वाराणसी में धारा‑धारावाहिक काशी रोपवे परियोजना अब लगभग पूरी हो गई है; कुल कार्य का 96 % पूरा होने के बाद ट्रायल चरण शुरू हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर 2026 के आसपास यात्रियों के लिए सेवा शुरू की जा सकती है, जबकि आधिकारिक संचालन तिथि की पुष्टि अभी बाकी है।
रोपवे की लंबाई 3.85 किमी है और कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक का सफर सिर्फ 16 मिनट में तय हो जाएगा। मौजूदा सड़क मार्ग पर ट्रैफिक के कारण यह दूरी 30‑45 मिनट लेती है। पूरे मार्ग का किराया 50 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि दो स्टेशनों के बीच की यात्रा के लिए 10 रुपये लिया जाएगा।
परियोजना में कुल पाँच स्टेशन और 148 गंडोले लगाए जाएंगे। प्रत्येक गंडोले में 10 यात्रियों की बैठने की क्षमता होगी और हर दो मिनट में एक केबिन स्टेशन पर पहुँचेगी। रोपवे को प्रतिदिन लगभग 16 घंटे चलाने की योजना है, जिससे पीक आवागमन के दौरान भी सुगम यात्रा सुनिश्चित होगी।
कुल लागत लगभग 807 करोड़ रुपये है और इस परियोजना की आधारशिला 24 मार्च 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। इसका मुख्य उद्देश्य शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में आवागमन को तेज़ और सुरक्षित बनाना तथा कैंट स्टेशन को गोदौलिया क्षेत्र से सीधे जोड़ना है।
सुरक्षा के लिहाज़ से रोपवे में यूरोपीय मानकों के आधुनिक उपकरण और स्विट्ज़रलैंड के इंजीनियरों की निगरानी शामिल है। तेज हवा (60 किमी/घंटा से अधिक) चलने पर स्वचालित रूप से संचालन बंद हो जाएगा, और बिजली या मुख्य सिस्टम में गड़बड़ी होने पर बैकअप पावर से गंडोले को निकटतम स्टेशन तक पहुँचाया जाएगा। टावरों पर लगे सेंसर और कंट्रोल रूम से सभी केबिनों की निरंतर निगरानी की जाएगी।
दिव्यांग यात्रियों के लिए प्रत्येक स्टेशन पर लिफ्ट और एस्केलेटर की सुविधा होगी, साथ ही व्हीलचेयर से गंडोले तक पहुँचने का प्रावधान है। केबिन में जरूरत के अनुसार बैठने की व्यवस्था की जा सकेगी। यात्रियों को सात किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति होगी; अतिरिक्त वजन के लिए अतिरिक्त टिकट आवश्यक होगा। कैंट स्टेशन पर लॉकर सुविधा भी प्रस्तावित है।
रोपवे को केवल परिवहन साधन नहीं, बल्कि पर्यटन अनुभव बनाने की दिशा में भी विकसित किया जा रहा है। गंडोले पर काशी के मंदिरों और घाटों से जुड़ी कलाकृतियां लगाई गई हैं, और यात्रा के दौरान भगवान शिव के भजन सुनने की व्यवस्था होगी। गर्मी में आराम के लिए विशेष वेंटिलेशन सिस्टम और रात के समय रोशनी से सजे केबिन यात्रियों को काशी का अलग नजारा प्रदान करेंगे।
परियोजना के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLM) के पास है, जबकि अगले 15 सालों तक संचालन विश्व समुद्रा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। वर्तमान में शेष निर्माण कार्य और तकनीकी परीक्षण चल रहे हैं, और सुरक्षा जांच व ट्रायल पूरी होने के बाद ही सार्वजनिक सेवा शुरू होगी। काशीवासियों को उम्मीद है कि रोपवे के संचालन से शहर के मुख्य मार्गों पर जाम कम होगा और श्रद्धालुओं व पर्यटकों का सफर सहज हो जाएगा।
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