यूपी के मेरठ में दलित किसान नेता दिग्विजय भाटी की एसएसपी दफ्तर में पीटकर आंख फोड़ दी गई। उनके साथी मोहित जाटव की भी पिटाई की गई है। आरोप है कि एसएसपी अविनाश पांडेय ने खुद पुलिस वालों के साथ मिलकर पिटाई की। दोनों को थाने लाकर भी पीटा गया। आंख से खून बहने पर थाने में ही डॉक्टर को भी बुलाया गया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष सांसद चंद्रशेखर आजाद के मामला उठाने के बाद एडीजी ने मामले की जांच का आदेश दे दिया है। एडीजी भानु भास्कर ने सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह को पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। एडीजी ने माना कि एसएसपी कार्यालय के अंदर वादविवाद के बाद मारपीट हुई है।
वहीं, मामला मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी पहुंच गया है। पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर में मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। एसएसपी अविनाश पांडेय इससे पहले थप्पड़बाजी में चर्चा में आए थे। तब भी दलित नेताओं को सरेराह और वैन में घुसकर पीटने का आरोप लगा था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था।
भारतीय किसान यूनियन बीआर आंबेडकर के अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव ने मेरठ एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइंस थाने के प्रभारी अखिलेश गौड़ पर पिटाई करने का आरोप लगाते हुए वीडियो जारी किया था। शुक्रवार को सपा विधायक अतुल प्रधान के साथ दिग्विजय भाटी ने मीडिया के सामने आरोपों को दोहराया। यह संयोग ही है कि मामला गरमाने से पहले ही एसएसपी अविनाश पांडेय को गुरुवार की रात यहां से हटाकर लखनऊ में तैनाती दे दी गई है। गुरुवार को जिन नौ आईपीएस के तबादले किए गए उनमें केवल अविनाश को ही कोई जिला नहीं मिला है। उन्हें लखनऊ मुख्यालय बुला लिया गया है। माना जा रहा है कि यह मामला गुरुवार को किसान नेता का वीडियो सामने आने के बाद लखनऊ पहुंच गया था।
दिग्विजय भाटी ने बताया कि वह मोहित जाटव के साथ एसएसपी अविनाश पांडेय से उनके कार्यालय में बुधवार को गैंगस्टर के एक मुकदमे को लेकर मिलने गए थे। उस समय एसएसपी नहीं थे। दोनों नेता बाहर इंतजार कर रहे थे। इसी बीच एसएसपी पहुंच गए। एसएसपी के पहुंचने के पांच मिनट बाद ही एक सिपाही उन्हें बुलाने आया। सिपाही के साथ कार्यालय के अंदर पहुंचे तो एसएसपी ने पहले गाली देते हुए कहा कि नेता बनते हो।
एसएसपी के कहने पर दफ्तर के अंदर पुलिस वालों ने दोनों की पिटाई शुरू कर दी। वह हाथ जोड़ते रहे लेकिन डंडों और बेल्ट से पीटा गया। एसएसपी ने खुद उनकी पिटाई की। बाद में सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अखिलेश गौड एसएसपी कार्यालय पहुंचे और दोनों को लेकर पुलिस लाइन स्थित एसओजी कार्यालय आ गए। यहां इंस्पेक्टर ने भी दोनों की पिटाई की।
रात को दोनों को सिविल लाइंस थाने ले गए। इस दौरान पिटाई के कारण आंखों से खून आने लगा तो आंख और दिमाग के डाक्टरों को भी थाने में बुलाया। देर रात विधायक अतुल प्रधान पहुंचे तो दोनों को अपने साथ लेकर आए। सपा ने एसएसपी पर ऐक्शन नहीं होने पर आंदोलन का ऐलान कर दिया। FIR की मांग कर दी। मामला एडीजी तक पहुंचा तो जांच का आदेश हो गया।
वहीं, इस मामले को लेकर आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। ठाकुर ने कहा कि आयोग ने शिकायत दर्ज भी कर ली है। ठाकुर ने कहा कि दोनों को एसएसपी कार्यालय बुलाकर पीटा गया और मेरठ पुलिस दोनों को हिस्ट्रीशीटर बताते हुए स्कूटी से फिसलने से घायल होने की बात कह रही है।
अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में कहा था कि ADG मेरठ जोन द्वारा मामले की जांच DIG, सहारनपुर परिक्षेत्र को सौंपी गई है, लेकिन गंभीर मानवाधिकार आरोपों में विभागीय जांच की निष्पक्षता पर सीधे सवाल उठते हैं। अतः पीड़ितों और आमजन का पूर्ण विश्वास अर्जित करने के लिए मानवाधिकार आयोग का स्वतंत्र हस्तक्षेप आवश्यक है।
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