पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि नगर निगम में भ्रष्टाचार से जुड़ी एक और शिकायत मिली है। इसमें आरोप है कि आगरा के रसूखदार ठेकेदार रवि लवानिया की फर्म को मानकों के विपरीत टेंडर दिया गया। शिकायत के अनुसार ठेकेदारों का रैकेट चलाने वाला गोविंद शर्मा ही रवि लवानिया को कानपुर लाया और सिंडिकेट से मुलाकात कराई। आरोप है कि पूर्व में कूड़ा निस्तारण का ठेका 400 रुपये प्रति टन की दर से मिलता था, लेकिन रवि की फर्म को 800 रुपये में दिलाया गया। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि टेंडर दोगुने दामों में कैसे और किन परिस्थितियों में दिया गया, किन–किन अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की सहभागिता थी, सभी बिंदुओं की जांच स्टाफ अफसर को दी गई है। रिपोर्ट आने पर केस दर्ज होगा।
पुलिस आयुक्त के अनुसार पूर्व में कराई गई जांच में सामने आया है कि आगरा का ठेकेदार रवि लवानिया नगर निगम के पॉवरफुल सिंडिकेट का हिस्सा बनने के बाद पूल के बाहर के ठेकेदारों को टेंडर डालने में धमकाता था। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का टेंडर हासिल करने के बाद काम में अनियमितताएं मिलने पर नगर निगम में उसकी फर्म के खिलाफ विरोध भी हुआ, लेकिन प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस आयुक्त ने बताया कि जनवरी 2026 में उन्होंने एलआईयू से जांच कराई थी। उस रिपोर्ट में भी रवि लवानिया और गोविंद शर्मा की फर्म को टेंडर दिलाने में प्रभावशाली लोगों की पैरवी की बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का टेंडर क्रमश: 10 और 25 साल के लिए रवि की इनवायरमेंटल टेक्नो फर्म और गोविंद शर्मा की मेसर्स कैला देवी को देने की पैरवी की गई।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि पूर्व में अलीगढ़, आगरा के अलावा मध्य प्रदेश के शिवपुरी नगर पालिका में इनवायरमेंटल टेक्नो फर्म को स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों रुपयों के कार्य का टेंडर मिला था। काम सही तरीके से न करने और घपलेबाजी के आरोपों में टेंडर निरस्त हुए थे।
कानपुर नगर निगम कर्मचारी संघ ने जांच के लिए अपनाए जा रहे तरीके पर आपत्ति जताई है। महामंत्री रमाकांत मिश्र ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नगर निगम में जांच के नाम पर सुबह से रात तक पूछताछ का दौर चल रहा है। फाइलों पर कोई काम नहीं हो रहा। 11 स्विचमैन समेत कई कर्मचारी निलंबित हो चुके हैं। लाइटिंग का काम भी नहीं हो रहा। इंजीनियरों में रोष है। नगर निगम की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कुछ लोग फर्जी शिकायतें कर रहे हैं। ये शिकायतें सोशल मीडिया पर चल रहीं हैं। जांच का तरीका बदला जाए। ड्यूटी के समय इंजीनियरों और कर्मचारियों को डिस्टर्ब न किया जाए। इस संबंध में नगर आयुक्त को स्थिति से अवगत कराएंगे। अगर जांच के नाम पर उत्पीड़न बंद न हुआ तो धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!