राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को नौसिखिया बता दिया है। उन्होंने संजय झा का नाम लिए बिना कहा कि वह बिना इतिहास और भूगोल जाने फरक्का जल संधि पर बोल रहे हैं। आरजेडी सुप्रीमो ने कहा कि पश्चिम बंगाल में गंगा नदी पर बने फरक्का बैराज से बिहार को होने वाला खतरा और नुकसान हमने पहले ही भांप लिया था। तभी संसद और राज्य में आरजेडी की सरकार के दौरान हर मंच पर उन्होंने फरक्का बैराज का कड़ा विरोध किया।
पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव ने शनिवार को जारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जेडीयू पर जमकर निशाना साधा। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष को आड़े हाथों लेते हुए लालू ने दावा किया कि नीतीश ने संसद में कभी भी फरक्का बैराज के मुद्दे पर कभी एक शब्द नहीं बोला। क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी दीर्घकालिक मुद्दों की राजनीति नहीं की।
लालू ने संजय झा का नाम लिए बिना कहा, "नीतीश के खेवनहार बने नौसिखियों को ज्ञान अर्जन करने के लिए बिहार के जल संसाधन विभाग जाकर गंगा नदी में जल उपलब्धता की कमी, बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय संधि के दुष्प्रभाव और तत्कालीन बिहार सरकार के प्रयास एवं तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदा भाई (जगदानंद सिंह) के केंद्र सरकार के साथ पत्राचार को पढ़ना चाहिए।"
लालू यादव ने इस पोस्ट के साथ अपना पुराना वीडियो भी शेयर किया है। इसमें वह संसद के अंदर फरक्का बैराज का विरोध करते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने इस संधि को देश के खिलाफ बताया था। लालू ने कहा था, “गंगा का सारा पानी बांग्लादेश को दे दिया। देश हित में इस संधि को तोड़ देना चाहिए। जिन नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स ने यह संधि की उन्होंने फरक्का बैराज से होने वाले भविष्य के खतरों को नहीं समझा।”
जेडीयू के राज्यसभा सांसद संजय झा बीते कई दिनों से फरक्का बांध का मुद्दा उठा रहे हैं। दो दिन पहले उन्होंने एक आर्टिकल में कहा था साल 1996 में केंद्र की तत्कालीन संयुक्त मोर्चा की सरकार ने बांग्लादेश के साथ फरक्का समझौता किया था। गंगा नदी पर बने फरक्का बैराज से बिहार को बाढ़ और सुखाड़ की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
झा का कहना है कि उस समय बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू यादव संयुक्त मोर्चा के प्रभावी नेता थे। उनका आरोप है कि उस समय बिहार की ओर से इस संधि का विरोध नहीं किया गया। अगर ऐसा होता तो 3 दशक तक बिहार को भारी नुकसान नहीं झेलना पड़ता।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में गंगा नदी पर बांग्लादेश सीमा से 18 किलोमीटर पहले फरक्का बैराज स्थित है। इसे साल 1975 में चालू किया गया था। हुगली नदी में पानी के बहाव को सुचारू रखने के उद्देश्य से यह बांध बनाया गया था। इसके बाद साल 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच 30 सालों के लिए फरक्का जल संधि हुई थी। इसके तहत फरक्का बैराज के पानी को दोनों देशों के बीच तय फॉर्मूले के आधार पर बांटे जाने पर सहमति बनी थी।
यह संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है। बिहार के हितधारक इस संधि का विरोध करते आए हैं। जानकारों का कहना है कि फरक्का बैराज के ऊपरी हिस्से में गाद जमा होने के कारण बिहार जैसे राज्यों में मॉनसून के समय बाढ़ की समस्या पैदा हो जाती है। साथ ही गर्मी के समय सूखाड़ की समस्या बनी रहती है। इसी कारण इस संधि को खत्म करने या नई व्यवस्था लागू करने की मांग की जाती रही है।
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