दिल्ली पुलिस ने रात लगभग 8 बजे आकाशवाणी भवन में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य सांसदों को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई भारत में चल रहे INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई।
इस मार्च का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना था, क्योंकि SIR (Selection Information Review) प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगा था। कई कांग्रेस, TMC और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस मांग को लेकर सुबह 11 बजे से धरना दिया था।
पुलिस ने पहले दीपेंद्र हुड्डा, पवन खेड़ा और चरणजीत सिंह चन्नी को बस में बिठाकर ले जाया। इसके बाद TMC सांसद महुआ मोइत्रा, डेरेक ओ'ब्रायन, तथा अंत में प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी को भी बस में बैठाया गया।
हिरासत के दौरान राहुल गांधी को बस की खिड़की से बाहर झांकते हुए देखा गया, जहाँ कई पुलिसकर्मियों ने गाड़ी को घेर रखा था। कुछ देर बाद उन्हें किंग्सवे कैंप ले जाया गया, जहाँ से उन्हें रिहा कर उनकी कार में बैठाकर विदा किया गया।
मार्च के दौरान राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर मार्च करने की कोशिश की, जहाँ उनके साथ अखिलेश यादव, अभिषेक बनर्जी, जया बच्चन, महुआ मोइत्रा जैसे दिग्गज नेता भी थे। पार्लियामेंट स्ट्रीट पर पूरी तरह से आवाजाही बंद हो गई।
राहुल ने एक तख्ती पकड़ी जिसमें लिखा था “ज्ञानेश इट्स डन ब्रो” और फिर पुलिस के सक्रिय होने पर वे बैरिकेड पर तिरंगा लहराते हुए खड़े रहे। बाद में उन्होंने बस में अपनी बहन से बात की और 12:20 बजे फिर से आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट की ओर बढ़े।
गेट पर कर्मचारियों ने उन्हें अंदर जाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा दल के साथ वे अंदर चले गए। प्रियंका गांधी ने भी बस से उतर कर गेट की ओर कदम बढ़ाया और अपने भाई के साथ बैरिकेड के पास बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गईं।
इस बीच कई सांसदों को बसों में बिठाया गया था, जिनमें जॉन ब्रिटास, महुआ मोइत्रा, डेरेक ओ'ब्रायन और अन्य शामिल थे। कुछ सांसदों को रिहा कर फिर से प्रदर्शन स्थल पर लौटाया गया।
बरगद के पेड़ के नीचे एक अस्थायी शिविर स्थापित किया गया, जहाँ मैट, गद्दे और भोजन – आलू के चिप्स, भुजिया, चॉकलेट पैकेट, पानी और सॉफ्ट ड्रिंक – उपलब्ध कराए गए। कांग्रेस कार्यकर्ता और स्टाफ़ ने शाम तक वहीं डटे रहे।
शाम को राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा, “मैं यहाँ लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़ा हूँ। जो भी किया गया है वह देशद्रोह है, चाहे वह पीएम मोदी हों, शाह हों, आरएसएस प्रमुख हों या ज्ञानेश कुमार।” उन्होंने यह भी कहा कि जब तक चुनाव आयोग “INDIA” गठबंधन के सभी सांसदों के साथ बैठक नहीं करता, वे नहीं हटेंगे।
चुनाव आयोग ने बाद में बताया कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल से बैठक का अनुरोध नहीं मिला था, और बैठक केवल दोनों पक्षों की सहमति से तय समय पर होगी।
इस प्रदर्शन का कारण SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप था, जो 25 सितंबर को इण्डियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद सामने आया। विपक्ष का आरोप है कि CEC सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया पक्षपाती हो सकती है।
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