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जिस आंगन में यशी की किलकारियां गूंजीं, जहां वह खेली और बड़ी हुई, जहां से माता-पिता ने उसके हाथ पीले करने के सपने देखे थे। वहीं से शुक्रवार को उसे अंतिम विदाई दी गई। हादसे के बाद मां रेखा का रो-रोकर बुरा हाल था। वह आंगन की मिट्टी दोनों हाथों में भरकर बार-बार चीख रही थीं।
आंगन में बेटी की शादी का मंडप सजना था लेकिन उन्हें क्या पता था कि सपने अधूरे ही रह जाएंगे। जिस आंगन में बेटी की शादी का मंडप सजना था वहां मातम पसर जाएगा। इतना कहते हुए विनोद फिर फफक पड़े, तो ग्रामीणों ने उनको चबूतरे पर बैठाया। वह घंटों अपने मकान को एकटक निहारते रहे। यशी से बड़ी तीन बहनों रुचि, रुपा और अनूपा की शादी हो चुकी है।
अम्मा, रस्सी पकड़ लेती तो मैं उसे मौत के मुंह से खींच लाती मायके आई अनूपा को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों के सामने ही यशी गड्ढे में मिट्टी के नीचे दब गई। मां से लिपटकर वह बार-बार कह रही थी, अम्मा हमने बहुत कोशिश की लेकिन छुटकी रस्सी नहीं पकड़ पाई। पकड़ लेती, तो मैं उसे मौत के मुंह से खींच लाती। क्या यही देखने के लिए मुझे भगवान ने यहां बुलाया था।
राखी बंधवाने की थी तैयारी, अब बहन की अर्थी को कंधा देगा इकलौता भाई चार बहनों में इकलौते भाई भास्कर ने बताया कि दो दिन पहले ही अनूपा और यशी ने रक्षाबंधन की तैयारियां शुरू कर दी थीं। दोनों फोन कर पूछ रही थीं कि कौन सी मिठाई खाओगे और कैसी राखी बंधवाओगे। बहनों की खुशी देखकर उसने भी बड़ी मुश्किल से छुट्टी ली थी।
डोली उठाने का सपना देख रहा था उसे क्या पता था कि इस बार का रक्षाबंधन जिंदगी भर का गम दे जाएगा। यशी ही अब घर में शादी के लिए बची थी। उसकी डोली उठाने का सपना देख रहा था, लेकिन अब उसकी अर्थी को कंधा देना पड़ेगा। आंगन की मिट्टी दोनों हाथों में भरकर मां चीखती रही।
ऐसे चला रेस्क्यू अभियान
देर से शुरू हुआ रेस्क्यू, कई अड़चनों से अटका काम ग्रामीणों की मानें, तो यशी को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू करीब पौने दो घंटे देर से शुरू हुआ। दमकल टीम की ओर से शुरूआती पहल की गई। इसके बाद जब जेसीबी आई तो घर का गैस कनेक्शन ने समस्या खड़ी की। यदि जेसीबी चलती तो पाइपलाइन फट सकती थी। इस पर आईजीएल कंपनी को फोन किया गया। इसके एक घंटे बाद भी जब कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा तब सीएफओ दीपक शर्मा ने खुद कंपनी के अधिकारियों को फोन लगाया। तब जाकर कहीं गैस की सप्लाई बंद हो सकी।
गड्ढे से करीब 10 मीटर दूरी पर रैंप बनाया गया इसके बाद जैसे-तैसे रेस्क्यू आगे बढ़ा, तो आंगन के आसपास की जगह संकरी होने की समस्या खड़ी हो गई। इस पर गड्ढे से करीब 10 मीटर दूरी पर रैंप बनाया गया। करीब तीन घंटे तक जेसीबी मिट्टी खोदकर बाहर फेंकती रही। जेसीबी गहराई तक नहीं जा सकती थी। इस कारण एनएचएआई से पोकलैंड की मांग की गई। सूचना के करीब एक घंटे बाद वह आ सकी। इसके बाद लगभग 25 फीट का गड्ढा खोदकर यशी को बाहर निकाला जा सका।
रेस्क्यू में काटी बिजली, शाम तक बहाल न होने पर भड़के ग्रामीण रेस्क्यू के चलते आसपास के मकान खाली कराने के साथ ही क्षेत्र की बिजली भी कटवा दी गई थी। रेस्क्यू समाप्त होने के बाद भी जब देर शाम तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। ग्रामीणों की भीड़ बस में सवार होकर चौकी पहुंची और बिजली आपूर्ति शुरू कराने की बात कही। इस पर पुलिस ने तत्काल ही एसडीओ और लाइनमैन को फोन कर आपूर्ति चालू करने को कहा।
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