भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नई प्रदेश‑प्रभारी व सह‑प्रभारी टीमों की सूची जारी की। अगस्त में हुए केंद्रीय संगठनात्मक फेरबदल के बाद यह सूची जारी करके पार्टी ने अपनी चुनावी मशीनरी को जमीन पर तेज़ी से काम करने के लिये तैयार किया।
2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी को देखते हुए कई अनुभवी नेताओं को प्रमुख राज्य जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इस कदम से पार्टी ने अनुभवी चुनाव प्रबंधकों और नए चेहरों के बीच रणनीतिक संतुलन स्थापित किया है।
ये नियुक्तियां चुनावी कैलेंडर के अहम मोड़ पर की गई हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, मणिपुर आदि कई राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव निर्धारित हैं। अगस्त में उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए पहले ही प्राथमिक नियुक्तियां की गई थीं; अब पूरी राष्ट्रीय स्तर की संगठनात्मक ढांचा तैयार हो गया है।
नए प्रभारियों को राज्य इकाइयों के साथ काम करने के लिये पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे वे संगठन की ताकत‑कमजोरी का सही आकलन कर सकेंगे, प्रदेश नेतृत्व के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगे और आगामी चुनावी लड़ाइयों के लिये पूरे पार्टी तंत्र को सक्रिय कर सकेंगे। यह केवल चेहरा बदलना नहीं, बल्कि रणनीतिक तैनाती है।
उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को प्रभारी बनाए रखा गया है। उनके साथ चार सह‑प्रभारी—जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा—तैनात हैं, जिससे पार्टी इस बड़े राज्य में 2027 के चुनाव को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में देख रही है।
राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़ दोनों की जिम्मेदारी दी गई है। हरियाणा में भोला सिंह और छत्तीसगढ़ में सिद्धार्थ शंभू उनके सह‑प्रभारी होंगे, जिससे केंद्र‑राज्य संबंधों को मजबूत करने की पार्टी की रणनीति स्पष्ट होती है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड दो विपरीत राजनीतिक माहौल वाले राज्यों का प्रभार सौंपा गया है। दोनों राज्यों में सह‑प्रभारी उनकी मदद करेंगे, जिससे गृह‑राज्य से बाहर के नेताओं के अनुभव का उपयोग करने की योजना सामने आती है।
राष्ट्रीय महासचिव हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक दोनों राज्यों की कमान मिली है। बिहार में वह विनोद तावड़े की जगह लेंगे और साथ में राष्ट्रीय सचिव संगीता यादव तथा रोहन गुप्ता सह‑प्रभारी के रूप में काम करेंगे। यह बदलाव चुनावी चरण के बाद संगठन विस्तार और अगले राजनीतिक चरण की तैयारी को दर्शाता है।
राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान राष्ट्रीय महासचिव सतीश पूनिया को पंजाब के साथ जम्मू‑कश्मीर का भी प्रभार दिया गया है। जम्मू‑कश्मीर में रीना कश्यप सह‑प्रभारी के रूप में उनका सहयोग करेंगी, जिससे दोनों संवेदनशील क्षेत्रों में उनकी भूमिका मजबूत होगी।
राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना दोनों राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बंगाल में लाल सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह और पिंकी कुशवाहा उनके साथ कार्य करेंगे, जबकि तेलंगाना में उनका दायरा दक्षिण भारत तक विस्तृत हो जाता है।
महाराष्ट्र की जटिल राजनीति को संभालने के लिये पार्टी उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा को प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ अमित मालवीय, सदानंद शेट‑तनावड़े और कमलजीत सहरावत सह‑प्रभारी के रूप में जुड़ेंगे, जिससे टीम‑वर्क को प्राथमिकता दी गई है।
बिहार में नेतृत्व परिवर्तन भी खास रहा। विनोद तावड़े के उत्तर प्रदेश जाने के बाद हरीश द्विवेदी को बिहार की कमान मिली, साथ में पूर्व विधायक और राष्ट्रीय सचिव संगीता यादव तथा पूर्व कांग्रेस के नेता रोहन गुप्ता सह‑प्रभारी बनेंगे। यह मिश्रण अनुभवी और नई ऊर्जा दोनों को जोड़ता है।
दिल्ली के लिये विनय सहस्रबुद्धे को प्रभारी नियुक्त किया गया, उनके साथ जामयांग सेरिंग नामग्याल और दर्शना जर्दोश सह‑प्रभारी होंगे, जिससे राजधानी में निरंतर और सीधा संगठनात्मक संवाद स्थापित रहेगा।
पार्टी की यह सूची अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम, मेघालय से लेकर लद्दाख, लक्षद्वीप और अंडमान‑निकोबार तक पूरे देश को कवर करती है। असम में मंगल पांडेय के साथ फांगनोन कोन्याक और मनोज तिग्गा सह‑प्रभारी बने हैं; हिमाचल में रीना कश्यप जम्मू‑कश्मीर और बिहार में निवेदिता सिंह झारखंड की जिम्मेदारी संभालेंगी।
महिला नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारी मिली है। स्मृति ईरानी के अलावा वानथी श्रीनिवासन, फांगनोन कोन्याक, संगीता यादव, गोमती साय, दर्शना जर्दोश, भारती पवार, दर्शना सिंह, रीना कश्यप, निवेदिता सिंह, डी. पुरंदेश्वरी, कविता पाटीदार, अलका गुर्जर, मेधा कुलकर्णी, बांसुरी स्वराज और पिंकी कुशवाहा को प्रमुख पदों पर रखा गया है। यह नितिन नवीन की अगस्त की केंद्रीय टीम में महिलाओं की भागीदारी को प्रतिबिंबित करता है।
पार्टी ने 30‑40 की उम्र के युवा नेताओं को 50‑60 की उम्र के दिग्गजों के साथ जोड़ा है। जामयांग सेरिंग नामग्याल, सिद्धार्थ शंभू, गोमती साय, मृगांका देब बर्मन और बांसुरी स्वराज जैसे युवा चेहरों को विनय सहस्रबुद्धे, महेंद्र पांडेय और राम माधव जैसे वरिष्ठ रणनीतिकारों के साथ मैदान में उतारा गया है। अगस्त में आठ महासचिव, 16 सचिव और 13 उपाध्यक्षों की घोषणा के बाद यह राज्य‑स्तरीय सूची केंद्रीय नेतृत्व और राज्यों के बीच चुनावी पुल का काम करेगी।
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