Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक की 2019 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को बड़ा झटका देते हुए एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें अधिकारियों को पुराने नियम के आधार पर एमएमजीएस-II में रखने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने एसबीआई की विशेष अपील मंजूर करते हुए याचिका खारिज कर दी।
मामला एसबीआई के 2019 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से जुड़ा था। इन अधिकारियों की नियुक्ति के समय 23 अप्रैल 2019 की प्रशिक्षण एवं पुष्टि नीति लागू थी। इसके तहत प्रशिक्षण में 50 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले अधिकारियों को जेएमजीएस-I में पुष्टि तथा 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक पाने वालों को एमएमजीएस-II में नियुक्ति के लिए विचार किए जाने का प्रावधान था। अनुसूचित जाति और जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा क्रमश: 45 और 70 प्रतिशत थी।
बाद में 16 दिसंबर 2020 को एसबीआई ने नई नीति जारी कर एमएमजीएस-II में नियुक्ति को बैच के अधिकतम 10 प्रतिशत अधिकारियों तक सीमित कर दिया। 2019 बैच के अधिकारियों ने इसका विरोध किया। एकल पीठ ने नवंबर 2024 में नई नीति को मनमाना बताते हुए 2019 बैच के अधिकारियों को पुराने नियम के अनुसार उनके अंकों के आधार पर एमएमजीएस-II में रखने का निर्देश दिया था। खंडपीठ ने कहा कि बैंक के सेवा नियमों के तहत प्रशिक्षण पूरा करने पर अधिकारी को सेवा में पुष्टि का अधिकार है, लेकिन एमएमजीएस-II में नियुक्ति स्वत: अधिकार नहीं है। नियम 16 के पहले प्रावधान के अनुसार बैंक को अधिकारी की योग्यता और भविष्य में नेतृत्व की भूमिका के लिए उसकी उपयुक्तता के आधार पर एमएमजीएस-II में नियुक्ति का विवेकाधिकार है।
कोर्ट ने कहा कि पुरानी नीति में भी 75 प्रतिशत अंक पाने वाले अधिकारियों के लिए एमएमजीएस-II में नियुक्ति का अधिकार नहीं, बल्कि केवल विचार किए जाने का अधिकार था। नई नीति ने इसी विवेकाधिकार को अधिक पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ बनाने के लिए शीर्ष 10 प्रतिशत अधिकारियों तक सीमित किया है। इससे अधिकारियों की सेवा में पुष्टि का अधिकार प्रभावित नहीं हुआ है। अदालत ने यह भी माना कि 2018 और 2019 बैच के अधिकारियों के साथ भेदभाव नहीं हुआ। 2018 बैच का प्रशिक्षण और मूल्यांकन नई नीति लागू होने से पहले पूरा हो चुका था, जबकि 2019 बैच का मूल्यांकन उस समय लंबित था। इसलिए दोनों बैचों के बीच अंतर का तार्किक आधार मौजूद था।
खंडपीठ ने कहा कि नई नीति को बीच में नियम बदलना या पूर्वव्यापी प्रभाव वाली नीति नहीं माना जा सकता। अदालत ने एसबीआई की विशेष अपील स्वीकार करते हुए एकल पीठ का आदेश निरस्त कर दिया और मूल रिट याचिका खारिज कर दी। मामले में बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशि नंदन के साथ अधिवक्ता श्रुति मालवीय तथा अधिकारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे के साथ अधिवक्ता पंकज दुबे ने पक्ष रखा।
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