चुनाव आयोग (EC) ने आज फॉर्म‑6 के बारे में उठे सवालों पर स्पष्ट बयान दिया। आयोग ने बताया कि फॉर्म‑6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र (एनेक्सर‑D) जोड़ा गया है।
साथ ही EC ने फिर से यह स्पष्ट किया कि मतदाता सूची तैयार करने का अधिकार अभी भी ERO (Electoral Registration Officer) के पास है और राज्यों के डेटा को केंद्रीकृत नहीं किया गया है।
इन बिंदुओं के जवाब में, Aajtak ने EC से तीन प्रमुख सवालों पर स्पष्टता मांगी: (1) फॉर्म‑6 में बदलाव क्यों किया गया, (2) चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बावजूद आदेश क्यों जारी हुए, और (3) डेटा को सेंट्रलाइज़ क्यों किया गया।
पहले सवाल के जवाब में EC ने बताया कि फॉर्म‑6 में वास्तव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। केवल एक अतिरिक्त घोषणा पत्र अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें आवेदक को बताना होता है कि क्या पहले SIR (Self‑Registration) के दौरान माता‑पिता या दादा‑दादी का नाम शामिल किया गया था।
फॉर्म‑6 का उपयोग 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले या अन्य कारणों से मतदाता सूची में न होने वाले व्यक्तियों द्वारा नया नाम जोड़ने के लिए किया जाता है। यह आम तौर पर नए मतदाता पंजीकरण (New Voter Registration) का फॉर्म माना जाता है।
EC के 24‑06‑2025 के SIR निर्देशों के अनुसार, फॉर्म‑6/फॉर्म‑8 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा फ़ॉर्म भी भरना अनिवार्य है। यह निर्देश 14‑05‑2026 के SIR आदेश में भी एनेक्सर‑A के रूप में शामिल है।
फॉर्म‑6 को चार तरीकों से भरा जा सकता है: (1) ऑफ़लाइन, (2) ऑनलाइन, (3) BLO ऐप के माध्यम से, और (4) ECINET ऐप। फॉर्म‑6 तभी स्वीकार किया जाएगा जब घोषणा पत्र भी जमा किया जाए।
दूसरे सवाल के जवाब में EC ने बताया कि ERO‑Net का पूर्ण और बिना किसी रोक-टोक के एक्सेस ERO को दिया गया है। RP एक्ट, 1950 की धारा 13B के अनुसार, ERO देश में मतदाता सूची तैयार करने और उसमें सुधार करने के लिए जिम्मेदार है। इसलिए ECINET पोर्टल पर ERO को पूर्ण पहुँच मिलती है।
EC ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी निर्णय ERO के स्पष्ट आदेश और CEO की देखरेख में लिए जाते हैं। मतदाता सूची केवल ERO द्वारा ही तैयार की जाती है; ECINET एक सुविधा देने वाला प्लेटफ़ॉर्म है।
गोवा के 97 वोटरों का मामला ECINET सिस्टम में नाम हटाने के बाद उन्हें पुनः जोड़ने की तकनीकी सुविधा की कमी से जुड़ा है। SIR प्रक्रिया के दौरान इन नामों को हटाया गया था, लेकिन बाद में ERO ने उन्हें वापस जोड़ने की कोशिश की, जबकि सिस्टम में रोलबैक का विकल्प नहीं था।
EC के अनुसार, 21‑फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में ये 97 नाम शामिल नहीं थे क्योंकि ड्राफ़्ट सूची में उन्हें हटाने के बाद नोटिस भेजे गए थे। ERO ने फिर से जांच कर इन नामों को जोड़ने का प्रयास किया, लेकिन IT विभाग के पास ऐसी सुविधा नहीं थी।
हालाँकि, EC ने कहा कि इन 97 लोगों का मतदान का अधिकार समाप्त नहीं हुआ है। वे फॉर्म‑6 भरकर दोबारा नाम जोड़वा सकते हैं।
तीसरे सवाल के जवाब में, EC ने उल्लेख किया कि चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बावजूद आदेश जारी करने का कारण यह है कि ERO के पास आवश्यक अधिकार और जिम्मेदारी है, और EC के निर्देशों के तहत निर्णय लिए जाते हैं।
अंततः EC ने यह स्पष्ट कर दिया कि फॉर्म‑6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है, ERO के अधिकार बरकरार हैं, डेटा केंद्रीकरण नहीं हुआ है, और गोवा के 97 वोटरों के नाम पुनः जोड़ने के लिए फॉर्म‑6 का उपयोग किया जा सकता है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!