बांग्लादेश में अगस्त 2024 के तख्ता पलट से जुड़ी एक नई दलील सामने आई है। शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने से ठीक पहले, मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने की योजना शुरू हो गई थी, और इस प्रक्रिया में एक विदेशी पत्रकार की मध्यस्थता प्रमुख भूमिका में थी।
यह दावा बांग्लादेश के पूर्व प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने किया है। आलम के अनुसार, उस समय छात्र नेताओं को ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो यूनुस तक उनकी बात पहुंचा सके। वह व्यक्ति था AFP के पत्रकार कदरुद्दीन शिशिर, जो एफ़पी के फैक्ट‑चेक टीम के संपादक भी थे।
शिशिर ने ढाका में AFP कार्यालय से इस संवेदनशील संपर्क को अंजाम दिया। उन्होंने छात्र नेताओं और यूनुस के बीच शुरुआती बातचीत कराई और पूरी प्रक्रिया को अत्यधिक गोपनीय रखा। अगर हसीना सरकार को इस गुप्त संवाद की सूचना मिल जाती, तो शिशिर और AFP की पूरी टीम को ‘आइनाघर’—एक गुप्त हिरासत केंद्र—भेज दिया जाता, जहाँ विरोधियों को अक्सर गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा जाता है।
आलम ने बताया कि शिशिर ने इस दौरान शांति बरती और सरकार की कथित क्रूरता के वीडियो सबूत इकट्ठा करना शुरू कर दिया। इस तथ्य के बाद, जून 2025 में हसीना के हटने के कुछ महीनों बाद, आलम को सोसाइटी ऑफ पब्लिशर्स इन एशिया (SOPA) अवॉर्ड मिला, जिसमें उन्होंने हसीना के बांग्लादेश से भागने की खबर को ब्रेक किया।
AFP की एक रिपोर्ट में कहा गया कि जब सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट कियाउन चुनिंदा स्थानों में से एक था जहाँ से बाहर की कनेक्शन बनी रही, जिससे जरूरी खबरें विश्व को भेजी जा सकीं। खुलासे के बाद यह स्पष्ट हुआ कि इस कनेक्शन का उपयोग केवल समाचार भेजने से आगे भी किया गया था।
हसीना के देश छोड़ने से पहले ही यूनुस की भूमिका शुरू हुई थी या नहीं, इस पर सवाल उठे हैं। जुलाई‑अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ, जो धीरे‑धीरे हसीना के खिलाफ बड़े जनविरोध में बदल गया। 5 अगस्त 2024 को हिंसक प्रदर्शनों के बीच हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर भारत के हिंदन एयरबेस तक पहुँचना पड़ा।
हसीना के प्रस्थान के अगले दिन, 6 अगस्त को छात्र नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाने का प्रस्ताव रखा। दो दिन बाद, 8 अगस्त को यूनुस पेरिस से ढाका आया और इस पद को संभाला। आलम के बयान के अनुसार, छात्र नेताओं और यूनुस के बीच संपर्क हसीना के प्रस्थान से पहले ही स्थापित हो चुका था, हालांकि यह पूरी तख्ता पलट की योजना को सिद्ध नहीं करता।
सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान यूनुस ने कहा था कि जुलाई‑अगस्त का आंदोलन अचानक नहीं, बल्कि व्यवस्थित रूप से तैयार किया गया था, और उसकी लीडरशिप को इस तरह से तैयार किया गया था कि पकड़े जाने पर भी आंदोलन नहीं रुकेगा। यह बयान आलम के नए खुलासे के साथ मिलकर बांग्लादेश में तख्ता पलट की पृष्ठभूमि को फिर से सवालों के घेरे में ले आया है।
हसीना ने 19 अक्टूबर को ऑनलाइन कार्यक्रम में कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और उन्हें गिरफ्तारी या प्रताड़ना का डर नहीं है। उसी महीने 28 अक्टूबर को ढाका में बांग्लादेश वायुसेना के एक पूर्व अधिकारी का शव नदी में मिला, जिसकी पहचान 28‑वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. एम. तहसीफ सौरी के रूप में हुई। उनका संबंध उस वीडियो से जोड़ा गया है जिसमें हसीना को 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ते दिखाया गया था, लेकिन मृत्यु के कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं।
मुहम्मद यूनुस ने 16 फ़रवरी 2026 को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार पद से इस्तीफ़ा दे दिया। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के तारिक रहमान को प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद नई सरकार का गठन हुआ। यूनुस के कार्यकाल में कई छात्र नेताओं को अंतरिम सरकार में जगह मिली, जिनमें से कुछ ने बाद में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) बनाकर जमात गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा।
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