हर्मुज जलडमरूमध्य में रातोंरात 7 तेल टैंकरों पर हमला हुआ, जहाजों में आग लग गई और वे बीच समंदर में टूट कर धधक रहे हैं। ईरान ने गुरुवार को दावा किया कि या तो इन जहाजों को टारगेट किया गया या वे समुद्री माइंस की चपेट में आए।
इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना ने धमकी दी है कि यदि अमेरिका इस जलमार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की मदद जारी रखता है, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया जा सकता है।
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना के हवाले से जहाजों पर हमलों की जानकारी दी, पर रिपोर्ट में किसी के हताहत होने का उल्लेख नहीं किया गया। ब्रिटेन की समुद्री निगरानी संस्था यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी इन हमलों की पुष्टि नहीं की है।
निगरानी रखने वालों ने देखा है कि कुछ शिपिंग कंपनियां ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने से कतर रही हैं। ईरान अभी भी इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है, जो अमेरिका के साथ युद्ध को लेकर होने वाली किसी भी बातचीत में उसके लिए एक अहम दबाव का माध्यम है।
ईरान के शीर्ष राजनयिक अब्बास अरागची ने बुधवार को कहा कि तेहरान सतर्क है, लेकिन वह बातचीत के लिए तैयार है और साथ ही अपनी रक्षा करने के लिए भी पूरी तरह मुस्तैद है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों से शुरू हुए इस युद्ध से उसने कई अहम सैन्य सबक सीखे हैं। हाल के दिनों में तेहरान ने संकेत दिया है कि वह अपने हमलों के दायरे को बढ़ा सकता है, जिसमें समुद्र के नीचे बिछी केबल और डेटा सेंटर जैसे बुनियादी ढांचे भी शामिल हो सकते हैं।
वहीं अमेरिका इस क्षेत्र में और अधिक सैन्य संसाधन भेज रहा है। इसमें एक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर और हजारों सैनिक शामिल हैं, जो मध्य पूर्व में दशकों में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों के सबसे बड़े बेड़े का हिस्सा बनेंगे।
इस बीच वाशिंगटन और तेहरान को फिर से औपचारिक बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान अभी भी अपने उस नए प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहा है, जिसके तहत अगर अमेरिका कुछ शर्तें मान लेता है, तो युद्ध खत्म हो सकता है और एक हफ्ते के भीतर यह जलमार्ग पूरी तरह से खुल सकता है।
इन शर्तों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी को खत्म करना भी शामिल है। ये शर्तें काफी हद तक उस समझौते जैसी ही हैं, जिस पर जून में वाशिंगटन और तेहरान ने हस्ताक्षर किए थे, लेकिन कुछ ही दिनों में वह समझौता टूट गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सात दिन वाले इस नए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, लेकिन दोनों पक्षों ने माना है कि उनके बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है। इस प्रस्ताव के खारिज होने के बाद से ही ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों में तेजी आई है।
अगर फिर से पूर्ण युद्ध छिड़ता है, तो पूरे क्षेत्र में आम नागरिकों की जान खतरे में पड़ जाएगी। साथ ही, इस क्षेत्र से तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक जैसे उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति भी प्रभावित होगी, जिससे इनकी कीमतों में एक बार फिर भारी उछाल आ सकता है।
हर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण भारत, अमेरिका और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है, और ईरान इसे अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
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