चीनी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए सितंबर में राहत की खबर है। देश के प्रमुख शहरों में चीनी के दाम लगातार नीचे आए हैं। 10 सितंबर के बंद फुटकर भाव की तुलना में चीनी 4 रुपये किलो तक सस्ती हो चुकी है। जबकि, 1 सितंबर से 11 सितंबर के बीच दिल्ली और कानपुर में थोक भाव ₹850 प्रति क्विंटल यानी ₹8.50 किलो तक घट गया। वहीं रिटेल प्राइस की बात करें तो रायपुर और चेन्नई में ₹4 किलो, जबकि मुंबई में ₹2 किलो की गिरावट दर्ज की गई।
ChiniMandi के आंकड़ों के मुताबिक 1 सितंबर को दिल्ली में चीनी का थोक भाव ₹5,800 प्रति क्विंटल था। 11 सितंबर को यह घटकर ₹4,950 रह गया। यानी 10 दिनों में कीमत ₹850 प्रति क्विंटल या करीब 14.7 फीसदी कम हुई।
कानपुर में भी यही तस्वीर रही। यहां भाव 5,850 से गिरकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। यानी 850 रुपये प्रति क्विंटल की कमी। दूसरी ओर रायपुर में कीमत 5,500 से घटकर 5,100, जबकि चेन्नई में 6,000 से घटकर 5,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।
1 सितंबर से 11 सितंबर के बीच दिल्ली में चीनी 5,800 रुपये प्रति क्विंटल से 4,950 पर आ गई है। इसमें 850 रुपये की कमी दर्ज की गई है। कानपुर की बात करें तो इस अवधि में चीनी का थोक भाव ₹850 ही घटकर 5,850 से 5,000 पर आ गया है। रायपुर में यह 5,500 रुपये से 5,100, मुंबई में 5,300 से 5,100 रुपये पर आ गई है। जबकि, रांची में चीनी का होलसेल रेट 5,500 से 5,150 रुपये पर आ गया है।
चीनी कोलकाता में 5,500 से 5,150 और गुवाहाटी में 5,550 से 5,200 रुपये पर आ गई है। यही चीनी हैदराबाद में 11 दिन पहले 5,400 रुपये की थी और आज 5,180 रुपये पर आ गई है। चेन्नई में 1 क्विंटल चीनी का दाम 6,000 से घटकर 5,600 रुपये पर आ गया है। सबसे ज्यादा गिरावट दिल्ली और कानपुर में हुई, जबकि मुंबई में इस अवधि में गिरावट सबसे कम रही।
खुदरा कीमतों का आंकड़ा देखें तो 1 सितंबर को दिल्ली में चीनी 61 रुपये किलो थी। 11 सितंबर को यह घटकर 53 रुपये किलो रह गई। यानी ग्राहक को सीधे ₹8 प्रति किलो की राहत मिली। कानपुर में भी भाव 62 से घटकर 53 रुपये किलो रह गया। यानी यहां ₹9 किलो की गिरावट हुई। रायपुर में 62 से 55, मुंबई में 61 से 54 और रांची में 61 से 55 रुपये प्रति किलो भाव रह गया। चेन्नई में खुदरा कीमत 63 से घटकर 58 रुपये किलो पर आ गई।
सरकार की नजर सिर्फ कीमत पर नहीं, सप्लाई पर भी: सरकार का फोकस अब यह सुनिश्चित करने पर है कि त्योहारों के दौरान चीनी की कृत्रिम कमी न बने। इसके लिए मिलों को पर्याप्त मात्रा में बाजार में चीनी उपलब्ध कराने और उचित कीमत पर बिक्री करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार पहले ही चीनी के स्टॉक और बिक्री पर कई कदम उठा चुकी है। सितंबर से मिलों के लिए पखवाड़े के आधार पर बिक्री कोटा तय करने की व्यवस्था शुरू की गई है, ताकि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न हो और सप्लाई सुचारु बनी रहे।
दुकानदारों पर भी स्टॉक लिमिट का शिकंजा: सरकार ने चीनी कारोबारियों के स्टॉक पर भी सीमा लगाई है। 15 सितंबर से डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट घटाकर 2,000 क्विंटल की जा रही है। यह व्यवस्था 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। हालांकि कोलकाता में क्षेत्रीय सप्लाई जरूरतों को देखते हुए 4,000 क्विंटल की सीमा रखी गई है।
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