उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के 10 सीटों के लिए मतदान शुरू होते ही गणित और सियासी आँकड़े सामने आ गए हैं। भाजपा और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच इस चुनाव में शर्तें स्पष्ट हैं: दोनों पार्टियों को अपने‑अपने उम्मीदवारों को पहली वरीयता में जीत दिलाने के लिए पर्याप्त विधायकों के समर्थन की जरूरत है।
राज्यसभा चुनाव का फॉर्मूला सरल है – कुल प्रभावी विधायक (वर्तमान में 396) को (सीटों की संख्या + 1) से भाग दिया जाता है, फिर परिणाम में 1 जोड़ दिया जाता है। 10 सीटों के लिये (10 + 1) = 11, इसलिए 396 ÷ 11 ≈ 36, और 1 जोड़ने पर 37 बनता है। यानी एक सीट जीतने के लिये किसी उम्मीदवार को 37 प्रथम‑वरीयता वोट चाहिए।
SP ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 111 विधायक चुने थे, लेकिन 2026 तक यह संख्या घटकर 98 रह गई। बागी विधायक, जेल में बंद रमाकांत यादव और अन्य क्रॉस‑वोटिंग वाले सांसदों को हटाने के बाद SP के पास लगभग 97‑99 विधायक बचते हैं। यदि कांग्रेस के दो विधायक समर्थन दे दें तो यह आंकड़ा 99 तक पहुँच सकता है।
SP को तीन सीटें जीतने के लिये 111 प्रथम‑वरीयता वोट चाहिए। वर्तमान में उसके पास दो सीटों (2 × 37 = 74) के लिये पर्याप्त वोट हैं, जिससे 25‑28 अतिरिक्त वोट बचे हैं। तीसरी सीट को सुरक्षित करने के लिये उसे कम से कम 12‑14 और विधायकों का समर्थन चाहिए – यही ‘111‑का जादुई नंबर’ है, जिसे वह अभी तक नहीं जुटा पाई है।
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिये SP ने विपक्षी और तटस्थ विधायकों पर ध्यान केंद्रित किया है। संभावित सहयोगियों में सुभासपा के तीन विधायक (जो मूल रूप से SP पृष्ठभूमि के हैं), बागी लेकिन अभी तक निष्कासित न हुए विधायक, तथा आरएलडी और अपना दल के कुछ स्वतंत्र विधायक शामिल हैं। यदि इन सभी का समर्थन मिल जाए तो SP को अतिरिक्त 5‑7 वोट मिल सकते हैं, पर फिर भी 12‑14 वोट की कमी बनी रहेगी।
अखिलेश यादव ने अभी तक अपना तीसरा उम्मीदवार नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी तभी उतारा जाएगा जब ‘नंबर पूरा हो जाएगा’, यानी जब आवश्यक विधायकों का समर्थन सुरक्षित हो जाएगा। यह चुनाव उनके लिये केवल नाम तय करने का खेल नहीं, बल्कि अपने दल को एकजुट रखने और 111‑वोट लक्ष्य को हासिल करके भाजपा‑एनडीए के गठबंधन को तोड़ने की बड़ी परीक्षा है।
दूसरी ओर, भाजपा भी 8 सीटें जीतने का लक्ष्य रख रही है। उसके पास वर्तमान में 255 विधायक, एस (13), आरएलडी (9), सुभासपा (6) और निषाद पार्टी (5) के सदस्य हैं – कुल मिलाकर लगभग 288 वोट। बागी SP विधायक और राजा भैया की पार्टी (जनसत्ता दल) के 2‑3 विधायक को जोड़ने पर यह संख्या 295‑297 तक पहुँचती है। 8 सीटें जीतने के लिये उसे 8 × 37 = 296 वोट चाहिए, इसलिए उसे भी अतिरिक्त 5‑7 विधायकों का समर्थन चाहिए, जिससे क्रॉस‑वोटिंग का जोखिम बना रहता है।
इस प्रकार, दोनों गठबंधन अपने‑अपने ‘मैजिक नंबर’ को पूरा करने के लिये विधायकों के समर्थन को लेकर कड़ी दावपेंच में हैं, और राज्यसभा चुनाव का अंतिम परिणाम यूपी की राजनीति में नई दिशा तय करेगा।
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