उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में डेढ़ दशक पहले शुरू हुई 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में प्रदेश सरकार अब किसी को नौकरी को देने को तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन अवमानना याचिकाओं में बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि 2011 में शुरू हुई प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर कई दौर की न्यायिक कार्यवाही हो चुकी है और अब इस मामले में आगे किसी नियुक्ति का आधार नहीं बचता।
हलफनामे में कहा गया है कि स्टेट ऑफ यूपी बनाम शिव कुमार पाठक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को फैसला देते हुए 66,555 नियुक्तियों को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया था, जबकि शेष रिक्तियों को नई विज्ञप्ति के माध्यम से भरने के लिए कहा गया था। राज्य सरकार के अनुसार, इसी मामले से जुड़े कई अभ्यर्थियों ने अंतरिम आदेशों के आधार पर नियुक्ति की मांग की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 16 अप्रैल 2024 को ऐसे दावों को खारिज कर दिया। इसके बाद दायर एसएलपी को भी सुप्रीम कोर्ट ने छह मई 2024 को खारिज कर दिया।
निदेशक का कहना है कि विभिन्न न्यायिक आदेशों के बाद यह स्थिति स्पष्ट हो चुकी है कि इस मामले में आगे किसी अभ्यर्थी को अंतरिम आदेश या अन्य आधार पर नियुक्ति नहीं दी जानी है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वर्तमान अवमानना याचिकाओं और उनसे जुड़ी याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध किया है।
इसके साथ ही एनआईओएस डीएलएड वालों के बारे में एक महत्वपूर्ण खबर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बुधवार को यूपीटीईटी का परिणाम घोषित कर दिया है लेकिन एनआईओएस से मुक्त और दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल) के जरिए 18 महीने का डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों का परिणाम रोक लिया गया है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दायर याचिका में 24 अप्रैल को कोर्ट ने इन अभ्यर्थियों को सशर्त यूपीटीईटी में शामिल करने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ चयन आयोग की ओर से दायर विशेष अपील पर एक जुलाई को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने केवल उन अभ्यर्थियों को परीक्षा में औपबंधिक रूप से शामिल होने की अनुमति दी थी जो 31 मार्च 2015 अथवा उससे पूर्व सेवा में थे।
हालांकि हाईकोर्ट ने साफ किया था कि यह अनुमति लंबित वाद के अंतिम निर्णय के अधीन होगी और ऐसे अभ्यर्थियों का परिणाम विशेष अपील के अंतिम निस्तारण अथवा हाईकोर्ट के आगामी आदेश तक घोषित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा जो अभ्यर्थी 31 मार्च 2015 से पूर्व सेवा में नहीं थे उन्हें हाईकोर्ट ने बुधवार के अपने अन्तरिम आदेश में परीक्षा में सम्मिलित होने के पात्र नहीं माना था। यही कारण है कि चयन आयोग ने एनआईओएस से डीएलएड करने वाले हजारों अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल तो होने दिया लेकिन परिणाम घोषित नहीं किया है।
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