भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। इस सिलसिले में शुक्रवार को वाराणसी के सर्किट हाउस सभागार में वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग की अध्यक्षता में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट की प्रथम स्तर जांच (एफएलसी) की कार्यशाला हुई। उसमें छह मंडलों के डीएम, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और ईवीएम सुपरवाइजरों को तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया। वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) और उप जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया कि आयोग के मानकों के अनुसार ईवीएम की एफएलसी से लेकर मतगणना की कार्रवाई पूरी करें। ईवीएम से सम्बंधित प्रत्येक कार्रवाई में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को साथ रखें। वे जब तक ना आएं, तब तक उन्हें ट्रैक करते रहें। उन्होंने वाराणसी में विधानसभा चुनाव-2022 के दौरान ईवीएम को लेकर उपजे विवाद का उदाहरण देते हुए सचेत किया कि बिना राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ईवीएम की कोई कार्रवाई न करें। प्रथम स्तर जांच प्रक्रिया में यदि वे शामिल न हों तो उनसे लिखित लें।
दो सत्रों में आयोजित प्रशिक्षण में ईवीएम निर्माता कम्पनी बेल के विशेषज्ञ रवि रंजन, राहुल कुशवाहा एवं रामा मीनन कुमार डी ने ईवीएम, वीवीपैट की तकनीकी संरचना, संचालन तथा सुरक्षा विशेषताओं की पीपीटी के जरिए जानकारी दी। संचालन, रैंडमाइजेशन, कमीशनिंग, मतदान प्रक्रिया, मतगणना तथा मतगणना के बाद की प्रक्रियाओं सहित विभिन्न प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिलाया गया। भारत निर्वाचन आयोग के ईवीएम प्रभाग के प्रमुख सचिव बीसी पात्रा ने एफएलसी के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों तथा उनसे बचने के लिए आवश्यक सावधानियों से भी अवगत कराया। कहा गया कि वीवीपैट पर्चियों की ग्रेडिंग अवश्य की जाए। दूसरे सत्र में अधिकारियों ने हैंड ऑफ ट्रेनिंग अर्थात ईवीएम और वीवीपैट के तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं को समझा। कार्यशाला में प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी अखंड प्रताप सिंह, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी अमित सिंह एवं अवर सचिव राकेश कुमार भी मौजूद थे।
प्रशिक्षण के अंत में कार्यशाला में मौजूद सभी प्रतिभागियों का मूल्यांकन भी हुआ। डाउट क्लियरिंग सेशन में उनके प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। प्रतिभागियों से घोषणा-पत्र भी प्राप्त किए गए, जिसमें उन्होंने प्रशिक्षण में बताए गए विषयों को समझने तथा किसी प्रकार की शंका शेष न होने की पुष्टि की। इस दौरान ईवीएम और वीवीपैट के प्रशिक्षण के संबंध में 15 मिनट की परीक्षा भी हुई। 40 सवालों वाले प्रश्न पत्र में पासिंग के लिए 24 अंक तय थे। इसमें सभी डीएम एवं एडीएम उत्तीर्ण हुए।
आयोग के अधिकारियों ने कहा कि ईवीएम की एफएलसी, रैंडमाइजेशन या कमीशनिंग के कार्य संवेदनशील हैं। इनमें पारदर्शिता होने से चुनाव की निष्पक्षता प्रदर्शित होती है। इसलिए ईवीएम की सुपरविजन के लिए एडीएम स्तर के अधिकारियों को तैनात किया जाए। सुपरवाइजर को आयोग के प्रोटोकॉल के हिसाब से ईवीएम की कार्रवाइयों को पूर्ण करना होगा।
वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि ईवीएम एफएलसी को लेकर आयोग शेड्यूल जारी करेगा। एफएलसी के दौरान डीएम को औचक निरीक्षण करना चाहिए। स्वयं देखें कि एक दिन में एफएलसी की संख्या मानक के हिसाब से हो।
कार्यशाला में जौनपुर, गाजीपुर, चन्दौली, सोनभद्र, भदोही, प्रयागराज, प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशाम्बी, आजमगढ़, बलिया, मऊ गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, गोंडा, संत कबीरनगर, बस्ती तथा सिद्धार्थनगर जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं एफएलसी सुपरवाइजर ने प्रतिभाग किया। वाराणसी और मिर्जापुर डीएम प्रशिक्षण में भाग नहीं ले पाए थे। दोनों अधिकारी 14 सितम्बर को लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में भाग लेंगे।
एफएलसी चुनावी प्रक्रिया की पहली तैयारी मानी जाती है। इसके तहत ईवीएम और वीवीपैट की जांच होती है। इसमें मशीनों की सफाई, तकनीकी निरीक्षण, पुराने डेटा को हटाया जात है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि ईवीएम की बैलेट व कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट चुनाव के लिए पूरी तरह ठीक है या नहीं। एफएलसी अधिकृत इंजीनियरों के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में की जाती है।
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