नई कूटनीतिक कोशिशों से यह ईरान में शांति की उम्मीद बढ़ने की वजह से तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड मंगलवार को करीब 4% गिरकर 89 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। आज सुबह 6 बजे 1.73 डॉलर प्रति बैरल और गिरकर 86.85 डॉलर पर आ गया है। जबकि, डब्ल्यूटीआई यानी अमेरिकी तेल 80.96 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया है।
एक दिलचस्प बात यह है कि होर्मुज से कच्चे तेल की बड़ी मात्रा (करोड़ों बैरल प्रतिदिन) अपने सैटेलाइट सिग्नल बंद करके गुजर रही है। इससे बाजार में तेल की आपूर्ति बनी हुई है और कीमतें उस स्तर तक नहीं बढ़ पाईं, जितना युद्ध शुरू होने पर अंदाजा लगाया गया था।
इधर कच्चे तेल के दाम धड़ाम हुए और आज सुबह 6 बजे ही भारत की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के रेट जारी कर दीं। यानी आज ईंधन के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के रेट में भी कोई बदलााव नहीं हुआ है। दिल्ली में आज भी घरेलू सिलेंडर 942 और कमर्शियल 2738 रुपये में मिल रहा है।
भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल पोर्टब्लेयर में 88.66 रुपये लीटर है, जबकि यहां 1 लीटर डीजल की कीमत ₹ 84.56 है। दिल्ली में 1 लीटर बिना एथेनॉल यानी E0 पेट्रोल की कीमत 167.35 रुपये लीटर है। जिस पेट्रोल में केवल 5 प्रतिशत ही एथेनॉल मिला है यानी E5 पेट्रोल का दाम 109.24 रुपये और E20 यानी 20 प्रतिशत मिलावट वाला पेट्रोल 102.12 रुपये लीटर है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक अगर साल 2026 की शुरुआत से देखें, तो कच्चे तेल के दाम अब भी करीब 45% चढ़े हुए हैं। इसकी वजह यह है कि युद्ध अब छठे महीने में है और मिडिल ईस्ट से तेल और रिफाइंड ईंधन की शिपिंग बाधित हो रही है। इसका सबसे बुरा असर डीजल, पेट्रोल पर पड़ा है। साथ ही, यूक्रेन के लगातार रूसी रिफाइनरियों पर हमलों ने भी आग में घी डाला है, जिससे ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगी हैं।
इसी बीच, रूस डीजल निर्यात पर लगी रोक को एक और महीने बढ़ाने पर विचार कर रहा है, क्योंकि यूक्रेन उसकी रिफाइनरियों पर रिकॉर्ड गति से हमले कर रहा है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने ईरान का एक दिन का दौरा किया। ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस यात्रा से काफी अच्छे नतीजे निकले। वहीं, ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए शिपिंग शुरू करने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था पर चर्चा की। यह जानकारी ओमान न्यूज एजेंसी के संयुक्त बयान में दी गई।
सोमवार को अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने का ऐलान किया, लेकिन निवेशकों ने इस ऐलान को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि अमेरिका ने चीन (जो ईरान से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदता है) समेत दूसरे देशों पर फिलहाल कोई नया भारी प्रतिबंध नहीं लगाया।
इसके अलावा, मंगलवार को 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की खबर आई कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने राजदूतों को वापस भेज रहा है। इससे संकेत मिला कि वाशिंगटन फिलहाल कोई बड़ी फौजी कार्रवाई नहीं करने वाला, जिससे कीमतों पर और दबाव बना।
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