अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट की अंदरूनी व्यवस्था में काफी बदलाव आए हैं। इस क्रम में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति भी कर दी गई। नए CEO बने एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सोमवार को सवाल उठने लगे, जिस पर ट्रस्ट की तरफ से स्पष्टीकरण जारी किया गया।
इस पूरे मामले की चर्चा तब तेज हुई जब सीईओ की दौड़ में शामिल रहे पूर्व IPS और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजेश पांडेय ने एक चैनल के पोडकास्ट में दावा किया कि सभी प्रतिभागियों में उनका नाम सबसे आगे था। इस पोडकास्ट के बाद सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे कि जीतेंद्र मिश्र ने इंटरव्यू ही नहीं दिया था।
इस पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरी ने सीईओ की नियुक्ति के लिए बनी समिति के गठन से लेकर जीतेंद्र मिश्र के नाम के ऐलान तक की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। गोविंद देव ने राजेश पांडेय का नाम नहीं लिया, परंतु उनके दावों को सीधा खारिज कर दिया।
गोविंद देव ने बताया कि पूरी प्रक्रिया बेहद पारदर्शी तरीके से की गई। 6 जुलाई 2026 की बैठक में CEO की नियुक्ति का फैसला लिया गया और चयन के लिए समिति का गठन किया गया। इसके बाद योग्यता के आधार पर आवेदन मांगे गए, जिनमें कुल 5,585 आवेदन मिले। दिल्ली, पुणे और संबलपुर में AI स्क्रीनिंग और मैनुअल मूल्यांकन के कई स्तरों पर इन आवेदनों का परीक्षण किया गया।
इसके बाद ऑनलाइन इंटरव्यू आयोजित किए गए, जिनमें से 16 प्रत्याशियों को फिजिकल इंटरव्यू के लिए चुना गया। इन सभी को 11 और 12 अगस्त 2026 को अयोध्या में बुलाया गया और चयन समिति ने प्रत्येक अभ्यर्थी से बातचीत की।
गोविंद देव ने स्पष्ट किया कि एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र ने 11 अगस्त 2026 को पहली पाली में इंटरव्यू प्रक्रिया में भाग लिया। समिति ने 1 सितंबर को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें ट्रस्ट को प्रस्तुत कीं। टॉप थ्री में एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र, संजय प्रतापसिंह विश्वास राव और श्रुति भारद्वाज के नाम थे। इन तीनों में सबसे ऊपर रहे जीतेंद्र मिश्र को CEO के पद के लिए चुना गया।
गोविंद देव ने उस दावे को गलत बताया जिसमें कहा जा रहा था कि जीतेंद्र मिश्र 11-12 अगस्त को इंटरव्यू में शामिल नहीं हुए थे। उन्होंने कहा कि टॉप थ्री में शामिल तीनों अभ्यर्थियों के हर दौर में भाग लेने, मूल्यांकन और योग्यता के आधार पर चयन के सभी दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध हैं। प्रत्येक अभ्यर्थी के इंटरव्यू में शामिल होने के साथ ही पहचान का दर्ज भी रखा गया है।
इस बीच पूर्व IPS राजेश पांडेय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सफाई दी है। उन्होंने लिखा कि राम मंदिर CEO के चयन को लेकर मीडिया में भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। पांडेय ने कहा कि उनका दावा कभी यह नहीं था कि वे टॉप थ्री में हैं। उन्होंने पोडकास्ट में ही स्पष्ट किया था कि उन्हें किसी आधिकारिक स्रोत से इसकी जानकारी नहीं मिली थी, बल्कि यह खबर सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से मिली थी।
पांडेय ने यह भी कहा कि यह अफवाह पूरी तरह फेक और भ्रामक है कि उन्होंने दावा किया है जीतेंद्र मिश्र इंटरव्यू देने नहीं आए। उनका बयान केवल इतना था कि 11 अगस्त को उनके इंटरव्यू स्लॉट के दौरान उन्हें वहां नहीं देखा।
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