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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बीच दो दिनों से फंसे महाराष्ट्र के नागपुर, नासिक और पुणे क्षेत्र के 110 श्रद्धालु शुक्रवार को सुरक्षित भारत लौट आए। श्रद्धालुओं के सीतामढ़ी के भिट्ठामोड़ बॉर्डर पहुंचने पर जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली और सभी की मदद की। यात्रियों को भिट्ठा थाना लाकर नाश्ता और भोजन कराया गया। इसके बाद स्वास्थ्य जांच कराकर बस के जरिए पटना भेजा गया, जहां से सभी श्रद्धालु अपने-अपने घरों के लिए रवाना होंगे। वहीं, नेपाल के रसुवा में आई बाढ़ ने एक ही गांव के तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। निर्माण कार्य के सिलसिले में रसुवा गए तीन नेपाली मजदूरों की बाढ़ की चपेट में आने से मौत हो गई।
काठमांडू में फंसे थे महाराष्ट्र के 110 श्रद्धालु
महाराष्ट्र के ये 110 श्रद्धालु नेपाल के पोखरा घूमने के बाद काठमांडू में आयोजित शिव पुराण महायज्ञ में शामिल होने गए थे। इसके बाद उनकी भारत वापसी की तैयारी थी, लेकिन अचानक आई आपदा के कारण कई रास्ते बंद हो गए और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। इस दौरान यात्रियों के पास मौजूद पैसे भी खत्म हो गए, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई।
यात्रियों ने बताया कि शुक्रवार सुबह आठ बजे दानपुर से उनकी ट्रेन थी। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए परेशान यात्रियों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर को फोन कर नेपाल में यात्रियों के फंसे होने की जानकारी दी।
सांसद ने नेपाल के मुख्यमंत्री और वहां के सांसदों से संपर्क कर यात्रियों को सुरक्षित निकालने की पहल की। इसके बाद काठमांडू के सांसद संदीप राणा गुरुवार सुबह करीब आठ बजे यात्रियों से मिले। उनकी मदद से यात्रियों के लिए बस की व्यवस्था कराई गई। हालांकि, भारत लौटने के दौरान यात्रियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा और रास्ते में दो बार बस बदलनी पड़ी।
पुल पार करने के कुछ देर बाद ही बह गया रास्ता
पुणे निवासी 72 वर्षीय देवेंद्र पालीवाल ने नेपाल से लौटने के दौरान सामने आई मुश्किलों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि काठमांडू से करीब 40 किलोमीटर आगे निकलने के बाद नेपाली प्रहरी ने उन्हें रोक दिया। इससे पहले रास्ते में एक पुल आया था, जिसके नीचे नदी में तेज धार के साथ काफी पानी बह रहा था।
उन्होंने बताया कि काफी मिन्नत करने के बाद यात्रियों को बस से उतारकर छोटी गाड़ियों के जरिए पुल पार कराया गया। इसके बाद खाली बस को भी पुल के दूसरी ओर ले जाया गया। यात्रियों के कुछ दूर आगे निकलने के बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि जिस पुल को वे कुछ देर पहले पार करके आए थे, वह तेज पानी के बहाव में बह गया। यह सुनकर यात्रियों की सांसें अटक गईं। यात्रियों ने कहा कि अगर कुछ मिनट का भी अंतर होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
72 वर्षीय श्रद्धालु बोले- अब ऐसी यात्रा से करूंगा परहेज
देवेंद्र पालीवाल ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि इस उम्र में कहीं जाने से बेहतर है कि घर में ही पूजा-अर्चना की जाए। रास्ते में जिस तरह के भयावह दृश्य देखने को मिले, उन्हें याद कर आज भी डर लगता है। उन्होंने कहा कि किसी तरह सुरक्षित घर पहुंच जाएं, यही सबसे बड़ी बात है। उन्होंने अगली बार ऐसी यात्रा करने से परहेज करने की बात कही और अपनी उम्र के लोगों को भी विषम परिस्थितियों में यात्रा करने से बचने का संदेश दिया।
भक्त श्रीधर महाराज, विमल भाटिया, रेखा कातिर, हेमंत पालीवाल और देवेंद्र पालीवाल ने बताया कि सभी लोग 21 हजार रुपये प्रति व्यक्ति देकर नेपाल यात्रा पर गए थे। सभी श्रद्धालु ट्रेन से गोरखपुर पहुंचे थे और वहां से बस के जरिए पोखरा गए थे।
भिट्ठामोड़ बॉर्डर पहुंचते ही प्रशासन ने संभाला मोर्चा
तमाम परेशानियों के बीच शुक्रवार को सभी 110 श्रद्धालु भिट्ठामोड़ बॉर्डर पहुंचे। इसके बाद उन्हें भिट्ठा थाना लाया गया, जहां उनके भोजन की व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य जांच कराने के बाद सभी को सुरक्षित बस से पटना भेजा गया। पटना से श्रद्धालु अपने-अपने घरों के लिए रवाना होंगे।
रसुवा की बाढ़ ने एक गांव के तीन परिवारों को उजाड़ा
इधर, नेपाल के रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ ने सांही के एक ही गांव के तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। लालबंदी नगरपालिका-14 के माइस्थान निवासी राम गोले, लक्ष्मण गोले और सुसाल गोले की बाढ़ की चपेट में आने से मौत हो गई। तीनों रोजगार के सिलसिले में रसुवा में निर्माण कार्य कर रहे थे।
परिजनों के अनुसार, तीनों कुछ समय पहले काम की तलाश में रसुवा पहुंचे थे। निर्माण स्थल पर काम करने के दौरान अचानक आई बाढ़ ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया और तीनों की जान चली गई। एक ही गांव के तीन लोगों की एक साथ मौत की खबर मिलते ही माइस्थान में शोक की लहर दौड़ गई। मृतकों के घरों में चीख-पुकार मची है और परिजन व स्थानीय लोग गहरे सदमे में हैं। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शवों को सर्लाही लाने की तैयारी की जा रही है।
सीतामढ़ी में फिलहाल बाढ़ का खतरा टला, प्रशासन अलर्ट
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में स्थिति सामान्य होने के कारण सीतामढ़ी जिले में बाढ़ की तात्कालिक आशंका फिलहाल समाप्त हो गई है। हालांकि, गुरुवार रात बागमती नदी के जलस्तर में हल्की वृद्धि दर्ज की गई थी, लेकिन शुक्रवार सुबह से स्थिति स्थिर बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र विशेष में हुई बारिश के कारण जलस्तर में यह सामान्य वृद्धि हुई थी।
इसके बावजूद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। डीएम तनय सुल्तानिया ने बाढ़ संभावित प्रखंडों के बीडीओ, सीओ, स्वास्थ्य, पशुपालन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को सतर्क रहने तथा आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। तटबंधों, संवेदनशील क्षेत्रों और आवागमन मार्गों की दिन-रात निगरानी की जा रही है।
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