यमन के उत्तरी क्षेत्रों में लंबे समय से हूती समूह (जिसे अंसार अल्लाह भी कहा जाता है) का क़ाबिज़ा है। सादा प्रांत और उसके आस‑पास के इलाके सऊदी अरब के जजान और नजरान प्रांतों से सीधे सटे हुए हैं, जिससे कई बिंदुओं पर हूती विद्रोहियों की दूरी सीमा से शून्य के बराबर है।
सऊदी‑हूती सीमा लगभग 1,450 किमी लंबी है, लेकिन वास्तविक खतरा उन क्षेत्रों से उत्पन्न होता है जहाँ हूती सीधे सऊदी सीमा पर खड़े हैं। इन बिंदुओं से छोटे‑रेंज रॉकेट, तोपखाने की फायरिंग और लंबी‑रेंज बैलिस्टिक मिसाइल व ड्रोन आसानी से लॉन्च किए जा सकते हैं।
सितंबर 2026 के मध्य में हूती ने नजरान के शरूराह सैन्य अड्डे पर हमला किया, जजान के अल‑तव्वाल में प्रोजेक्टाइल गिरा जिससे दो लोग घायल हुए और कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं। अभा, खामिस मुशैत आदि शहरों में भी समान हमले हुए, जहाँ दर्जनों नागरिक घायल हुए। ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि सीमा के निकट मौजूद हूती सऊदी के खिलाफ निरंतर दबाव बना रहे हैं, जबकि सऊदी वायु रक्षा प्रणाली हर बार पूरी तरह से रोक नहीं पाती।
भौगोलिक रूप से सीमा पर मौजूद होने के अलावा, सितंबर 2026 की शुरुआत में हूती ने लाल सागर तट पर बड़े कदम उठाए। उन्होंने मोखा बंदरगाह, धुबाब शहर और पेरिम द्वीप (मयून) पर नियंत्रण स्थापित किया। बाब‑अल‑मंदेब खाड़ी के बीच स्थित यह द्वीप विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, और इसका कब्ज़ा यमन के लगभग पूरे लाल सागर तट को हूती के नियंत्रण में ले आया।
सऊदी अरब पिछले कुछ वर्षों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अस्थिरता के कारण लाल सागर मार्ग से तेल निर्यात बढ़ा रहा था, और यानबू जैसे बंदरगाहों से वैकल्पिक निर्यात किया जा रहा था। अब बाब‑अल‑मंदेब पर हूती का नियंत्रण सऊदी जहाज़ों और तेल शिपमेंट के लिए सीधा खतरा बन गया है।
हूती की बढ़ती क्षमताओं के पीछे कई कारक हैं। यमन के भीतर ताइज़, मारिब और अल‑जौफ़ जैसे क्षेत्रों में सऊदी‑समर्थित यमनी सरकार की सेना और हूती के बीच लड़ाई जारी है। सऊदी ने यमनी सरकार को हवाई समर्थन दिया है, जबकि हूती बड़े पैमाने पर जवाबी हमले की चेतावनी दे रहे हैं। इस संघर्ष के कारण हजारों लोग विस्थापित हो रहे हैं और मानवीय स्थिति बिगड़ रही है।
आर्थिक दृष्टिकोण से यह दोहरी चुनौती बन गई है। एक ओर सीमा सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं, तो दूसरी ओर लाल सागर मार्ग के व्यवधान से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल और सऊदी राजस्व पर असर पड़ सकता है। दक्षिणी प्रांतों में बार‑बार होने वाले हमले स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और निवेश को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
भविष्य में तनाव जारी रहने पर सऊदी को अधिक कड़ी सैन्य कार्रवाई या अंतरराष्ट्रीय सहयोग, विशेषकर अमेरिकी समर्थन की तलाश करनी पड़ सकती है। हूती द्वारा बाब‑अल‑मंदेब पर नियंत्रण न केवल सऊदी बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि जिबूती में अमेरिकी सैन्य अड्डा इन द्वीपों से केवल 30‑32 किमी दूर स्थित है।
संक्षेप में, हूती विद्रोही पहले से ही सऊदी की भूमि सीमा पर मौजूद हैं, और लाल सागर तट के नए कब्जे ने सऊदी के लिए सुरक्षा, ऊर्जा मार्ग और क्षेत्रीय स्थिरता के तीनों पहलुओं में बहुआयामी खतरा उत्पन्न कर दिया है। इस स्थिति को निरंतर निगरानी और कूटनीति‑सैन्य दोनों विकल्पों के संतुलन से ही संभाला जा सकता है।
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