फर्रुखाबाद में लगातार हो रही बारिश से गंगा खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इसके चलते जिले में लगभग 81 गांव बाढ़ से घिर गए हैं। इसके बाद भी ग्रामीण गांव छोड़ने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव और मोटरवोट लगाए गए हैं। जिला प्रशासन की टीम बाढ़ शरणालयों से लेकर बाढ़ चौकियों तक पर नजर रखे हुए है। जिस तरह से गंगा का पानी बढ़ रहा है उससे निचले इलाके में ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ती जा रही है।
अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि गंगा के पानी पर नजर रखी जा रही है। प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों को कोई दिक्कत न हो इसलिए नाव और मोटर बोट लगाई गई है। बाढ़ प्रभावित गांवों में मेडिकल कैंप भी लगवाए जा रहे हैं। बाढ़ शरणालयों में जो लोग पहुंचे हैं उन्हें पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित परिवारों को खाद्यान्न के पैकेट भी वितरित किए जा रहे हैं।
तराई क्षेत्र के कटरी तौफीक में गंगा ने इस कदर कहर बरपाया कि उसका अस्तित्व ही खतरे में आ गया है। पूरे गांव में वीरानगी है। अब सिर्फ गांव में चार मकान और एक परिषदीय स्कूल ही बचा है। एहतियात इस स्कूल से सामान निकाल लिया गया है। कटान इसी तरह जारी रहा तो चार मकान और स्कूल गंगा में समा जाएंगे। जिससे लोगों की चिंता बढ़ी है।
गंगा में मकान के समा जाने से पीड़ित परिवार सड़क किनारे अपना सामान रखने और दूसरे ग्रामीणो के घरों में रहने को मजबूर हो रहे हैं। कटरी तौफीक गांव को इस बार गंगा ने उजाड़ सा दिया है। गंगा के कहर से एक पर एक मकान कटान की जद में आते गये और गंगा में समाते गये। करीब 50 घर गंगा में समा चुके हैं। सिर्फ चार मकान बचे हैं। इनका भी अस्तित्व खतरे में है।
स्कूल के इंंचार्ज प्रधानाध्यापक इख्तियार अहमद ने शिक्षकों और ग्रामीणों की मदद लेकर नाव से विद्यालय पहुंचकर वहां रखा सामान बाहर निकलवाया और इस सामान को प्रबंध समिति की अध्यक्ष गुड्डी देवी के घर पहुंचाकर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि कटरी तौफीक अलग अलग चार स्थानों पर बसा हुआ था। कटरी तौफीक के लेखपाल ने बताया कि अब तक 38 घर गंगा में समा चुके हैं। जबकि तीन ग्रामीण अपने घर तोड़ रहे हैं। सभी की सूची बनायी जा रही है। सभी के रहने, खाने, पीने की उचित व्यवस्था की जाएगी।
एसडीएम श्वेता साहू ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इटावा बरेली हाईवे पर गांधी गांव के पास सड़क किनारे बंधे पशुओ को हटवाने के निर्देश दिये। राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर पुलिस बल के साथ पशुओं को हटवाया। एसडीएम ने चित्रकूट डिप का भी निरीक्षण किया। ग्रामीणों को बाढ़ के पानी में न जाने और सुरक्षित रहने की सलाह दी। कहा पीड़ित बाढ़ शरणालय में जा सकते हैं जहां प्रभावित लोगों को आवश्यक सुविधायें दी जा रही हैं। एसडीएम ने तहसीलदार के साथ बदनपुर गांव के किनारे पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की।
कायमगंज एसडीएम ने राजस्व टीम के साथ स्टीमर से समेचीपुर चितार, पैलानी दक्षिण, भगवानपुर, नगला बसोला, बांसखेड़ा सहित कई बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। समेचीपुर चितार में एसडीएम ने पीड़ितों से बातचीत की। यहां पता लगा कि गंगा के कटान से आठ पक्के मकान और सात झोपड़ियां बह गईं हैं।एसडीएम ने पीड़ितों को रहने और भोजन समेत हर संभव मदद का भरोसा दिया। उन्होने लेखपाल पंकज कुमार को बेघर परिवारो के लिए भूमि आवंटित करने के निर्देश दिये। लेखपाल ने बताया कि समेचीपुर चितार में अब तक 15 घार कटान में बह चुके है।
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