Brent Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। 10 सितंबर 2026 को ब्रेंट क्रूड (Brent crude) पहली बार $105 प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। यह 25 मई के बाद ब्रेंट (Brent) की सबसे ऊंची कीमत है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके साथ ही चीन की ओर से बढ़ती खरीदारी और सऊदी अरब के तेल उत्पादन में भारी गिरावट ने भी कीमतों को ऊपर जाने में मदद की है।
ब्रेंट फ्यूचर (Brent futures) में लगातार तेजी जारी है। शाम 5:55 बजे भारतीय समय के अनुसार ब्रेंट क्रूड (Brent crude) करीब 2.63% बढ़कर $104 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले बुधवार को भी कच्चे तेल ने $100 का स्तर पार किया था। पिछले कुछ हफ्तों में संघर्ष बढ़ने के बाद बाजार में यह चिंता गहरी हुई है कि खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित हो सकती है।
ईरान की ओर से फिलहाल पीछे हटने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के अनुसार अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के बावजूद ईरान अपने रुख में बदलाव नहीं करेगा और हमले जारी रहने पर जवाबी कार्रवाई और तेज हो सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि संघर्ष जल्द समाप्त होने की संभावना कम है। ऐसे बयानों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
अगस्त की शुरुआत में बने निचले स्तरों से ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमत अब करीब 30% ऊपर आ चुकी है। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी संघर्षविराम की उम्मीद पूरी नहीं होने और दोबारा लड़ाई शुरू होने के बाद तेल बाजार में सप्लाई को लेकर जोखिम बढ़ गया।
सऊदी अरब का उत्पादन भी बाजार के लिए चिंता का विषय बन गया है। OPEC को दिए गए आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में सऊदी अरब ने करीब 62 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन किया, जो 2026 का सबसे निचला मासिक स्तर है। यह जुलाई के मुकाबले करीब 23% कम है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के पश्चिमी तट से होने वाली शिपमेंट को लेकर धमकियों ने स्थिति को और जटिल बनाया है।
अब बाजार की नजर चीन पर भी है। चीन दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और उसकी खरीदारी में लगातार सुधार हुआ, तो सप्लाई बाधित होने की स्थिति में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसके उलट अगर चीनी आयात कमजोर पड़ता है, तो तेल की तेजी कुछ हद तक सीमित हो सकती है।
एक्सपर्ट के मुताबिक मौजूदा तेजी केवल भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा नहीं है, बल्कि मांग और उपलब्ध सप्लाई के संतुलन पर भी निर्भर करेगी। अगर संघर्ष लंबा चलता है और खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो ब्रेंट (Brent) के $100 से ऊपर बने रहने का जोखिम बढ़ सकता है। इसका असर पेट्रोल-डीजल से लेकर परिवहन, विमानन, रसायन और महंगाई तक कई सेक्टर पर पड़ सकता है।
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