दिल्ली के मशहूर रेस क्लब पर गुरुवार को बुलडोजर चल गया. केंद्र सरकार ने दिल्ली रेस क्लब की 53 एकड़ जमीन पर कब्जा ले लिया है. इसके बाद क्लब में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई. यह क्लब करीब 100 साल पुराना है. यहां लंबे समय से घुड़दौड़ का आयोजन होता रहा है.
गुरुवार सुबह क्लब परिसर में बुलडोजर पहुंच गए. इसके बाद कई पुराने ढांचों को गिराया गया. इनमें घोड़ों के अस्तबल भी शामिल हैं. इसके अलावा बुकमेकर रिंग और विनिंग पोस्ट जैसी जगहों को भी तोड़ा गया. क्लब का फोटोफिनिश से जुड़ा ढांचा भी कार्रवाई की चपेट में आया.
केंद्र सरकार की ओर से क्लब की जमीन पर कब्जा लेने की प्रक्रिया पहले से चल रही थी. क्लब ने इस कार्रवाई को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. क्लब ने अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी. हालांकि, पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को क्लब की याचिका खारिज कर दी.
अदालत ने यह फैसला 11 अगस्त को जारी किए गए बेदखली आदेश के बाद दिया. यह आदेश संपदा अधिकारी ने सार्वजनिक परिसर से अनधिकृत कब्जा हटाने से जुड़े कानून के तहत जारी किया था. अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद केंद्र ने परिसर पर कब्जा लेने की कार्रवाई आगे बढ़ाई.
VIDEO | Delhi: Bulldozers demolish age-old structures as Centre takes possession of Delhi Race Club Demolition work at the Delhi Race Club commenced on Thursday morning, after the Centre took possession of the club’s 53-acre premises. pic.twitter.com/YifFaFRGXc
53 एकड़ जमीन पर अब केंद्र सरकार का कब्जा
दिल्ली के लुटियंस इलाके में लोक कल्याण मार्ग के पास रेस क्लब की यह जमीन काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. केंद्र सरकार ने अब इस पूरी जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है. परिसर में लगाए गए नोटिस में भी इसकी जानकारी दी गई है.
नोटिस में बताया गया है कि रेस कोर्स इलाके के पास मौजूद जमीन को अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया है. इसके बाद यह संपत्ति भूमि एवं विकास कार्यालय को सौंप दी गई है. भूमि एवं विकास कार्यालय केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आता है.
रेस क्लब में होने वाली घुड़दौड़ दिल्ली की पुरानी पहचान का हिस्सा रही है. यहां कई सालों से घुड़दौड़ से जुड़ी गतिविधियां होती थीं. क्लब के परिसर में घोड़ों के लिए अस्तबल और दौड़ से जुड़े कई पुराने ढांचे मौजूद थे. बुलडोजर चलने के बाद क्लब के इन ऐतिहासिक हिस्सों का अस्तित्व खत्म हो गया. इससे रेस क्लब से जुड़े लोगों में निराशा है. करीब एक सदी पुराने इस संस्थान के लिए गुरुवार का दिन बड़ा बदलाव लेकर आया.
केंद्र के जमीन पर कब्जा लेने और पुराने ढांचों को गिराए जाने के बाद यहां होने वाली घुड़दौड़ की गतिविधियां भी बंद हो गई हैं. रेस क्लब की जमीन अब केंद्र सरकार के नियंत्रण में है. परिसर में आगे क्या निर्माण या विकास कार्य होगा, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है.
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