भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम के प्रमुख नेताओं को विभिन्न राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी है, जिससे पार्टी के भीतर उनका कद और बढ़ा है। इस कदम से चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक विस्तार दोनों को मजबूती मिलेगी।
स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर रखते हुए छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है। हरीश द्विवेदी को बिहार के साथ‑साथ कर्नाटक की कमान सौंपी गई है, जबकि राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड का प्रभार दिया गया है।
सतीश पूनिया को पंजाब के साथ जम्मू‑कश्मीर की जिम्मेदारी दी गई है। सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना की देखरेख पहले की तरह जारी रखी गई, और अनिल एंटनी को नागालैंड का प्रदेश प्रभारी तथा गोवा का सह‑प्रभारी नियुक्त किया गया है।
इन नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की जड़ें मजबूत करना और क्षेत्रीय समीकरणों को बेहतर ढंग से संभालना है। पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में अगले साल ही चुनाव होंगे, इसलिए इन राज्यों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया है।
पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, जो पहले राष्ट्रीय सचिव के तौर पर बिहार के प्रभारी रहे, अब दो बड़े राज्यों की जिम्मेदारी लेकर भाजपा के भरोसेमंद संगठनात्मक चेहरों में से एक बन गए हैं। उनका चुनावी प्रबंधन, बूथ‑स्तर की पकड़ और अनुशासन पार्टी के उच्चतम स्तर पर सराहा गया है।
स्मृति ईरानी को लोकसभा चुनाव में हार के बाद भी राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका दी गई। अब वह हरियाणा और छत्तीसगढ़ में पार्टी की सियासी जड़ों को सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी संभालेंगी, जिससे उनका प्रभाव पुनः उभरेगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ विचारक राम माधव को दो राज्यों की कमान सौंपी गई है। उनका काम दक्षिण भारत में तमिलनाडु और उत्तराखंड में भाजपा की स्थिति को मजबूत करना है, जहाँ दोनों क्षेत्रों में पार्टी को अलग‑अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सुनील बंसल, जिन्हें अक्सर ‘इलेक्शन इंजीनियर’ कहा जाता है, को पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना की जिम्मेदारी दी गई है। बंगाल और ओडिशा में उनके पिछले सफलताओं को देखते हुए, अब तेलंगाना में भी भाजपा को सत्ता दिलाने का काम उनके कंधों पर है।
राजस्थान में 2023 की हार के बाद सतीश पूनिया को फिर से भरोसा दिया गया। उन्होंने हरियाणा में भाजपा की हैट्रिक हासिल की और अब पंजाब‑जम्मू‑कश्मीर की देखरेख कर रहे हैं, साथ ही उन्हें राज्यसभा सदस्य भी बनाया गया है।
पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के बेटे अनिल एंटनी को भी पार्टी में तेजी से उन्नति मिली। उन्होंने पहले राष्ट्रीय सचिव का पद संभाला, अब नागालैंड के प्रदेश प्रभारी और गोवा के सह‑प्रभारी के रूप में कार्य करेंगे, जिससे पूर्वोत्तर और गोवा में भाजपा की सियासी जड़ें मजबूत होंगी।
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