Tuesday, 27 October 2026 | New Delhi, 28°C
For You Uttar Pradesh Technology World Gorakhpur Shahjahanpur Meerut Jharkhand Prayagraj Bijnor Auraiya Gopalganj Agra
Breaking
MARKETS
NIFTY 50 ₹24,520.80 ▲ +118.40 (+0.48%)
SENSEX ₹80,430.15 ▲ +432.10 (+0.54%)
BANK NIFTY ₹51,280.60 ▲ +315.80 (+0.62%)
NIFTY IT ₹41,890.30 ▲ +462.50 (+1.12%)
NIFTY AUTO ₹25,480.00 ▲ +240.20 (+0.95%)
NIFTY PHARMA ₹21,650.40 ▲ +185.30 (+0.86%)
NIFTY METAL ₹9,420.70 ▲ +112.40 (+1.21%)
RELIANCE ₹2,980.50 ▲ +25.10 (+0.85%)
TCS ₹4,250.00 ▲ +50.40 (+1.20%)
HDFC BANK ₹1,645.20 ▲ +7.40 (+0.45%)
ICICI BANK ₹1,215.30 ▲ +14.60 (+1.22%)
INFOSYS ₹1,820.10 ▲ +25.15 (+1.40%)
BHARTI AIRTEL ₹1,480.00 ▲ +18.20 (+1.24%)
ITC ₹495.60 ▲ +3.40 (+0.69%)
L&T ₹3,620.00 ▲ +42.00 (+1.17%)
SBI ₹824.50 ▲ +11.20 (+1.38%)
TATA MOTORS ₹1,090.80 ▲ +18.70 (+1.75%)
HCL TECH ₹1,680.40 ▲ +22.10 (+1.33%)
SUN PHARMA ₹1,745.00 ▲ +15.50 (+0.90%)
BAJAJ FINANCE ₹6,850.00 ▲ +75.00 (+1.11%)
MARUTI SUZUKI ₹12,450.00 ▲ +160.00 (+1.30%)
ASIAN PAINTS ₹2,950.00 ▼ -15.00 (-0.51%)
TATA STEEL ₹156.40 ▲ +2.30 (+1.49%)
NTPC ₹412.10 ▲ +7.35 (+1.82%)
POWERGRID ₹338.25 ▲ +3.15 (+0.94%)
AXIS BANK ₹1,180.50 ▲ +9.80 (+0.84%)
KOTAK MAHINDRA ₹1,795.00 ▲ +12.50 (+0.70%)
TITAN ₹3,460.00 ▲ +38.00 (+1.11%)
ULTRATECH ₹11,280.00 ▲ +145.00 (+1.30%)
M&M ₹2,840.00 ▲ +45.00 (+1.61%)
ADANI ENT ₹3,120.00 ▲ +35.00 (+1.13%)
ADANI PORTS ₹1,490.00 ▲ +21.00 (+1.43%)
BAJAJ FINSERV ₹1,620.00 ▲ +14.00 (+0.87%)
COAL INDIA ₹524.80 ▲ +12.10 (+2.36%)
ONGC ₹318.45 ▲ +5.20 (+1.66%)
WIPRO ₹515.20 ▲ +6.80 (+1.34%)
NESTLE INDIA ₹2,480.00 ▼ -8.50 (-0.34%)
TECH MAHINDRA ₹1,510.00 ▲ +20.00 (+1.34%)
JSW STEEL ₹945.00 ▲ +11.50 (+1.23%)
TATA CONSUMER ₹1,190.00 ▲ +14.00 (+1.19%)
HINDALCO ₹685.00 ▲ +9.50 (+1.41%)
GRASIM ₹2,650.00 ▲ +28.00 (+1.07%)
INDUSIND BANK ₹1,420.00 ▲ +16.00 (+1.14%)
BAJAJ AUTO ₹9,850.00 ▲ +120.00 (+1.23%)
DR REDDY ₹6,750.00 ▲ +55.00 (+0.82%)
CIPLA ₹1,540.00 ▲ +12.00 (+0.79%)
BPCL ₹345.50 ▲ +4.20 (+1.23%)
SBI LIFE ₹1,690.00 ▲ +15.00 (+0.90%)
HDFC LIFE ₹680.00 ▲ +5.50 (+0.82%)
APOLLO HOSP ₹6,480.00 ▲ +72.00 (+1.12%)
HERO MOTOCORP ₹5,320.00 ▲ +65.00 (+1.24%)
EICHER MOTORS ₹4,850.00 ▲ +58.00 (+1.21%)
DIVIS LAB ₹4,680.00 ▲ +42.00 (+0.91%)
BRITANNIA ₹5,720.00 ▼ -12.00 (-0.21%)
TRENT ₹5,640.00 ▲ +95.00 (+1.71%)
BEL ₹308.90 ▲ +6.40 (+2.12%)
BHARAT FORGE ₹1,580.00 ▲ +24.00 (+1.54%)
NASDAQ ₹17,840.15 ▲ +85.40 (+0.48%)
DOW JONES ₹39,120.40 ▼ -110.20 (-0.28%)
S&P 500 ₹5,560.20 ▲ +19.30 (+0.35%)
GOLD (10g) ₹72,450 ▲ +250 (+0.35%)
SILVER (1kg) ₹84,200 ▲ +670 (+0.80%)
BRENT CRUDE $78.20/bbl ▼ -0.35 (-0.45%)
NIFTY 50 ₹24,520.80 ▲ +118.40 (+0.48%)
SENSEX ₹80,430.15 ▲ +432.10 (+0.54%)
BANK NIFTY ₹51,280.60 ▲ +315.80 (+0.62%)
NIFTY IT ₹41,890.30 ▲ +462.50 (+1.12%)
NIFTY AUTO ₹25,480.00 ▲ +240.20 (+0.95%)
NIFTY PHARMA ₹21,650.40 ▲ +185.30 (+0.86%)
NIFTY METAL ₹9,420.70 ▲ +112.40 (+1.21%)
RELIANCE ₹2,980.50 ▲ +25.10 (+0.85%)
TCS ₹4,250.00 ▲ +50.40 (+1.20%)
HDFC BANK ₹1,645.20 ▲ +7.40 (+0.45%)
ICICI BANK ₹1,215.30 ▲ +14.60 (+1.22%)
INFOSYS ₹1,820.10 ▲ +25.15 (+1.40%)
BHARTI AIRTEL ₹1,480.00 ▲ +18.20 (+1.24%)
ITC ₹495.60 ▲ +3.40 (+0.69%)
L&T ₹3,620.00 ▲ +42.00 (+1.17%)
SBI ₹824.50 ▲ +11.20 (+1.38%)
TATA MOTORS ₹1,090.80 ▲ +18.70 (+1.75%)
HCL TECH ₹1,680.40 ▲ +22.10 (+1.33%)
SUN PHARMA ₹1,745.00 ▲ +15.50 (+0.90%)
BAJAJ FINANCE ₹6,850.00 ▲ +75.00 (+1.11%)
MARUTI SUZUKI ₹12,450.00 ▲ +160.00 (+1.30%)
ASIAN PAINTS ₹2,950.00 ▼ -15.00 (-0.51%)
TATA STEEL ₹156.40 ▲ +2.30 (+1.49%)
NTPC ₹412.10 ▲ +7.35 (+1.82%)
POWERGRID ₹338.25 ▲ +3.15 (+0.94%)
AXIS BANK ₹1,180.50 ▲ +9.80 (+0.84%)
KOTAK MAHINDRA ₹1,795.00 ▲ +12.50 (+0.70%)
TITAN ₹3,460.00 ▲ +38.00 (+1.11%)
ULTRATECH ₹11,280.00 ▲ +145.00 (+1.30%)
M&M ₹2,840.00 ▲ +45.00 (+1.61%)
ADANI ENT ₹3,120.00 ▲ +35.00 (+1.13%)
ADANI PORTS ₹1,490.00 ▲ +21.00 (+1.43%)
BAJAJ FINSERV ₹1,620.00 ▲ +14.00 (+0.87%)
COAL INDIA ₹524.80 ▲ +12.10 (+2.36%)
ONGC ₹318.45 ▲ +5.20 (+1.66%)
WIPRO ₹515.20 ▲ +6.80 (+1.34%)
NESTLE INDIA ₹2,480.00 ▼ -8.50 (-0.34%)
TECH MAHINDRA ₹1,510.00 ▲ +20.00 (+1.34%)
JSW STEEL ₹945.00 ▲ +11.50 (+1.23%)
TATA CONSUMER ₹1,190.00 ▲ +14.00 (+1.19%)
HINDALCO ₹685.00 ▲ +9.50 (+1.41%)
GRASIM ₹2,650.00 ▲ +28.00 (+1.07%)
INDUSIND BANK ₹1,420.00 ▲ +16.00 (+1.14%)
BAJAJ AUTO ₹9,850.00 ▲ +120.00 (+1.23%)
DR REDDY ₹6,750.00 ▲ +55.00 (+0.82%)
CIPLA ₹1,540.00 ▲ +12.00 (+0.79%)
BPCL ₹345.50 ▲ +4.20 (+1.23%)
SBI LIFE ₹1,690.00 ▲ +15.00 (+0.90%)
HDFC LIFE ₹680.00 ▲ +5.50 (+0.82%)
APOLLO HOSP ₹6,480.00 ▲ +72.00 (+1.12%)
HERO MOTOCORP ₹5,320.00 ▲ +65.00 (+1.24%)
EICHER MOTORS ₹4,850.00 ▲ +58.00 (+1.21%)
DIVIS LAB ₹4,680.00 ▲ +42.00 (+0.91%)
BRITANNIA ₹5,720.00 ▼ -12.00 (-0.21%)
TRENT ₹5,640.00 ▲ +95.00 (+1.71%)
BEL ₹308.90 ▲ +6.40 (+2.12%)
BHARAT FORGE ₹1,580.00 ▲ +24.00 (+1.54%)
NASDAQ ₹17,840.15 ▲ +85.40 (+0.48%)
DOW JONES ₹39,120.40 ▼ -110.20 (-0.28%)
S&P 500 ₹5,560.20 ▲ +19.30 (+0.35%)
GOLD (10g) ₹72,450 ▲ +250 (+0.35%)
SILVER (1kg) ₹84,200 ▲ +670 (+0.80%)
BRENT CRUDE $78.20/bbl ▼ -0.35 (-0.45%)
Gaya

E100 से दौड़ेंगी गाड़ियां, क्या महंगा पड़ेगा इथेनॉल का खेल?

Ajay Tiwari
27 October 2026 • 0 • 17
E100 से दौड़ेंगी गाड़ियां, क्या महंगा पड़ेगा इथेनॉल का खेल?

E85, E100 Flex Fuel: पेट्रोल की जगह इथेनॉल. सुनने में अच्छा है. तेल का आयात घटेगा. देश का पैसा बचेगा. किसानों को नया बाजार मिलेगा. लेकिन ठहरिए. इस कहानी में एक पेंच है. इथेनॉल बनाने के लिए गन्ना चाहिए, मक्का चाहिए और पानी भी. अब सवाल है कि गाड़ी का टैंक भरने की इस दौड़ में खेत और थाली का क्या होगा. क्या पेट्रोल से आजादी की कीमत पानी और अनाज से चुकानी पड़ेगी. सरकार E85 और E100 जैसे फ्यूल के जरिए तेल के आयात पर भारत की निर्भरता घटाना चाहती है. मगर इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी है. 

इथेनॉल खेतों में उगने वाली फसलों (जैसे गन्ना, मक्का, चावल या गेहूं) से बनता है. फसलों को जमीन चाहिए, जमीन को पानी चाहिए और फिर उन्हीं फसलों से इथेनॉल बनाने के लिए हजारों लीटर पानी की बर्बादी. ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं कि गाड़ी पेट्रोल से चलेगी या इथेनॉल से. असली सवाल है कि टैंक भरने की इस नई दौड़ में कहीं खेत प्यासे और थाली खाली तो नहीं रह जाएगी.

23 अक्टूबर 2026 को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की. इसके तहत E85 और E100 फ्यूल को भी नियमों में शामिल किया गया है. यह फैसला इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों, खासकर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों, के लिए एक अहम कदम है. वाहन कंपनियों के लिए ऐसे वाहन तैयार करने और उन्हें बाजार में उतारने का कानूनी रास्ता साफ हो गया है. यानी अब आने वाले समय में देश में ऐसी गाड़ियों को लॉन्च करने में आसानी होगी जो पेट्रोल पर नहीं बल्कि प्योर इथेनॉल या ज्याद ब्लेंडिंग वाले फ्यूल पर चलेंगे.

यह भी पढें: तगड़ा बूट स्पेस... धांसू माइलेज! जानें कब आएगी Bayon CNG

सरकार की दलील साफ है. पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटानी है. देश में बनने वाले फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ाना है. किसानों को नई मांग से जोड़ना है. लेकिन सवाल यह है कि क्या फ्यूल बदलने से पूरी तस्वीर बदल जाएगी. क्या इथेनॉल वाकई सस्ता विकल्प बनेगा. क्या इससे प्रदूषण कम होगा. और सबसे जरूरी सवाल. जिस देश में बड़ी आबादी की रोजी-रोटी खेती पर निर्भर है, वहां गाड़ी चलाने के लिए फसलों का इस्तेमाल कितना सही है.

यही इस फैसले की असली कहानी है. यह सिर्फ पेट्रोल और इथेनॉल की लड़ाई नहीं है. यह एनर्जी सिक्योरिटी, किसानों की कमाई, पानी की उपलब्धता, खाद्य सुरक्षा और आम आदमी की जेब के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी है.

E20 के घमासान के बीच E100 

इथेनॉल की कहानी को समझने के लिए पहले फ्यूल का गणित समझिए. E20 पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल होता है. E85 में 85 फीसदी इथेनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल होता है. वहीं E100 का मतलब है लगभग पूरी तरह इथेनॉल से बना फ्यूल. यानी सरकार अब ऐसे फ्यूल के इस्तेमाल का रास्ता खोल रही है, जिसमें पेट्रोल की हिस्सेदारी बहुत कम या बिल्कुल नहीं होगी.

लेकिन यहां एक जरूरी बात है. E85 और E100 के नियमों में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि अब हर पेट्रोल गाड़ी में यह फ्यूल डाला जा सकेगा. इस फ्यूल का इस्तेमाल ख़ास तौर पर सर्टिफाइड फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में ही किया जा सकेगा. रेगुलर पेट्रोल वाहन या सिर्फ E20 कम्पलायंट इंजन को E85 या E100 पर चलाना सुरक्षित नहीं है. सरकार के संशोधन का मकसद इसी तकनीक के लिए नियमों का दायरा साफ करना है.

यह भी पढें: सनरूफ... 5-स्टार सेफ्टी और बहुत कुछ! 5.99 लाख की कार पर टूटे लोग

यह फर्क इसलिए अहम है, क्योंकि भारत में करोड़ों लोग पेट्रोल गाड़ियां चलाते हैं. उनके लिए यह फैसला रातोंरात फ्यूल बदलने का आदेश नहीं है. यह आने वाले समय में गाड़ियों और फ्यूल के नए विकल्प तैयार करने की दिशा में उठाया गया एक कदम है.

सरकार को इथेनॉल से इतनी उम्मीद क्यों है

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है, तो उसका असर देश के इंपोर्ट बिल, रुपये की स्थिति और आखिरकार आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है. ऐसे में सरकार का कहना है कि, देश में बनने वाले फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ाना सरकार के लिए आर्थिक और रणनीतिक, दोनों लिहाज से जरूरी है. इथेनॉल इस रणनीति का एक हिस्सा है. इसे गन्ने के रस, शीरे और कुछ अनाजों जैसे मक्का से बनाया जा सकता है. सरकार का तर्क है कि घरेलू स्तर पर इथेनॉल बनने से पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इंपोर्टेड फ्यूल की जरूरत कम पड़ती है. 

सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को एनर्जी सिक्योरिटी, किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की नीति के तौर पर पेश किया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने जुलाई 2026 में भी इस कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा था कि इसका उद्देश्य तेल आयात पर निर्भरता घटाना और किसानों को फायदा पहुंचाना है. यह तर्क अपनी जगह ठीक है. लेकिन किसी नीति का मकसद अच्छा होना और उसका हर नतीजा अच्छा होना, दो अलग बातें हैं. असली परीक्षा यह है कि इथेनॉल बनाने में जितने संसाधन लगते हैं, उनसे होने वाला फायदा कितना बड़ा है.

इथेनॉल को लेकर चुनौती

वाहनों में इथेनॉल के प्रयोग को लेकर सबसे बड़ी चुनौती 'एनर्जी डेंसिटी' को लेकर है. प्योर पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल में लगभग 33% कम ऊर्जा होती है. इसका मतलब है कि एक ही दूरी तय करने के लिए इंजन को अधिक इथेनॉल जलाना पड़ेगा. इसके लिए आपको माइलेज का गणित और कॉस्टिंग भी समझन होगा. जब आप E85 फ्यूल का इस्तेमाल करते हैं, तो आपकी गाड़ी के माइलेज में 25% से 30% तक की गिरावट आ सकती है. वैज्ञानिक रूप से, 1 गैलन (3.7 लीटर स्टैंडर्ड) पेट्रोल में जितनी एनर्जी होती है, E85 में उसका केवल 73% से 83% ही होता है. हालांकि, इथेनॉल का ऑक्टेन नंबर (Octane Number) अधिक होता है, जो इंजन के 'नॉक' रेजिस्टेंस को बढ़ाता है और टर्बोचार्ज्ड इंजनों में बेहतर परफॉर्मेंस दे सकता है.

क्या गाड़ी का खर्च घटेगा?

आम आदमी के लिए एनर्जी पॉलिसी का सबसे सीधा सवाल है. क्या इससे गाड़ी चलाना सस्ता होगा. मान लीजिए, पेट्रोल के मुकाबले E85 या E100 की कीमत कम रखी जाती है. जैसा कि, इस फ्यूल के साथ है भी. रेगुलर पेट्रोल यानी E20 फ्यूल की कीमत 102.12 रुपये प्रतिलीटर है और दिल्ली में E85 फ्यूल की कीमत 82.12 रुपये प्रतिलीटर है. यानी दोनों फ्यूल में तकरीबन 20 रुपये प्रतिलीटर का अंतर है.

यह भी पढें इस दिवाली घर लाएं सस्ती 7-सीटर फैमिली कारें! कीमत 5.73 लाख: 

पहली नजर में यह फायदे का सौदा लग सकता है. लेकिन केवल प्रति लीटर कीमत देखकर फैसला नहीं किया जा सकता. इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले प्रति लीटर कम ऊर्जा होती है. इसलिए समान दूरी तय करने के लिए ज्यादा फ्यूल खर्च हो सकता है. ऐसे में सस्ता फ्यूल भी हर किलोमीटर पर जरूरी नहीं कि सस्ता पड़े. हाल ही में देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार Maruti Wagon R Flex Fuel का रोड टेस्ट हमारी टीम द्वारा किया गया था. जिसने दिल्ली में टेस्टिंग के दौरान तकरीबन 16 किमी/लीटर का माइलेज दिया था. जो एक रेगुलर फ्यूल मॉडल के तुलना में बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है.

इसके अलावा फ्लेक्स-फ्यूल वाहन की शुरुआती कीमत भी मायने रखेगी. यदि मौजूदा कार मॉडलों को ही E85 फ्यूल वाली टेक्नोलॉजी के साथ पेश किया जाता है तो इसके लिए कार निर्माताओं को वाहन के मैकेनिज़्म में कई तरह के बड़े बदलाव करने पड़ते हैं. जिसका सीधा असर वाहन की कीमत पर देखने को मिलता है. यदि मारुति वैगनआर को ही लें तो कंपनी ने इसके फ्लेक्स फ्यूल वर्जन को ZXi Plus वेरिएंट पर तैयार किया है. 

ये वैगनआर का टॉप वेरिएंट (ZXi Plus) है और रेगुलर फ्यूल (E20 पेट्रोल) से चलने वाले मॉडल की कीमत 6.41 लाख रुपये है. वहीं इसी मॉडल के फ्लेक्स फ्यूल वर्जन की कीमत 7.24 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. ध्यान दें कि दो अलग-अलग टाइप के फ्यूल पर चलने वाली इन दोनों कारों में केवल इंजन मैकेनिज़्म में बदलाव किया गया है. इन दोनों के फीचर, माइलेज, लुक-डिजाइन या कम्फर्ट में कोई अंतर नहीं है. लेकिन बावजूद इसके ग्राहक को तकरीबन 83,000 रुपये एक्स्ट्रा देने होंगे. 

गाड़ी की टंकी और पानी की जंग

इंडिया का इथेनॉल प्रोग्राम 'गन्ने' पर टिका है. लेकिन पिछले साल तक इथेनॉल प्रोडक्शन में मक्के की अहम भूमिका रही. लेकिन अब सरकार चावल ने इथेनॉल बनाने की तैयारी में है. केवल 1 किग्रा चावल के प्रोडक्शन (खेत से आपकी थाली तक पहुंचने) में तकरीबन 3,000 लीटर से 5,000 लीटर (अलग-अलग वेरायटी के अनुसार) पानी खर्च होता है. वहीं 1,000 किग्रा चावल से तकरीबन 427 से 470 लीटर इथेनॉल बनता है. यानी 2.5 किग्रा चावल को प्रोसेस करने के बाद इससे 1 लीटर इथेनॉल बनाया जाता है. इसके अलावा चावल से 1 लीटर इथेनॉल बनाने के लिए 10,790 लीटर की जरूरत होती है. यानी महज एक लीटर इथेनॉल के लिए ही आपको कई हजार लीटर पानी बर्बाद करना पड़ता है.

यह भी पढें: लॉन्च होते ही... Sold-out! बंद करनी पड़ी बाइक की बुकिंग

नीति आयोग की इथेनॉल ब्लेंडिंग पर रिपोर्ट के मुताबिक, गन्ने से बनने वाले एक लीटर इथेनॉल का कृषि स्तर पर वॉटर फुटप्रिंट करीब 2,860 से 3,000 लीटर तक हो सकता है. धान से बनने वाले इथेनॉल के मामले में यह आंकड़ा 10,000 लीटर से भी ज्यादा हो सकता है. मक्के से इथेनॉल बनाने में भी पानी की जरूरत पड़ती है. ये आंकड़े मुख्य रूप से फसल उगाने में इस्तेमाल होने वाले पानी को दिखाते हैं. इन्हें सिर्फ फैक्ट्री में खर्च होने वाले पानी के रूप में समझना गलत होगा.

यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्री कितने लीटर पानी खर्च करती है. सवाल यह भी है कि उस फसल को उगाने में कितना पानी लगा, जो बाद में फ्यूल बनकर गाड़ी के टैंक में पहुंचा. भारत में पानी की कमी पहले से एक बड़ी चुनौती है. कई इलाकों में भूजल का स्तर गिर रहा है. किसान बारिश और सिंचाई के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ऐसे में अगर इथेनॉल की मांग बढ़ने पर गन्ने और अनाज की खेती का रकबा बढ़ता है, तो पानी पर दबाव भी बढ़ सकता है.

हालांकि, यह कहना भी सही नहीं होगा कि इथेनॉल की हर अतिरिक्त लीटर मांग से उतनी ही मात्रा में पीने का पानी खत्म हो जाएगा. जल खपत का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि फसल कहां उगाई जा रही है, सिंचाई किस तरीके से हो रही है, कौन-सा कच्चा माल इस्तेमाल किया जा रहा है और उस इलाके में पानी की उपलब्धता कितनी है. लेकिन इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है कि, इथेनॉल की बढ़ती खपत का असर जल संरक्षण पर भी पड़ेगा.

यही वजह है कि E85 और E100 की नई पॉलिसी के साथ पानी का हिसाब भी जरूरी है. अगर एक तरफ पेट्रोल की निर्भरता घटे, लेकिन दूसरी तरफ भूजल पर दबाव बढ़ जाए, तो इसे पूरी तरह सफल बदलाव कैसे कहा जा सकता है.

थाली बनाम फ्यूल...  जीत किसकी .

इथेनॉल की दूसरी बड़ी चुनौती खाद्य सुरक्षा है. गन्ना, मक्का और चावल जैसी फसलें सिर्फ उद्योगों के लिए कच्चा माल नहीं हैं. इन पर देश की बड़ी आबादी निर्भर करती है. जब किसी फसल की मांग फ्यूल इंडस्ट्री से बढ़ती है, तो उसके बाजार पर असर पड़ सकता है. किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बनती है. लेकिन अगर फसलों का बड़ा हिस्सा फ्यूल बनाने में जाने लगे, तो अनाज की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ने का जोखिम भी पैदा हो सकता है.

यहां एक बारीक फर्क समझना जरूरी है. हर तरह के अनाज से इथेनॉल बनाने का मतलब यह नहीं है कि लोगों की थाली से सीधे खाना उठाकर गाड़ी में डाल दिया गया. सरकार की नीति में टूटे चावल, खाने के लायक नहीं बचे अनाज, घोषित अतिरिक्त भंडार और कृषि अवशेषों जैसे विकल्प भी शामिल हैं. सरकार का कहना है कि अनाज के इस्तेमाल को खाद्य सुरक्षा और उपलब्धता को ध्यान में रखकर तय किया जाता है.

यह भी पढें: Hilux भी लगेगा फीका! आ रहा है ऑफरोडिंग किंग Gladiator

लेकिन असली सवाल नीति के कागज पर नहीं, उसके अमल में है. देश में अगर किसी साल सूखा पड़ता है, फसल कम होती है या अनाज की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो क्या उस साल इथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज की मांग अपने आप घटाई जाएगी. क्या सरकार के पास ऐसा साफ नियम होगा, जो जरूरत पड़ने पर फ्यूल प्रोडक्शन और खाद्य जरूरतों के बीच संतुलन बना सके.

इस सवाल का जवाब बेहद जरूरी है. क्योंकि किसान को गन्ने या मक्के की अच्छी कीमत मिलना अच्छी बात है. लेकिन देश के गरीब परिवार के लिए आटा, चावल और दाल महंगी होना भी उतनी ही बड़ी समस्या है. हमें किसानों की आय बढ़ानी है. लेकिन खाद्य सुरक्षा की कीमत पर नहीं. हमें तेल का आयात घटाना है. लेकिन पानी और अनाज के संकट को बढ़ाकर नहीं.

क्या सच में घटेगा प्रदूषण?

इथेनॉल के समर्थन में सबसे बड़ा तर्क यही दिया जाता है कि, यह पेट्रोलियम पर निर्भरता घटाने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकता है. लेकिन यहां भी पूरी तस्वीर देखना जरूरी है. नीति आयोग की इथेनॉल ब्लेंडिंग रोडमैप रिपोर्ट में लाइफ-साइकिल एमिशन के आकलन के आधार पर बताया गया था कि गन्ने से बने इथेनॉल का ग्रीनहाउस गैस एमिशन पेट्रोल के मुकाबले करीब 65 फीसदी और मक्के से बने इथेनॉल का करीब 50 फीसदी कम हो सकता है. यह फायदा प्रोडक्शन के तरीके और इस्तेमाल किए गए कच्चे माल पर निर्भर करता है.

लेकिन इथेनॉल को पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त फ्यूल कहना गलत होगा. फसल उगाने, खाद डालने, सिंचाई करने, कच्चे माल को फैक्ट्री तक पहुंचाने और फ्यूल बनाने में भी ऊर्जा खर्च होती है. इन प्रोसेस से होने वाला उत्सर्जन भी जोड़ना पड़ता है. इसके अलावा वाहन के टेलपाइप से निकलने वाले प्रदूषण और पूरे लाइफ-साइकिल में होने वाले कार्बन उत्सर्जन को अलग-अलग समझना होगा. किसी फ्यूल से कार्बन उत्सर्जन का कुल हिसाब बेहतर हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उससे चलने वाली गाड़ी के एग्जॉस्ट से हर तरह का प्रदूषण खत्म हो जाएगा.

यह भी पढें: नई छोड़िए... इस ब्रांड की पुरानी कारों पर टूटे लोग! बिकीं 65 लाख गाड़ियां

सरकार और वाहन कंपनियों को इन आंकड़ों को सार्वजनिक करना चाहिए. तभी आम आदमी यह समझ पाएगा कि नया फ्यूल वास्तव में कितना साफ है. हालांकि, कुछ दिनों पहले जब E20 को लेकर घमासान मचा था तो उस वक्त तेलंगाना राज्य के रंगारेड्डी ज़िले के चेवेल्ला (Chevella) से लोकसभा सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने एक वीडियो जारी इस पूरे मामले को गलत बताया था और उन्होंने दो कटोरियो में अलग-अलग प्योर पेट्रोल और E20 पेट्रोल को जलाकर यह साबित करने की कोशिश की थी, इससे प्रदूषण कम होता है. लेकिन यह वैज्ञानिक तरीका बिल्कुल नहीं है. भरोसे की बात...

भारत में E20 पेट्रोल को लेकर बहस ने एक बात साफ कर दी है. फ्यूल की नीति सिर्फ तकनीक का मामला नहीं है. यह भरोसे का मामला भी है. जब पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाई गई, तो कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज घटने की शिकायत की. पुराने वाहनों की कम्पलायंस और इंजन की उम्र को लेकर भी सवाल उठे. सरकार ने इन चिंताओं के जवाब में कहा कि  E20 के लिए तैयार वाहनों पर किए गए टेस्टिंग में गंभीर तकनीकी समस्याओं के प्रमाण नहीं मिले हैं. लेकिन सरकार ने यह भी माना है कि, कुछ पुराने वाहनों के माइलेज में तकरीबन 3 से 6 फीसदी की गिरावट आ सकती है. इसका मतलब यह नहीं कि E20 से जुड़ी हर शिकायत सही है. और न ही इसका मतलब यह है कि हर शिकायत को गलत मान लिया जाए. किसी भी नई तकनीक का मूल्यांकन आंकड़ों, टेस्टिंग और वास्तविक इस्तेमाल के अनुभव के आधार पर होना चाहिए. हालांकि इस दौरान सरकार ने कुछ वाहन निर्माताओं के साथ एक पैनल बैठाकर बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी. और यह बताने की कोशिश की थी कि, E20 फ्यूल से वाहनों को किसी का तरह का कोई नुकसान नहीं है. लेकिन नीति का भरोसा प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं बनता. वह तब बनता है, जब ग्राहक को सही जानकारी मिले और उसकी परेशानी का समाधान हो.

यह भी पढें: न हेलमेट की जरूरत... न गिरने का डर! आया सेल्फ बैलेंसिंग स्कूटर

E85 और E100 के मामले में यह सावधानी और ज्यादा जरूरी है. इथेनॉल की मात्रा बढ़ने के साथ इंजन, फ्यूल सिस्टम और गाड़ी में इस्तेमाल होने वाले कुछ पुर्जों को उसी के अनुकूल बनाना पड़ता है. यही वजह है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन अलग तकनीकी तैयारी के साथ आते हैं. सरकार को शुरुआत से ही ग्राहकों को बताना चाहिए कि कौन-सी गाड़ी किस फ्यूल पर चल सकती है. किस फ्यूल से कितने माइलेज की उम्मीद है. वारंटी की शर्तें क्या हैं. और अगर किसी वाहन में तकनीकी परेशानी आती है, तो शिकायत कहां दर्ज होगी.पेट्रोल पंपों की तैयारी भी उतनी ही जरूरी

सरकार ने E85 और E100 को नियमों में जगह दे दी. वाहन कंपनियों ने नई गाड़ियां भी तैयार करनी शुरू कर दी है. लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की सफलता के लिए पेट्रोल पंपों पर उपयुक्त फ्यूल उपलब्ध कराना होगा. उसकी गुणवत्ता की जांच करनी होगी. ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज के लिए व्यवस्था तैयार करनी होगी. वाहन कंपनियों को सर्विसिंग और पार्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी. सिर्फ बड़े शहरों में कुछ पेट्रोल पंप खोलने से काम नहीं चलेगा. भारत में गाड़ियों का इस्तेमाल छोटे शहरों, कस्बों और गांवों तक फैला है. वहां भी फ्यूल उपलब्ध कराना होगा.आखिर में... सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हमारी गाड़ी किस फ्यूल से चलेगी. सवाल यह भी है कि उस फ्यूल को तैयार करने में देश को क्या कीमत चुकानी पड़ेगी. ऊर्जा की आत्मनिर्भरता जरूरी है. लेकिन असली आत्मनिर्भरता वही होगी, जिसमें गाड़ी का टैंक भी भरे, किसान की कमाई भी बढ़े, पानी भी बचे और आम आदमी की थाली पर भी बोझ न पड़े.

About Ajay Tiwari

Senior Editorial writer covering tech innovations, space exploration, and emerging digital trends. Delivering deep analytical insights for premium global readers.

Comments ()

LIVE
दरभंगा में किसकी खुलेगी किस्मत? स्नातक और शिक्षक निर्वाचन की गिनती शुरू; जानें कब आएगा परिणाम • मतगणना के दिन सपा प्रत्याशी ने लगाए गंभीर आरोप, बोले- अमरोहा में वोटों की लूट हुई • केसरिया नगर पंचायत अध्यक्ष के पति के घर ईओयू की रेड, गैस एजेंसी समेत कई ठिकानों पर छापेमारी • पाकिस्तान सीमा के पास ईरानी सुरक्षा बलों और अज्ञात सशस्त्र समूहों के बीच तीव्र झड़प • अक्षय‑रवीना की जोड़ी की 32‑साल पुरानी हिट ‘मोहरा’ 4K रीमास्टर में आएगी, रामायण के बाद रिलीज • बदायूं के दो पूर्व भाजपा विधायक समाजवादी पार्टी में शामिल, अखिलेश यादव के साथ पंजीकरण • हारने वालों से कमजोर कड़ियों की पहचान, वरिष्ठ कांग्रेसियों को दो टुक, वड़िंग की सलाह • चक्रवात अर्नब कितना खतरनाक; किन राज्यों पर मंडरा रहा खतरा और कब टकराएगा तट से? • वैभव की बल्लेबाजी स्थिति पर चर्चा, टीम की गेंदबाजी पर चिंता • तिरहुत विधान परिषद चुनाव का पिटारा आज खुला, एमआईटी में मतगणना शुरू • हाथरस जनपद पर मतगणना शुरू, प्रत्याशी और समर्थक रिजल्ट का इंतज़ार • लिक्टेनस्टीन के युवराज भारत दौरे पर: राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत, पीएम के साथ द्विपक्षीय चर्चा • E100 से दौड़ेंगी गाड़ियां, क्या महंगा पड़ेगा इथेनॉल का खेल? • एमएलसी चुनाव में वरीयता मतों से तय होती है जीत‑हार: पूरी प्रक्रिया का विवरण • कासिमपुर थाने की 10‑वर्षीय केस डायरी गायब, उपनिरीक्षक व दीवान पर एफआईआर दर्ज • ओपनएआई ने पेश किया नया GPT-6.1 Terra मॉडल: अब आधी कीमत पर डेली टास्क करने में हुआ माहिर, क्या-क्या बदला? • 30 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में अनंत सिंह की जमानत पर सुनवाई, इसी दिन मृतक की पहली बरसी • कांग्रेस ने 105 बार नकदी निकालने का लगाया आरोप, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग • चुनाव आयोग के सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामे से क्या चीज़ें बदल जाएंगी? अब भी बचे हैं ये सवाल • दिलजीत दोसांझ ने ताजमहल की शोभा पर किया दीदार, कड़ी सुरक्षा के बीच • सारण शिक्षक सीट की मतगणना जारी, पांच जिलों के शिक्षकों के प्रतिनिधि पर टिकी नजर; परिणाम का इंतजार • दोपहर में बने सपाई, शाम को भाजपा की प्रदेश कार्य समिति की सूची में सिनोद शाक्य का नाम • भारत बनाम न्यूजीलैंड तीसरा T20: टॉस कौन जीत रहा है? • पीएम मोदी ने आज कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया, एआई से बायोटेक्नोलॉजी तक 12 प्रमुख विषयों पर चर्चा • मायावती ने राजनीतिक बयानबाजी पर जताई चिंता, बोलीं- नेताओं के बीच बढ़ती कटुता देशहित में नहीं • चक्रवात अर्नब दिल्ली‑NCR तक पहुँच सकता है, पाकिस्तान की हवा से मिलकर लाएगा भारी बारिश • SC में 3 दर्जन याचिकाओं की सुनवाई, ज्ञानेश कुमार के फैसलों और 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर सवाल • एचडीएफसी बैंक में अनूप बागची को नया MD और CEO नियुक्त • कर्मचारियों पर गुस्सा, नेताओं पर कोई कदम नहीं – एमएलसी चुनाव में बूथ कैप्चरिंग पर उठे सवाल • एआर रहमान ने 'मंगल रंग' गाने पर उठे विवाद पर दी प्रतिक्रिया • यूपी में युवक ने कलाई काटी, फंदा लगाकर आत्महत्या; बच्चों की फोटो पर विवाद • इतिहास, उद्योग और 2027 के चुनाव में प्रमुख भूमिका • कार्तिक मास में स्नान का सही समय और उसके आध्यात्मिक लाभ • तिलक वर्मा में दिखी धोनी और युवराज वाली कौन सी खासियत? सुरेश रैना ने किया खुलासा, जानें • चांदी की कीमत फिर गिरावट, हाई से 2.26 लाख रुपये सस्ती • विष्णुदेव साय कैबिनेट की बैठक: धान खरीद और अन्य योजनाओं पर चर्चा • कारोबारियों ने फिर लिखी राहुल को चिट्ठी: दिवाली के बाद महारैली करने की अपील, व्यापार में नुकसान का दिया हवाला • न्यूजीलैंड रग्बी का महामुकाबला, सीएम सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन • छेड़खानी का मुकदमा वापस न लेने पर फैक्टरी कर्मचारी को मारी थी गोली, चार दिन बाद मौत • मंगलवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट, रौनक कब लौटेगी? • दरभंगा में किसकी खुलेगी किस्मत? स्नातक और शिक्षक निर्वाचन की गिनती शुरू; जानें कब आएगा परिणाम • मतगणना के दिन सपा प्रत्याशी ने लगाए गंभीर आरोप, बोले- अमरोहा में वोटों की लूट हुई • केसरिया नगर पंचायत अध्यक्ष के पति के घर ईओयू की रेड, गैस एजेंसी समेत कई ठिकानों पर छापेमारी • पाकिस्तान सीमा के पास ईरानी सुरक्षा बलों और अज्ञात सशस्त्र समूहों के बीच तीव्र झड़प • अक्षय‑रवीना की जोड़ी की 32‑साल पुरानी हिट ‘मोहरा’ 4K रीमास्टर में आएगी, रामायण के बाद रिलीज • बदायूं के दो पूर्व भाजपा विधायक समाजवादी पार्टी में शामिल, अखिलेश यादव के साथ पंजीकरण • हारने वालों से कमजोर कड़ियों की पहचान, वरिष्ठ कांग्रेसियों को दो टुक, वड़िंग की सलाह • चक्रवात अर्नब कितना खतरनाक; किन राज्यों पर मंडरा रहा खतरा और कब टकराएगा तट से? • वैभव की बल्लेबाजी स्थिति पर चर्चा, टीम की गेंदबाजी पर चिंता • तिरहुत विधान परिषद चुनाव का पिटारा आज खुला, एमआईटी में मतगणना शुरू • हाथरस जनपद पर मतगणना शुरू, प्रत्याशी और समर्थक रिजल्ट का इंतज़ार • लिक्टेनस्टीन के युवराज भारत दौरे पर: राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत, पीएम के साथ द्विपक्षीय चर्चा • E100 से दौड़ेंगी गाड़ियां, क्या महंगा पड़ेगा इथेनॉल का खेल? • एमएलसी चुनाव में वरीयता मतों से तय होती है जीत‑हार: पूरी प्रक्रिया का विवरण • कासिमपुर थाने की 10‑वर्षीय केस डायरी गायब, उपनिरीक्षक व दीवान पर एफआईआर दर्ज • ओपनएआई ने पेश किया नया GPT-6.1 Terra मॉडल: अब आधी कीमत पर डेली टास्क करने में हुआ माहिर, क्या-क्या बदला? • 30 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में अनंत सिंह की जमानत पर सुनवाई, इसी दिन मृतक की पहली बरसी • कांग्रेस ने 105 बार नकदी निकालने का लगाया आरोप, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग • चुनाव आयोग के सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामे से क्या चीज़ें बदल जाएंगी? अब भी बचे हैं ये सवाल • दिलजीत दोसांझ ने ताजमहल की शोभा पर किया दीदार, कड़ी सुरक्षा के बीच • सारण शिक्षक सीट की मतगणना जारी, पांच जिलों के शिक्षकों के प्रतिनिधि पर टिकी नजर; परिणाम का इंतजार • दोपहर में बने सपाई, शाम को भाजपा की प्रदेश कार्य समिति की सूची में सिनोद शाक्य का नाम • भारत बनाम न्यूजीलैंड तीसरा T20: टॉस कौन जीत रहा है? • पीएम मोदी ने आज कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया, एआई से बायोटेक्नोलॉजी तक 12 प्रमुख विषयों पर चर्चा • मायावती ने राजनीतिक बयानबाजी पर जताई चिंता, बोलीं- नेताओं के बीच बढ़ती कटुता देशहित में नहीं • चक्रवात अर्नब दिल्ली‑NCR तक पहुँच सकता है, पाकिस्तान की हवा से मिलकर लाएगा भारी बारिश • SC में 3 दर्जन याचिकाओं की सुनवाई, ज्ञानेश कुमार के फैसलों और 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर सवाल • एचडीएफसी बैंक में अनूप बागची को नया MD और CEO नियुक्त • कर्मचारियों पर गुस्सा, नेताओं पर कोई कदम नहीं – एमएलसी चुनाव में बूथ कैप्चरिंग पर उठे सवाल • एआर रहमान ने 'मंगल रंग' गाने पर उठे विवाद पर दी प्रतिक्रिया • यूपी में युवक ने कलाई काटी, फंदा लगाकर आत्महत्या; बच्चों की फोटो पर विवाद • इतिहास, उद्योग और 2027 के चुनाव में प्रमुख भूमिका • कार्तिक मास में स्नान का सही समय और उसके आध्यात्मिक लाभ • तिलक वर्मा में दिखी धोनी और युवराज वाली कौन सी खासियत? सुरेश रैना ने किया खुलासा, जानें • चांदी की कीमत फिर गिरावट, हाई से 2.26 लाख रुपये सस्ती • विष्णुदेव साय कैबिनेट की बैठक: धान खरीद और अन्य योजनाओं पर चर्चा • कारोबारियों ने फिर लिखी राहुल को चिट्ठी: दिवाली के बाद महारैली करने की अपील, व्यापार में नुकसान का दिया हवाला • न्यूजीलैंड रग्बी का महामुकाबला, सीएम सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन • छेड़खानी का मुकदमा वापस न लेने पर फैक्टरी कर्मचारी को मारी थी गोली, चार दिन बाद मौत • मंगलवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट, रौनक कब लौटेगी? •