उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में लगातार हो रही बारिश के बाद मंदाकिनी नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है. नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया है. डीएम पुलकित गर्ग के मुताबिक, मंदाकिनी ने पिछले 23 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. साल 2003 में नदी का जलस्तर करीब 134 सेंटीमीटर दर्ज किया गया था, जबकि इस बार यह 134.02 सेंटीमीटर तक पहुंच गया.
मंदाकिनी के बढ़ते जलस्तर से यूपी-एमपी सीमा पर स्थित रामघाट पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गया है. घाट की सैकड़ों दुकानें पानी में डूब गई हैं. कई मठ और मंदिरों के अंदर भी पानी घुस चुका है. हालात इतने खराब हैं कि लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों की छतों पर बैठे हुए हैं. प्रशासन ने लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है.
नदी का बहाव इतना तेज है कि रामघाट में हनुमानधारा जाने वाले मार्ग पर बना पुल पानी की तेज धार में बह गया. चित्रकूट से मध्य प्रदेश के सतना जिले की ओर जाने वाले रास्ते पर भी बाढ़ का पानी भर गया है. जिन सड़कों पर पहले वाहन दौड़ते थे, वहां अब नावों का सहारा लिया जा रहा है. नाव के जरिए बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है.
रामघाट से गांवों तक बाढ़ का असर
मंदाकिनी का पानी अब यूपी-एमपी सीमा के बड़े हिस्से में फैल गया है. उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में तरौंहा, गोबरिया और बहादुर समेत कई गांव प्रभावित हुए हैं. कई लोग बाढ़ के बीच फंस गए, जिन्हें प्रशासन और SDRF की टीमों ने रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. स्थिति को देखते हुए यूपी और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों का प्रशासन अलर्ट मोड पर है.
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने घाटों और जलभराव वाले इलाकों में लोगों की आवाजाही रोक दी है. लगातार अनाउंसमेंट कर लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की जा रही है. प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के ठहरने, खाने और पीने की व्यवस्था भी की गई है. अधिकारियों की टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं.
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि बाढ़ को लेकर रात में ही प्रशासन की टीमों ने लोगों को अलर्ट करना शुरू कर दिया था. इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. डीएम के मुताबिक, जहां जलभराव हुआ है और लोग फंसे हैं, वहां राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है.
NDRF-SDRF की टीमें तैनात, हेलीकॉप्टर से भी बचाव
बाढ़ से निपटने के लिए चार NDRF टीम, चार SDRF टीम और दो PAC टीमों को लगाया गया है. इसके अलावा 10 और टीमें भी बुलाई गई हैं, जिन्हें जरूरत के मुताबिक जलभराव और बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात किया जाएगा. प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की है.
मध्य प्रदेश प्रशासन की ओर से हेलीकॉप्टर की मदद से भी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. बाढ़ में फंसे कई लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला गया. वहीं, जिन स्थानों तक टीमें नाव से पहुंच सकती हैं, वहां नावों की मदद से लोगों को बाहर लाया जा रहा है. SDRF और NDRF के जवान लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं.
मंदाकिनी पुल पर पानी, NH-35 का यातायात बंद
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने के कारण कर्वी शहर में नदी पर बने पुल के ऊपर से पानी बहने लगा. इसके चलते झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाईवे-35 पर आवागमन बंद कर दिया गया है. पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और कई घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही. प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील की है.
डीएम ने कहा कि प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा और राहत व्यवस्था पर लगातार नजर रख रहा है. प्रभावित परिवारों के लिए ठहरने और भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है. अधिकारियों और बचाव दलों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है. बारिश और नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि हालात बिगड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान तेज किया जा सके.
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