राम मंदिर ट्रस्ट ने अब तक न बनाया गया पद – CEO – स्थापित किया और इस भूमिका के लिए इंटीरियर इंटेलिजेंस ऑफिसर (इंटीरियर) जितेंद्र मिश्र को चुना। मिश्र वही अधिकारी हैं, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली थी और उसे सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।
उनके चयन के पीछे तीन प्रमुख कारण सामने आए हैं।
1. ऑपरेशन सिंदूर से बनी मजबूत पहचान
2019 में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। उस समय वेस्टर्न एयर कमांड की जिम्मेदारी मिश्र के कंधों पर थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदमपुर एएफएस स्टेशन्ट पर आगमन के समय उनका स्वागत करने वाले मिश्र की तस्वीरें और उनके नेतृत्व की चर्चा व्यापक रही। इस ऑपरेशन में उनका योगदान और प्राप्त मेडल ने उनकी सार्वजनिक छवि को काफी मजबूत किया, जिससे रिटायरमेंट के बाद उन्हें ट्रस्ट की अहम जिम्मेदारी देना स्वाभाविक लगा।
2. लगभग चार दशक का सैन्य अनुभव
मिश्र ने भारतीय वायुसेना में करीब 40 साल सेवा की है। इस दौरान उन्होंने विभिन्न स्तरों पर कमान संभाली, बड़े ऑपरेशन चलाए और कई टीमों को संगठित किया। राम मंदिर आज केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आवागमन, परिसर के रख‑रखाव, नई परियोजनाओं और अयोध्या के विकास से जुड़ी कई जिम्मेदारियों का केंद्र बन चुका है। ट्रस्ट को ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी, जो बड़े पैमाने पर प्रबंधन, अनुशासन और तेज निर्णय‑लेने की कला में निपुण हो – यही सैन्य पृष्ठभूमि प्रदान करती है।
3. उत्तर प्रदेश से जुड़ाव
जितेंद्र मिश्र का मूल गाँव देवरिया, उत्तर प्रदेश में स्थित है। अयोध्या में स्थित राम मंदिर ट्रस्ट के काम का अधिकांश भाग राज्य के सामाजिक‑राजनीतिक माहौल से जुड़ा है। उनके इस प्रदेशीय संबंध को चयन प्रक्रिया में एक अतिरिक्त पॉइंट माना गया, जिससे ट्रस्ट को स्थानीय समझ और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों का संतुलन मिल सके।
शुरुआती दौर में CEO पद के लिए योगेश्वर राम मिश्र (पूर्व IAS), राजेश पांडेय (पूर्व IPS), डॉ. परेश सक्सेना (IPS) और दिनेश सिंह (IAS) जैसे नामों पर चर्चा चल रही थी। लेकिन 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बाद एक पैनल तैयार किया गया, जिसमें अंततः जितेंद्र मिश्र को ही चुना गया। उनका चयन अचानक नहीं, बल्कि प्रक्रिया के अंतिम चरण में उनके प्रोफ़ाइल की उपयुक्तता के कारण हुआ।
CEO पद का निर्माण मंदिर के बढ़ते कार्य‑भार को संभालने के लिए किया गया है। ट्रस्ट एक SOP तैयार करेगा, जिसमें CEO के अधिकार, जिम्मेदारियाँ और संभावित डिप्टी‑CEO या संयुक्त CEO की नियुक्ति का प्रावधान होगा।
यह नियुक्ति हाल ही में हुए प्रशासनिक बदलाव के बाद आई है। चढ़ावे के पैसे के विवाद के बाद ट्रस्ट में बड़े फेरबदल हुए, जिसमें कई शीर्ष अधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं और नई टीम का गठन हुआ। अब ट्रस्ट अनुशासन और पेशेवर प्रबंधन को प्राथमिकता दे रहा है, और इस दिशा में एक अनुभवी सैन्य अधिकारी को CEO बनाना इसका प्रतीक है।
अब असली परीक्षा यह होगी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखाए गए नेतृत्व, चार दशक का सैन्य अनुभव और उत्तर प्रदेश से जुड़ाव राम मंदिर की लगातार बढ़ती व्यवस्था को कितनी कुशलता से चलाने में मदद करता है।
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