थे कि वे धरने में शामिल नहीं थे और उनकी लोकेशन दूसरी जगह थी। दिग्विजय भाटी और मोहित का आरोप है कि आईपीएस अविनाश पांडेय ने उन्हें अपने कार्यालय में बंधक बना लिया और मारपीट की। जूते से आंख पर ठोकर मारी। इसके बाद इंस्पेक्टर सिविल लाइन अखिलेश मिश्रा दोनों को एसओजी ऑफिस लेकर गए और वहां थर्ड डिग्री दी। दिग्विजय भाटी की चोट वाली वीडियो सामने आने के बाद वेस्ट यूपी के तीन मंत्रियों, गुर्जर नेताओं और सपा विधायक अतुल प्रधान ने शासन में शिकायत की। माना जा रहा है कि गुरुवार को पूरा प्रकरण सामने आने के बाद आईपीएस अविनाश पांडेय को मेरठ से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया और उनकी जगह पर आईपीएस बीबीजीटीएस मूर्ति को मेरठ एसएसपी बनाकर भेजा गया है।
मामले के तूल पकड़ने पर एडीजी भानु भास्कर ने जांच बैठाते हुए सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह को जिम्मेदारी सौंपी है। डीआईजी अभिषेक सिंह शुक्रवार दोपहर को ही मेरठ पहुंच गए और उन्होंने पुलिस कार्यालय, पुलिस लाइन और एसओजी ऑफिस पहुंच कर जांच शुरू कर दी। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि सूत्रों की मानें तो अभी तक किसी भी जगह से कोई वीडियो फुटेज नहीं मिली है। एडीजी ने तीन दिन में इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट मांगी है।
सपा विधायक ने अपने शास्त्रीनगर स्थित आवास पर शुक्रवार सुबह दोनों पीड़ित दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ प्रेसवार्ता की। आईपीएस अविनाश पांडेय पर थर्ड डिग्री देने, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, एनकाउंटर की धमकी और मारपीट का आरोप लगाया। सपा विधायक ने एक अफसर की इस तरह की मानसिकता को खतरनाक बताया। विधायक अतुल प्रधान ने शासन से इस मामले में एसएसपी समेत तमाम दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने और कार्रवाई की मांग की। साथ ही कहा कि सरकार को ऐसे अधिकारी की मानसिक स्थिति की जांच भी करानी चाहिए।
दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को थर्ड डिग्री देने के मामले में पूर्व आईपीएस और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत भेजी है। शिकायत का संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में अब नोटिस जारी किया जाएगा। इस संबंध में एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर का कहना है कि डीआईजी मेरठ के द्वारा मेरे मेरे संज्ञान में लाया गया कि 19 अगस्त को एसएसपी मेरठ के कार्यालय में किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बात खराब हो गई और इसके बाद बल प्रयोग हुआ। कई मंत्री और जनप्रतिनिधियों ने इस प्रकरण में शिकायत की है। डीआईजी सहारनपुर को जांच दी गई है, उन्होंने मेरठ पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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